निवार तूफान के बाद तट पर बहकर आया सोना, बटोरने के लिए बारिश में भी पहुंच गए सैकड़ों लोग

*निवार तूफान के बाद तट पर बहकर आया सोना, बटोरने के लिए बारिश में भी पहुंच गए सैकड़ों लोग*

भारत के दक्षिणी राज्‍यों के समुद्री इलाकों में गुरुवार को निवार तूफान ने कहर ढाया, जिसमें कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई. साथ ही कई मकान और पेड़ क्षतिग्रस्‍त हुए हैं. तूफान के कारण बिजली की लाइनें भी प्रभावित हुई हैं. हालांकि इसके बावजूद सैकड़ों लोग भारी बारिश में आंध्र प्रदेश के गोदावरी नदी के तट पर एकत्र दिखे. दरअसल लोगों में यह खबर फैल गई कि निवार के कारण तट पर सोना बहकर आ गया है, जिसके बाद उसे बटोरने के लिए वहां पर लोगों की भीड़ एकत्र हो गई.

यह नजारा था कल आंध्र प्रदेश में उडप्‍पा गांव का. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वहां गोदावरी नदी के पूर्वी तट पर लोगों की अचानक भीड़ एकत्र होने लगी. ये लोग वहां सोना खोजने आए थे. ऐसा कहा जा रहा था कि यह सोना तट तक पानी में बहकर आया था. सबसे पहले कुछ मछुआरों ने इस सोने को पाया. इसके बाद जैसे ही यह खबर फैली तो सैकड़ों लोग वहां पहुंच गए. टाइम्‍स ऑफ इंडिया के मुताबिक कुछ लोगों का कहना है कि करीब 50 लोगों को करीब 3500-3500 रुपये का सोना मिला. इसकी कुछ फोटो भी सोशल मीडिया पर आईं.

सोने के मिलने के पीछे कुछ लोगों का कहना है कि इलाके में कुछ ऐतिहासिक मंदिर हैं, जो समय के साथ समुद्र में डूब गए हैं. अब निवार तूफान के कारण उनसे निकली चीजें समुद्री किनारे तक आ रही हैं. स्‍थानीय असिस्‍टेंट सब इंस्‍पेक्‍टर ने जानकारी दी कि इस इलाके में यह सामान्‍य बात है कि जब भी मंदिर या मकान बनाया जाता है तो उसकी नींव में सोना गाड़ा जाता है. तूफान के कारण इन मंदिर और मकानों की नींव में पड़ा सोना पानी में बहकर यहां आ सकता है.

*लॉक डाउन के दौरान सक्षम लोगो ने जो फ्री राशन लिया उनसे होगी वसूली*

*लॉक डाउन के दौरान सक्षम लोगो ने जो फ्री राशन लिया उनसे होगी वसूली*

लखनऊ में मार्च से सितम्बर तक बड़ी संख्या में जारी हुए कार्ड,

टीम बनाकर होगी सभी राशन कार्ड धारकों की जांच।

जिन कार्ड धारकों के पास चार पहिया वाहन, एसी या जनरेटर होगा वो होंगे अपात्र।

सौ वर्ग मीटर से अधिक का माकान प्लॉट या आय तीन लाख से अधिक होगी तो जब्त होंगे कार्ड,

जिला पूर्ति अधिकारी ने जांच के जारी किए आदेश।

भारत में सिंगापुर ने किया सबसे बड़ा निवेश, अमेरिका पहुंचा दूसरे पायदान पर

*भारत में सिंगापुर ने किया सबसे बड़ा निवेश, अमेरिका पहुंचा दूसरे पायदान पर*

कोरोना संकट के मुश्किल दौर में भी भारत प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश को लाने में सफल रहा है. वित्‍त वर्ष 2020-21 की पहली छमाही यानी अप्रैल-सितंबर 2020 के दौरान भारत में सबसे ज्‍यादा एफडीआई सिंगापुर से आया है. इस दौरान सिंगापुर ने भारत में 8.30 अरब डॉलर का एफडीआई किया. वहीं, इस बार दूसरे और चौथे पायदान पर मौजूद रहे देशों ने इस मामले में अदला-बदली की है. मॉरिशस 2 अरब डॉलर के निवेश के साथ चौथे नंबर पर खिसक गया है, जबकि अमेरिका 7.12 अरब डॉलर के एफडीआई के साथ चौथे से दूसरे पायदान पर आ गया है.

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान भारत में एफडीआई के लिये अमेरिका दूसरा सबसे बड़ा देश बनकर उभरा है. साल भर पहले की समान अवधि में मॉरीशस भारत में एफडीआई के मामले में का दूसरा सबसे बड़ा देश था. उद्योग व आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-सितंबर 2020 के दौरान भारत को केमैन आइलैंड से 2.1 अरब डॉलर का एफडीआई मिला. वहीं, नीदरलैंड्स से 1.5 अरब डॉलर, ब्रिटेन से 1.35 अरब डॉलर, फ्रांस से 1.13 अरब डॉलर का एफडीआई हासिल हुआ.

भारत में जापान से 65.3 करोड़ डॉलर, जर्मनी से 20.2 करोड़ डॉलर और साइप्रस से 4.8 करोड़ डॉलर का एफडीआई आया है. विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका से बढ़ता एफडीआई दोनों देशों के मजबूत होते आर्थिक संबंधों की ओर से स्‍पष्‍ट संकेत कर रहे हैं. वित्‍त वर्ष 2019-20 के दौरान भी भारत के साथ सबसे ज्‍यादा कारोबार करने वाला देश अमेरिका ही था. जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय में इकोनॉमिक्‍स के प्रोफेसर बिस्‍वजीत धर का कहना है कि अमेरिका की टेक्‍नोलॉजी कंपनियां भारतीय कंपनियों में हिस्‍सेदारी खरीद रही हैं. इसी वजह से एफडीआई में बढ़ोतरी दिख रही है.

मॉरिशस से एफडीआई घटने के बाद भी उसकी अप्रैल 2000 से लेकर सितंबर 2020 के बीच भारत में आए एफडीआई में 29 फीसदी हिस्‍सेदारी है. इस अवधि में भारत में अलग-अलग देशों ने 500.12 अरब डॉलर का प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश किया. चालू वित्‍त वर्ष की पहली छमाही के दौरान एफडीआई में 15 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. अकेले अगस्‍त 2020 में भारत को 17.5 अरब डॉलर का एफडीआई हासिल हुआ था.

नीति आयोग सदस्य का बयान- नए कृषि कानून को ठीक से समझ नहीं पाए हैं आंदोलनकारी किसान

*नीति आयोग सदस्य का बयान- नए कृषि कानून को ठीक से समझ नहीं पाए हैं आंदोलनकारी किसान*

नीति आयोग के सदस्य (कृषि) रमेश चंद ने कहा है कि आंदोलन कर रहे किसान नए कृषि कानूनों को पूरी तरह या सही प्रकार से समझ नहीं पाए हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन कानूनों में किसानों की आय को बढ़ाने की काफी क्षमता है. चंद ने कहा कि इन कानूनों का मकसद वह नहीं है, जो आंदोलन कर रहे किसानों को समझ आ रहा है. इन कानूनों का उद्देश्य इसके बिल्कुल उलट है. चंद ने कहा- जिस तरीके से मैं देख रहा हूं, मुझे लगता है कि आंदोलन कर रहे किसानों ने इन कानूनों को पूरी तरह या सही तरीके से समझा नहीं है.

उन्होंने कहा कि यदि इन कानूनों का क्रियान्वयन होता है, तो इस बात की काफी अधिक संभावना है कि किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी. कुछ राज्यों में तो किसानों की आय दोगुनी तक हो जाएगी. उनसे पूछा गया था कि क्या सरकार को अब भी भरोसा है कि वह 2022 तक किसानों की आय को दोगुना कर पाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने 2022 तक किसानों की आय को 2 गुना करने का लक्ष्य रखा है.

कृषि मंत्री ने किसानों से की आंदोलन खत्म करने की अपील, फिर भेजा बातचीत का प्रस्ताव

*कृषि मंत्री ने किसानों से की आंदोलन खत्म करने की अपील, फिर भेजा बातचीत का प्रस्ताव*

पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से आए हजारों किसान आज भी सिंधु और टीकरी बॉर्डर पर जबरदस्त प्रदर्शन कर रहे हैं. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा आग्रह किए जाने के बावजूद किसान बॉर्डर से टस से मस होने के लिए तैयार नहीं है. आज किसान संगठनों ने फैसला किया है कि बुराड़ी पहुंचे किसान भी वापस सिंधु बॉर्डर लौटेंगे. इसी बीच केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने चौथी बार किसानों से बातचीत का प्रस्ताव भेजा है.

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक तोमर ने कहा- सरकार ने चौथी बार 3 दिसंबर को मिलने का प्रस्ताव दिया है. इसके लिए पहले से ही बातचीत चल रही है, किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि सरकार इसके लिए तैयार नहीं है. सरकार बातचीत के लिए तैयार है, किसान यूनियनों को इसके लिए माहौल बनाना चाहिए. उन्हें आंदोलन छोड़ना चाहिए और वार्ता का चयन करना चाहिए.

रेल मंत्री का बड़ा ऐलान- अब रेलवे स्टेशन पर केवल कुल्हड़ में मिलेगी चाय, नहीं दिखेंगे प्लास्टिक कप

*रेल मंत्री का बड़ा ऐलान- अब रेलवे स्टेशन पर केवल कुल्हड़ में मिलेगी चाय, नहीं दिखेंगे प्लास्टिक कप*

आने वाले समय में देश के हर रेलवे स्टेशन पर कुल्हड़ में ही चाय मिलती दिखेगी और प्लास्टिक कप नहीं देखेंगे. यह ऐलान रेल मंत्री पीयूष गोयल ने किया है.

राजस्थान के अलवर में ढिगावड़ा रेलवे स्टेशन पर ढिगावड़ा-बांदीकुई रेलखंड पर विद्युतीकृत रेलमार्ग के लोकार्पण समारोह में गोयल ने कहा- आज देश में लगभग 400 रेलवे स्टेशनों पर कुल्हड़ में ही चाय मिलती है. आगे चलकर हमारी योजना है कि देश के हर रेलवे स्टेशन पर सिर्फ कुल्हड़ में चाय बिकेगी. प्लास्टिक मुक्त भारत में रेलवे का भी यह योगदान रहेगा. इससे लाखों भाई-बहनों को रोजगार मिलता है.

उन्होंने कहा कि पहले एक जमाना था जब रेलवे स्टेशनों पर कुल्हड़ में ही चाय मिलती थी. जब 2014 में केन्द्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आई तब तक कुल्हड़ गायब हो गए और प्लास्टिक के कप में चाय मिलनी शुरू हो गई. रेल मंत्री ने कहा कि खादी ग्रामोद्योग विभाग के लोगों ने रेलवे के साथ मिलकर इस कार्य को गति दी है.

समाजसेवा के लिए समर्पित श्री मां फाउंडेशन का कार्य सराहनीय – विद्यासागरजरुरतमंदों का सहयोग करने से मिलती है सुख और शांती – अंजुला राय

समाजसेवा के लिए समर्पित श्री मां फाउंडेश का कार्य सराहनीय – विद्यासागर

जरुरतमंदों का सहयोग करने से मिलती है सुख और शांती – अंजुला राय



जौनपुर। मुफ्तीगंज विकासखंड के निशान गांव में श्री मां फाउण्डेशन के तत्वाधान में फाउंण्डेशन की चेयरमैन अंजुला राय की तरफ से अपने जन्मदिन को सामाजिक सहयोग दिवस के रुप में मनाते हुए सैकड़ो छात्र – छात्राओं के बीच नोटबुक व पेन वितरित कर शिक्षा के प्रति जागरुक किया गया।

बातौर मुख्य अतिथि एमएलसी विद्यासागर सोनकर ने कहा कि कोई भी समाज बगैर शिक्षित हुए तरक्की नहीं कर सकता है। फाउंडेशन की चेयरमैन अंजुला राय की सोच और कार्य पद्धति से जहां आर्थिक रुप से कमजोर बच्चों को मदद मिल रही है वहीं शिक्षा के प्रति जागरुकता भी बढ़ेगी। क्योकि शिक्षित व्यक्ति ही देश व समाज के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चत कर सकता है । चेयरमैन मंजुला राय ने कहा कि श्री मां फाउंडेशन सामाजिक कार्यो के लिए सदैव समर्पित रहता है। कमजोर तबके के लोगों का सहयोग कर खुशी मिलती है । इसलिए अपने जन्मदिन को आज आर्थिक रुप से गरीब छात्र छात्राओं के मनाया। इस मौके पर प्रोफेसर वीरेन्द्र प्रताप सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता डा० नृपेन्द्र सिंह, डा० सतीश राय, भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा नवीं मुम्बई राजेश राय, आदर्श भारत सोशल फाउंडेशन के फाउडंड आदर्श श्रीवास्तव, भाजपा नेता कृष्णानन्द राय , सदानन्द राय सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थिति रहे ।

तिंदवारी (बांदा) 29 नवंबरकस्बे के गणेश तालाब के पास श्री संकटमोचन आश्रम कुटी प्रांगण में प्रति वर्ष की भांति आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम के तहत चार दिवसीय संगीतमय राम कथा एवं संत सम्मेलन

तिंदवारी (बांदा) 29 नवंबर
कस्बे के गणेश तालाब के पास श्री संकटमोचन आश्रम कुटी प्रांगण में प्रति वर्ष की भांति आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम के तहत चार दिवसीय संगीतमय राम कथा एवं संत सम्मेलन के अंतर्गत रविवार को जटायु उद्धार के प्रसंग ने भाव विभोर कर दिया।


आयोजित रामकथा में रामायणी पंडित जगदीश त्रिवेदी ने रामचरितमानस के आधार पर सुमधुर गायन तथा वाचन के द्वारा जटायु उद्धार की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि ” परहित बस जिन्ह के मन माही , तिन्ह कहुं जग दुर्लभ कछु नाही ।तनु तिय तात जाहु मम धामा ,देउं काह तुम्ह पूरन कामा ।” मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम जटायु से कहते हैं कि जिनके मन में दूसरे का हित बसता है अर्थात समाया रहता है, उसके लिए जग में कुछ भी दुर्लभ नहीं है। हे तात शरीर छोड़कर आप मेरे परमधाम में जाइए। मैं आपको क्या दूं , आप तो पूर्ण काम हैं। जटायु ने गीध की देह त्याग कर हरि का रूप धारण किया और बहुत से अनुपम आभूषण और दिव्य पितांबर पहन लिए। श्याम शरीर है, विशाल भुजाएं हैं और नेत्रों में प्रेम तथा आनंद के आंसुओं का जल भरकर वह स्तुति कर रहा है। हे राम जी आपकी जय हो, आपका रूप अनुपम है, आप निर्गुण हैं, सगुण हैं और सत्य ही गुणों के प्रेरक हैं। यहां चंद्रशेखर शास्त्री रामायण चित्रकूट , रेखा रामायणी आगरा द्वारा रामचरितमानस के प्रसंगों को संगीत के माध्यम से प्रस्तुत कर मंत्रमुग्ध कर दिया। यहां प्रतिवर्ष होने वाले वार्षिक उत्सव में आश्रम के महंत उद्धव दास जी महाराज के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर भाजपा नेता आनंद स्वरूप द्विवेदी, ठाकुर सत्येंद्र प्रताप सिंह, विष्णु दत्त तिवारी, बिंदा प्रजापति, सत्यनारायण द्विवेदी, गौरीशंकर गुप्ता, रविकरण गुप्ता, अखिल पटेल, बड़े लाल सिंह पटेल प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

उर्दू सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि सभ्यता का नाम है: मुर्तज़ा अलीआत्माराम त्रिपाठी की रिपोर्ट

उर्दू सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि सभ्यता का नाम है: मुर्तज़ा अली
आत्माराम त्रिपाठी की रिपोर्ट



लखनऊ उर्दू केवल एक भाषा नहीं है, यह सभ्यता का नाम है। उर्दू के माध्यम से, मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग इस्लाम को समझता और जानता है उर्दू नहीं तो हम नहीं, । अपने बच्चों को उर्दू पढ़ाएं इस्लामी पहचान के साथ जियें । यानी पहले मुस्लिम, फिर कुछ और, ये विचार पीस एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष मुर्तजा अली ने व्यक्त किए। कार्यक्रम के संयोजक और एसोसिएशन के सचिव वामिक खान ने कहा कि हमारी पहचान उर्दू से है। हम दुनिया में जहां भी जाते हैं, लोग पहचान जाते हैं कि आप लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं । उत्तर प्रदेश आर्टिस्ट एसोसिएशन द्वारा उर्दू 2020 का उत्सव आयोजित किया गया था। जिसमें पीस एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष मुर्तजा अली को उर्दू र पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया था।

उन्होंने अपने विचार व्यक्त किए। एसोसिएशन के सचिव वामिक खान और सामाजिक कार्यकर्ता निगहत खान ने मुर्तजा अली को एवार्ड से नवाज़ा ।

कमासिन, बांदा। क्षेत्र पंचायत गांव पन्नाह के गरगहा बाबा मैदान में मौन पूजा एवं विशाल भंडारे के साथ दिवारी नृत्य का आयोजन किया गया। रिपोर्ट :शत्रुध्न सिंह

कमासिन, बांदा। क्षेत्र पंचायत गांव पन्नाह के गरगहा बाबा मैदान में मौन पूजा एवं विशाल भंडारे के साथ दिवारी नृत्य का आयोजन किया गया। इस दौरान दिल ने गांव से एक दर्जन से अधिक दिवारी नृत्य कला टीमों ने बुंदेलखंडी लोक नृत्य का प्रदर्शन किया।

विजयी टीमों को पुरस्कार वितरण किया गया। अन्य गांव गांव से प्रतिभाग कर रही टीमों को नगद पुरस्कार के साथ शील्ड प्रदान की गई। आयोजन का उद्घाटन बापू कमल दास जी महाराज ने किया। संचालन का दायित्व जगदीश प्रसाद मिश्रा ने निभाया।

क्षेत्र पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत पन्ना हमें शनिवार के दिन मौन पूजा एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। पूजा अर्चना के बाद सैकड़ों लोगों ने भंडारे में आकर प्रसाद ग्रहण किया। इसी दौरान कार्यक्रम में बुंदेलखंड की अति प्राचीन पारंपरिक दिवारी लोक नृत्य कला का एक दर्जन से ज्यादा गांव से आए हुए कलाकार की टीमों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम आयोजक गांव के पूर्व प्रधान धनंजय करवरिया ने बताया कि प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष गरगहा बाबा मैदान में मौन पूजा एवं विशाल भंडारे का आयोजन ग्राम वासियों के सहयोग से किया गया है। इसी दौरान दिवारी नृत्य कला से गांव की जोड़ी टीमों को आमंत्रित किया गया था। सैकड़ों लोगों की उपस्थिति के मध्य बुंदेलखंड की अति प्राचीन दिवारी नृत्य कलाकारों द्वारा अपनी कला का खुलकर प्रदर्शन करते हुए लोगों को अपनी नृत्य कला से मंत्रमुग्ध कर दिया। बताया गया कि कार्यक्रम में पन्नाह, देवरथा, कृष्णानगर, कमासिन, मुसींवा, जाखी, देवरार, दुबे का पुरवा, इंगुवा, बैसन पुरवा, सेमौनी सहित बीस गांवों से आयी टीमों के कलाकारों ने अपनी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने गरगहा बाबा की पूजा के बाद भंडारे में आकर प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन का उद्घाटन करते हुए कमल दास बापू महाराज ने कहा कि दिवारी नृत्य बुंदेलखंड का पारंपरिक बहुचर्चित लोक नृत्य है। अभी यह कला गांवों में जीवन्त है। इस पारंपरिक लोक नृत्य कला की प्रशंसा प्रदेश से लेकर देश की राजधानी तक होती है। इस दौरान कार्यक्रम में प्रमुख रूप से कुलदीप नामदेव, रावेद्र गर्ग, इंद्रजीत यादव, सुशील द्विवेदी, बच्चू लाल यादव, कमल द्विवेदी, राजा बडगैयां
बांदा के कमासिन प्रदीप कुमार मिश्रा मंडल अध्यक्ष कमासिन के द्वारा
मुख विजेता टीम रामबरन याद
ओरन कि टीम को ₹6100 दिया गया पुरस्कार दिया गया के अलावा कार्यक्रम का संचालन कर रहे जगदीश प्रसाद मिश्रा मौजूद रहे।
रिपोर्ट शत्रुघ्न सिंह कमासिन बांदा