जिला जज ने बंद कराया बीजेपी का सदस्यता अभियान

जिला जज ने बंद कराया बीजेपी का सदस्यता अभियान

जौनपुर। दीवानी न्यायालय परिसर में भाजपा से जुड़े अधिवक्ता व पदाधिकारियों की ओर से शुक्रवार को कैंप लगाकर सदस्यता अभियान चलाया जा रहा था। इसके अलावा स्टैंड पर प्रचार वाहन लगाकर पार्टी का प्रचार-प्रसार किया जा रहा था। अधिवक्ताओं ने इसकी सूचना जनपद न्यायाधीश को दी। न्यायिक अधिकारियों ने तत्काल परिसर का निरीक्षण किया और सदस्यता अभियान के लिए लगाए गए कैंप को हटवाया। प्रचार वाहन को भी हटाया गया। जनपद न्यायाधीश ने कहा कि कोर्ट कैंपस को राजनीतिक दल के प्रचार-प्रसार का माध्यम कतई नहीं बनाना चाहिए। यह न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ है।

प्रतापगढ़: प्रधान की मां के निधन पर राजा भैया ने पहुंचकर जताई संवेदना:- रिपोर्ट पवन कुमार यादव

प्रधान की मां के निधन पर राजा भैया ने पहुंचकर जताई संवेदना:-

हीरागंज- बाबागंज ब्लाक के ग्राम पंचायत झींगुर के प्रधान रामकृष्ण तिवारी उर्फ डब्लू की मां का 4 दिन पूर्व ह्दय गति रुक जाने से आकस्मिक निधन हो गया था ! जिस पर सोमवार को जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया ग्राम प्रधान झींगुर के घर पहुंचे और उनकी मां के आकस्मिक निधन पर परिजनों से मिलकर संवेदना जताई !इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्षपति कुलदीप पटेल, पूर्व प्रमुख पंकजसिंह ,पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख शिव दर्शन शुक्ला भेड़ी महाराज, ओम प्रकाशत्रिपाठी ,डॉ दिवाकर त्रिपाठी डब्ल्यू , विनोद यादव ,पंकज त्रिपाठी पूर्व प्रधान अमर कुमार त्रिपाठी ,काशी दुबे ,दीपक भेड़ी समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे !

उत्तर प्रदेश सरकार ने चुनावी बिगुल बजने से पहले प्रदेश में तैनात सभी यादव एसडीएम को किया दरकिनार । क्या है चुनाव के वक्त मुख्य चुनावी अधिकारी के रूप में एसडीएम करते हैं चुनाव की निगरानी।:- @PradeepK_SP प्रदीप कुमार प्रदेश अध्यक्ष समाजवादी अधिवक्ता सभा उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश की अजय सिंह बिष्ट सरकार ने उत्तर प्रदेश मे तैनात लगभग सभी यादव एसडीएम को 1 तारीख को 31 तारीख मे SDM पद से हटा दिया है जबकि 1 नवंबर से आचार संहिता लग चुकी है,  यह सरकार यादव जाति विशेष से इतना नफरत करके इस सिस्टम को  खराब कर रही है क्योंकि जो भी यादव जाति के SDM

या अधिकारी हैं वह भी इस सिस्टम का हिस्सा है और एक ही परीक्षा और एक ही प्रक्रिया से चयनित होकर अधिकारी बने हैं इस तरह से  उन पर बेवजह शंका करके वर्तमान सरकार ने अपने घृणित चरित्र को उजागर किया है। चुनाव आयोग को और माननीय उच्च न्यायालय को इस घटना का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए

और सरकार से स्पष्टीकरण लेना चाहिए व तात्कालिक एवं त्वरित रूप से  कार्रवाई करनी चाहिए, साथ ही साथ इस बात की भी जांच करानी चाहिए कि उत्तर प्रदेश में किस एक जाति के अधिकारी सबसे ज्यादा सरकार में तैनात हैं और क्या एक जातिविशेष के अधिकारियों की तैनाती से सिस्टम नहीं खराब होता।

माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी समाजवादी पार्टी और माननीय नेता विरोधी दल समाजवादी पार्टी का ध्यान भी मैं इस ओर आकृष्ट कराना चाहता हूं कि वह उचित फोरम और सदन में इस बात को समय से उठाएं जिससे इस देश के आमजन तक सरकार की यह घटिया हरकत पहुंच सके और लोग सावधान हो सके।

जहां एक तरफ वर्तमान सरकार ने जातियों के बीच नफरत फैलाने और अविश्वास पैदा करने का काम किया है वही दूसरी तरफ यह भी साबित कर दिया है कि वह आने वाले 2022 के विधानसभा चुनावों में किसी भी घटिया स्तर तक जाकर चुनाव को प्रभावित करने का काम कर सकती है।

अतः इस प्रदेश के आमजन को इस घटना का संज्ञान लेकर सावधान हो जाना चाहिए।

नोट :- उपरोक्त खबर Pradip Kumar जी के ट्विटर प्लेटफार्म से ली गई है । जिसकी हकीकत/भ्रमक्ता की पुष्टि सच्ची खबर नहीं करता। हम निस्पक्

नोट :- उपरोक्त खबर Pradip Kumar जी के ट्विटर प्लेटफार्म से ली गई है । जिसकी हकीकत/भ्रमक्ता की पुष्टि सच्ची खबर नहीं करता। हम निस्पक्ष रूप से अपने ब्लॉग न्यूज के माध्यम से समसामयिक कुछ चुनिंदा घटना क्रम को पेश करते हैं ।

#जौनपुर जर्जर मकान गिरने से 5 लोगों की मौत हुई थी जिसमें 6 लोग घायल हुए थे, इस घटना को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान में लिया। आज 23 अक्टूबर को राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव के द्वारा मुआवजा धनराशि वितरित किया गया,

जौनपुर ब्रेकिंग नगर कोतवाली थाना अंतर्गत क्षेत्र बड़ी मस्जिद के रौजाअर्जन में जर्जर मकान गिरने से 5 लोगों की मौत हुई थी जिसमें 6 लोग घायल हुए थे, इस घटना को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रमुखता से संज्ञान में लेते हुए आज 23 अक्टूबर को राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव के द्वारा मुआवजा धनराशि वितरित किया गया, लगभग 20 लाख रुपये की धनराशि वितरित किया गया, उक्त घटना में दो मकान जमीदोश हुए थे जिसके लिए 95, 95 हजार की राशि वितरित हुई, वहीं राष्ट्रीय पारिवारिक योजना के तहत 30,000 पीड़ित परिजनों को दिया वहीं राज्य मंत्री गिरीश चंद यादव ने कहा पीड़ित परिजनों को सरकार द्वारा हर मदद दिलाने का आश्वासन दिया गया, वही इस दुखद घटना पर राज्यमंत्री ने शोक प्रकट किया,

जातिवार जनगणना की मांग को लेकर बक्सर से पटना 07 दिवसीय दूसरे चरण की पदयात्रा का मार्गराष्ट्रीय साझा असहयोग आंदोलन @mandalarmy_

जातिवार जनगणना की मांग को लेकर बक्सर से पटना 07 दिवसीय दूसरे चरण की पदयात्रा का मार्ग

राष्ट्रीय साझा असहयोग आंदोलन

*”जनगणना प्रश्ननावली में यदि जाति का कॉलम नहीं, तो जनगणना में हमारे घर से कोई सहयोग नहीं”*

27 सितंबर 2021 सोमवार को सुबह 11 बजे से पदयात्रा कमलदह पोखरा स्टेशन रोड़ बक्सर से प्रारंभ होगी
अंबेडकर चौक, ज्योति चौक,वीर कुंवर सिंह चौक, रामरेखा घाट रोड़, पीपी रोड़, भगत सिंह चौक, कर्पूरी ठाकुर लाॅ कॉलेज,सेंडीगेट, गोलंबर,चुरामनपुर, दलसागर ,नवा डेरा, पुराना भोजपुर चौक होते हुए डुमराँव नगर भ्रमण करते हुए छठिया पोखरा होते हुए अंबेडकर चौराहा शाम 5 बजे तक पहूंचेगी वही जनसभा करने के बाद रात्रि विश्राम नंदन गाँव में होगा!
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28 सितंबर 2021 को सुबह 10 बजे से ढकाईच चटी पर से पदयात्रा शुरू होगी
नया भोजपुर चौक,पुराना भोजपुर चौक, मंझवारी, पैला डीह, आशा पंडरी, सहियार, नियाजीपुर, राजापुर, गंगौली होते हुए शाम 5 बजे तक पदयात्रा चक्की पहूंच जाएगी जनसभा के बाद रात्रि विश्राम वही पर!
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29 सितंबर 2021 को सुबह 10 बजे से पदयात्रा चक्की से प्रारंभ होगी
गायघाट, निमेज, ब्रह्मपुर चौराहा होते हुए शाहपुर शाम 5 बजे तक पहूंचेगी जनसभा के बाद रात्रि विश्राम वही पर!
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30 सितंबर 2021 को पदयात्रा सुबह 10 बजे शाहपुर से चलेगी शाम 3 बजे तक आरा पहूंच जाएगी जहां नगर भ्रमण के बाद जगदेव नगर में सभा होगी रात्रि विश्राम वही पर!!
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01 अक्टूबर 2021 को सुबह 10 बजे से आरा से पदयात्रा शुरू होगी सकड्डी बाजार होते हुए कोईलवर होते हुए शाम 5 बजे तक बिहटा पहूंच जाएगी जहां जनसभा के बाद रात्रि विश्राम वही पर!
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02 अक्टूबर 2021 को पदयात्रा सुबह 10 बजे बिहटा से चलेगी और दानापुर कोथवा शाम 5 बजे तक पहूंच जाएगी जहां जनसभा होगी फिर रात्री विश्राम वही पर!!
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03 अक्टूबर 2021 को सुबह 10 बजे पदयात्रा दानापुर से जंक्शन होते हुए फुलवारीशरीफ होते हुए सचिवालय होते हुए आर ब्लाक होते हुए इनकम टैक्स गोलंबर तक जाएगी फिर वहां से रिटर्न होकर आर ब्लाक चौक होते हुए गर्दनीबाग 2 बजे तक पहूंच जाएगी जहां सभा करने के बाद कार्यक्रम समाप्त हो जाएगा!!

*पद यात्रा को सफल बनाने हेतु आर्थिक सहयोग के लिए https://mandalarmy.com/index.php/donation/ लिंक पर जाएं और डोनेट करें*

*पदयात्रा की अधिक जानकारी व शामिल होने के लिए संपर्क करें +918789546652 सोनू यादव*

*”जातियों की गणना तो जनगणना नहीं”*

प्रयागराज पुलिस में एक व्यक्तित्व जो संवार रहा पुलिस की छवि और क्षेत्रीय स्थिति,जनता का मिलता है भरपूर प्रेम और सम्मान,अब तक जहां रहे वहां किया सकरात्मक निर्माण और प्रगतिकार्य। जानिए कौन हैं SI जगदीश कुमार जिनके पास है मामा भांजा चौकी का प्रभार #Video




प्रयागराज पुलिस में एक व्यक्तित्व ऐसा भी जो गुपचुप तरीके से संवार रहा पुलिस की छवि और क्षेत्रीय स्थिति, किसी सम्मान और मोहमाया से परे,जनता का मिलता है भरपूर प्रेम और सम्मान,अब तक जहां जहां रहे वहां वहां किया सकरात्मक निर्माण और प्रगतिकार्य।



जी हां जैसा कि हमारे समाचार पत्र का नाम है सच्ची खबर वैसे ही हम हर समय सत्य की खोज में जुटे रहते हैं,विगत एक वर्ष से मैं प्रयगाराज पुलिस पर लगभग रिसर्च में पीएचडी कर चुका हूं।☺️ खैर ये तो एक मुहावरे जैसा है,परन्तु जब हम अपने इसी क्रम में आगे बढ़े तो एक प्रयागराज पुलिस के उपनिरीक्षक(सब इंस्पेक्टर SI) का नाम हमने कई क्षेत्रों में जनता के मुंह से बड़ी सकरात्मक और जय जयकार वाले अंदाज में सुना,मन मे उत्सुकता जगी की उक्त पुलिसकर्मी के सम्बंध में और कुछ पता किया जाए तो हमने जनता में गहन खोजबीन शुरू की।

उक्त क्रम में हमे पता चला कि इन SI साहब का नाम है श्री जगदीश कुमार है और ये जहां जहां पदस्थ रहे वहां भरपूर सकारात्मक कार्य कर्तव्य के साथ करते रहे।

आइये जानते हैं इनके किये गए कार्यों को और इन्हें मिलने वाले जनता के अपार प्रेम के सम्बंध में।
पहला वाकया


जगदीश कुमार जी को दायित्व मिला सरायममरेज थाने के जंघई चौकी इंचार्ज का,उस समय जंघई चौकी का सूरत-ए-हाल कुछ ऐसा था की फरियादी भी चौकी में जाने से कतराते थे,जर्जर स्थिति थी चौकी की,फिर जगदीश जी ने मोर्चा संभाला और पब्लिक पुलिस (PP) सहयोग से खड़ी की एक सुंदर और सकरात्मक ऊर्जा वाली चौकी जो आज भी जगदीश जी के किस्से बयान करती है।जगदीश जी ने जंघई चौकी प्रभारी रहते जनसंवाद और जनसहयोग का वो माहौल बनाया की जनता इनकी जय जयकार करने लगी,आलम ये था कि जनसेवक के रूप में ख्यातिमान इस पुलिस अधिकारी का जनता ने अभिनन्दन एक प्रजासेवक राजा के रूप में किया,बाकयदा घोड़े पर बैठाकर पुष्पवर्षा करके जनता ने इनका अभिनन्दन किया।आज भी जंघई चौकी को जानने वाले इसे जगदीश चौकी भी कहते हैं।

दूसरा वाकया


जब जगदीश जी चौकी प्रभारी नारीबारी बने तब वहां शौचालय और चौकी की आवाजाही और मुख्यद्वार की बड़ी समस्या थी,जगदीश जी तो ठहरे जगदीश जी जो कार्य किसी से सम्भव ना हुआ वो कार्य किया जगदीश जी ने और वही पुलिस और जनसहयोग से बना एक मुख्यद्वार और शौचालय और आवाजाही का सुगम मार्ग।जनता ने इन्हें यहां भी सर आंखों पर बैठाकर रखा था,बताते हैं की यहां से इनके तबादले के समय जनमानस के कई लोग गाड़ी के आगे खड़े होकर रोने लगे थे और गाड़ी आगे नही बढ़ने दे रहे थे।

तीसरा वाकया

तेज कर्मठ निडर सब इंस्पेक्टर : Jagdish Kumar : file photo


अगर आप दोनों वाकयों से ये समझ रहे हैं कि जगदीश केवल सकारात्मक निर्माण और जन सेवा ही करते थे तो आप अभी जगदीश जी को अधूरा ही जाना पाए ,जगदीश जी ने अपने शंकरगढ़ के कार्यकाल में सफल 29 विवेचनाएं पूर्ण की थीं,जिसके लिए उन्हें एसपी यमुनापार ने प्रशस्ति पत्र भी दिया था।जगदीश जी जितने सरल जनसेवक हैं उतने दृढ़ संकल्पित और कर्मठ पुलिस अधिकारी उन्होंने अपने क्षेत्र में अपराधियों की नींद उड़ा रखी थी।

चौथा वाकया


उत्तर प्रदेश पुलिस के विभिन्न जनपदों में रंगदारी और लूट का पर्याय बन चुके कुख्यात लूटेरे और माफिया दीपक तिवारी जिसके ऊपर विभिन्न जनपदों में लगभग आधा दर्जन से ज्यादा मुकदमे हैं,

जिसे पकड़ने से पहले कोई भी 10 बार सोचता था,उसको जगदीश जी ने कुछ दिन पूर्व ही उसके ठिकाने से गिरेबान से पकड़कर जेलदर्शन करा दिए।

इस समय श्री जगदीश कुमार नैनी थाने के अंतर्गत मामा भांजा चौकी के चौकी प्रभारी हैं और उनका जन समस्या निराकरण और अपराधी पकड़ अभियान यहां खूब चर्चित है।

जगदीश जी के सुविख्यात कार्यों पर अगर लिखने बैठेंगे तो किताब छप सकती है,इतने में ही समझिए कि इस व्यक्ति को हमने शुरू में व्यक्तित्व क्यों कहा।प्रयगाराज जनपद में इनका सही उपयोग होना अभी बाकी है,ऐसे व्यक्तित्व को स्वतंत्र जिम्मेदारी बहुत आवश्यक है।



संलग्न:-कुछ वीडियो और फोटोज जो दर्शाते हैं प्रयगाराज पुलिस के पास जगदीश कुमार जी जैसे 24 कैरेट गोल्ड भी हैं,जिनका सही जगह पर सही उपयोग अभी बाकी है । खबर और फोटो सत्य अन्वेषी खबर से साभार

Reminder📢 आवश्यक सूचना 📢बिषय : जातिवार जनगणना की मांग को लेकर बिहार पद यात्रा की तिथि चयन हेतुमीटिंग – दिनाँक – 16/09/2021, दिन – गुरुवार, समय – आज शाम 06 बजे

Reminder

📢 आवश्यक सूचना 📢

बिषय : जातिवार जनगणना की मांग को लेकर बिहार पद यात्रा की तिथि चयन हेतु

मीटिंग – दिनाँक – 16/09/2021, दिन – गुरुवार, समय – आज शाम 06 बजे

प्रिय साथियों!

क्रांतिकारी जय मंडल जय भीम जय फूले जय पेरियार


जैसा कि आपको ज्ञात होगा कि *जातिवार जनगणना* की मांग को लेकर 11 सितम्बर से शुरू होकर 21 सितम्बर तक चलने वाली राष्ट्रीय साझा असहयोग आंदोलन के बैनर तले की पद यात्रा को नेतृत्वकर्ता अनिरुद्ध सिंह विद्रोही की बीमारी के चलते स्थिगित कर दिया गया था. पुनः उनके स्वास्थ्य में होते सुधार को देख कर मोर्चे ने पद यात्रा के लिए नई तिथि के चयन के निर्णय हेतु ऑनलाईन गूगल मीट पर मीटिंग के आयोजन का निर्णय लिया है जो कि 16 सितम्बर 2021, दिन गुरुवार, शाम 06 : 00 बजे रखी गई है.

*अतः आप जातिवार जनगणना पद यात्रा के सभी समर्थक, सहयोगी साथियों से सादर निवेदन है कि 16 सितम्बर 2021, गुरुवार, शाम 06 बजे ऑनलाइन गूगल मीट में उपस्थित हो अपनी कीमती राय दें ताकि शीघ्र ही बिहार में पद यात्रा को शुरू किया जा सके.*

*गूगल मीट लिंक ——-*



*निवेदक—-*

*राष्ट्रीय साझा असहयोग आंदोलन*

#झूंसी पीड़िता को आत्महत्या के लिए मजबूर कर रहे सोशल मीडिया अपराधी रंगदारी के आरोपियों का आतंक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल रिपोर्ट:+ नागेश पांडेय @prayagraj_pol

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

Adg प्रयागराज महोदय ने संज्ञान लेने के लिए प्रयाग राज पुलिस महोदय से आग्रह /निर्देशित किया

ज्ञात हो कि थाना झूसी प्रयागराज में रीता बिंद नाम की महिला मुकदमा अपराध संख्या 249 सन 2021 धारा 386 अंतर्गत कुछ लोगों पर केस दर्ज कराया है जिसमें जिसको लेकर सोशल मीडिया अपराधी दीपक तिवारी तथा उसके गैंग लगातार फोन करके आरोपियों का नाम निकालने के लिए दबाव बना रहे थे जब वादिनी ने आज igrs डालने से इंकार कर दिया तो उक्त लोगों द्वारा वादिनी को सोशल मीडिया पर बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है जिसमें शासन प्रशासन पर भी दोषारोपण कर रहे हैं ऐसी स्थिति में पीड़िता द्वारा वीडियो जारी कर अपनी परेशानी कहते हुए बताया गया कि उसे उक्त लोगों द्वारा आत्महत्या के लिए उकसाया जा रहा है

सोशल मीडिया डॉन दीपक तिवारी फोटो ग्राफर: अवधेश “लाला” दुबे

आखिर कौन है ये रंगबाज शातिर दीपक तिवारी
आधे दर्जन से ज्यादा संगीन अपराधो का वांछित है दीपक तिवारी

दीपक तिवारी शातिर साइबर सोशल मीडिया विलेन की पूर्व में गिरफ्तारी पर जारी प्रेस नोट

पुलिस पर हमले रंगदारी और जान से मारने की धमकी समेत आधा दर्जन से ज्यादा संगीन अपराधो का वांछित है दीपक तिवारी

दीपक तिवारी की क्राइम हिस्ट्री

पुलिस बल पर हमले का वांछित है दीपक तिवारी

पुलिस बल पर हमले से संबंधित खबर

सोशल मीडिया पर जंगल में आग की तेजी से खबर हो रही है वायरल

वायरल खबर पर संबंधित सक्षम अधिकारी बनाए हुए पैनी नजर

प्रयागराज पुलिस की तरफ से जारी बयान

जातिवार जनगणना कोई राजनैतिक मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्र-निर्माण की जरूरी पहल हैसामाजिक न्याय व बंधुता का प्रश्न मनुष्यता का प्रश्न है और जातिवार जनगणना के हासिल को उसी की एक कड़ी के रूप में देखा जाना चाहिए. (लेखक नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शोधार्थी हैं और बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्य कार्यकारिणी के सदस्य हैं.)

जातिवार जनगणना कोई राजनैतिक मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्र-निर्माण की जरूरी पहल है
सामाजिक न्याय व बंधुता का प्रश्न मनुष्यता का प्रश्न है और जातिवार जनगणना के हासिल को उसी की एक कड़ी के रूप में देखा जाना चाहिए.

हज़ारों वर्षों की जड़ता से भरे भारतीय समाज में ‘समता, स्वतंत्रता व बंधुता’ की स्थापना के लिए समय-समय पर कोशिशें हुई हैं. औपनिवेशिक काल में अंग्रेज़ों ने हमारे देश के गैर-बराबरी से भरे समाज में अलग-अलग समूह की गणना कर उनके जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करने का निर्णय लिया और इस कड़ी में भारत में जातिवार जनगणना की शुरुआत 1881 में हुई.

अंतिम बार जाति आधारित जनगणना 1931 में हुई थी. उसी आधार पर अब तक यह अंदाजा लगाया जाता रहा है कि देश में किस सामाजिक समूह के लोग कितनी तादाद में हैं.

मंडल कमीशन में भी 1931 की जनगणना के आधार पर ओबीसी की आबादी 52% बताई गयी. आज़ादी के समय मुल्क बंटा और आबादी का एक हिस्सा पड़ोस में चला गया. हमारे पास ताज़ा आंकड़े नहीं हैं जिनके आधार पर सबके लिए समुचित नीतियां बन सकें.

जातिवार जनगणना क्यों जरूरी है
1951 से 2011 तक की हर जनगणना में संवैधानिक बाध्यता के चलते अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की गिनती तो हुई है, पर किसी दूसरी जाति की नहीं. आखिर क्या वजह है कि भारत सरकार ने अपने देश की सामाजिक सच्चाई को जानने से हमेशा मुंह चुराया?

दुनिया का शायद ही कोई लोकतांत्रिक देश होगा जो अपनो लोगों के जीवन से जुड़ी हकीकत को जानने से नाक-भौं सिकोड़े. जो समाज सर्वसमावेशी नहीं होगा, उस पाखंड से भरे खंड-खंड समाज के जरिये अखंड भारत की दावेदारी हमेशा खोखली व राष्ट्र-निर्माण की संकल्पना अधूरी होगी जातिवार जनगणना की मांग इसलिए महत्वपूर्ण है कि अलग-अलग क्षेत्रों में ओवर-रीप्रेज़ेंटेड व अंडर-रीप्रेज़ेंटेड लोगों का एक हकीकी डेटा सामने आ सके जिनके आधार पर कल्याणकारी योजनाओं व संविधानसम्मत सकारात्मक सक्रियता की दिशा में तेज़ी से बढ़ा जा सके प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष काका कालेलकर ने 1955 की अपनी रिपोर्ट में 1961 की जनगणना जातिगत आधार पर कराने की अनुशंसा की थी. द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष बीपी मंडल अपनी रिपोर्ट में 3743 जातियों को एक जमात के रूप में सामने लाए. सामाजिक-शैक्षणिक गैर-बराबरी से निपटने का एक मुकम्मल दर्शन सामने रखते हुए मोटामोटी 40 सिफारिशों में भूमि-सुधार की भी बात थी.

जातिवार जनगणना की मांग अटल बिहारी ने की थी खारिज
दो-दो बार देश की सबसे बड़ी पंचायत में जातिवार जनगणना को लेकर आम सहमति बनी. एक बार जनता दल नीत युनाइटेड फ्रंट सरकार (1996-98) में 2001 के लिए और दूसरी बार यूपीए-2 में 2011 के लिए.

पहली बार सरकार चली गई और अटल बिहारी जब प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया. वहीं दूसरी बार मनमोहन सिंह के आश्वासन के बावजूद कुछ दक्षिणपंथी सोच के नेताओं ने बड़ी चालाकी से उस संभावना को पलीता लगा दिया.

जो जनगणना सेंसस कमीशन ऑफ इंडिया द्वारा 1948 के जनगणना कानून के मुताबिक होनी थी, उसे चार टुकड़ों में बांट कर सामाजिक-आर्थिक सर्वे की शक्ल में कराया गया.

ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण विकास मंत्रालय और शहरी क्षेत्रों में आवास व शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय की ओर से सामाजिक-आर्थिक जनगणना का संचालन किया गया. इसलिए, 4,893 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी जो आंकड़े जुटाये गये, वो सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के हैं, न कि जातिवार जनगणना के और उन आंकड़ों को भी कायदे से जारी नहीं किया गयाजातिवार जनगणना क्यों नहीं करवा सकी कोई सरकार
वो कौन-सा डर है जिसके चलते आज़ादी के बाद आज तक कोई भी सरकार जातिवार जनगणना नहीं करवा सकी?दरअसल, जैसे ही सारी जातियों के सही आंकड़े सामने आ जाएंगे, वैसे ही शोषकों द्वारा गढ़ा गया यह नैरेटिव ध्वस्त हो जाएगा कि ईबीसी ओबीसी की हकमारी कर रहा है या ओबीसी दलित-आदिवासी की शोषक है. वे मुश्किल से जमात बने हज़ारों जातियों को फिर आपस में लड़ा नहीं पाएंगे और हर क्षेत्र में उन्हें आरक्षण व समुचित भागीदारी बढ़ानी पड़ेगी.यह हास्यास्पद ही है कि बिना पुख़्ता आंकड़ों के, फकत धारणा व गत 5 वर्षों के डेटा के आधार पर रोहिणी कमीशन के जरिए पिछड़ों को उप श्रेणियों में खंडित करने की कवायद चल रही
हैजातिवार जनगणना कोई राजनैतिक मामला नहीं वर्तमान मोदी सरकार ने 2018 में एक शिगूफा छोड़ा कि हम ओबीसी की गिनती कराएंगे. तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बयान संसद में नहीं दिया था बल्कि 2019 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए यूं ही जुमले की तरह उछाल दिया.
उस समय भी हमारा मत था कि सिर्फ ओबीसी की ही क्यों, भारत की हर जाति के लोगों को गिना जाए. जब गाय-घोड़ा-गधा-कुत्ता-बिल्ली-भेड़-बकरी-मछली-पशु-पक्षी, सबकी गिनती होती है, तो इंसानों की क्यों नहीं? आखिर पता तो चले कि भीख मांगने वाले, रिक्शा खींचने वाले, ठेला लगाने वाले, फुटपाथ पर सोने वाले लोग किस समाज से आते हैं. उनके उत्थान के लिए सोचना वेलफेयर स्टेट की ज़िम्मेदारी है और इस भूमिका से वह मुंह नहीं चुरा सकता.
इसलिए, जातिवार जनगणना कोई राजनैतिक मामला नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है. जो भी इसे अटकाना चाहते हैं, वे दरअसल इस देश के साथ न्याय नहीं कर रहे हैं.
इस प्रवृत्ति को रेखांकित करती अमरीकी कवयित्री विलकॉक्स ‘इन इंडिया’ज़ ड्रीमी लैंड ‘ (भारत की स्वप्निल ज़मीं पर) में कहती हैं:

In India’s land one listens aghast
To the people who scream and bawl;
For each caste yells at a lower caste,
And the Britisher yells at them all.

अर्थात

भारतवर्ष में लोग बात सुनते
उन्हीं की जो चीखते व चिल्लाते;
क्योंकि हर जाति दुर्बलतर जाति पर धौंस जमाती,
और, ब्रिटिशजन उन सब को हिकारत भरी नज़र से देखते.

तेजस्वी यादव की पहल
बिहार और महाराष्ट्र सरकार ने जातिवार जनगणना के लिए प्रस्ताव पारित करके केंद्र को भेजा. तमिलनाडु ने हमेशा सकारात्मक रुख दिखाया. द्रविड़ियन आंदोलन की उपज पार्टियों ने बहुत हद तक बीमारी के डायग्नोसिस में रूचि दिखाई. उड़ीसा और यूपी समेत देश के अनेक सूबे में जातिवार जनगणना की जबर्दस्त मांग हुई. कर्नाटक में तो केंद्र के अड़ियल रुख को देखते हुए वहां की राज्य सरकार ने खुद से जातिवार गणना का निश्चय करके दिखा दिया.
राजद की पहल पर दो-दो बार बिहार विधानमंडल में जातिवार जनगणना को लेकर संकल्प पारित हो चुका है. लालू प्रसाद, शरद यादव और मुलायम सिंह लंबे समय से इस मुद्दे पर सदन से सड़क तक जमकर संघर्ष करते रहे हैं. उत्तर भारत में अपनी दखल रखने वाले इन तीन बड़े नेताओं की स्वास्थ्य-लाभ की जानकारी हेतु एक-दूसरे से हालिया मुलाकात ने जातिवार जनगणना के विमर्श को एक बार फिर से ज़िंदा कर दिया है.
हाल ही में जब भारत के गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने संसद में बयान दिया कि सरकार जातिवार जनगणना नहीं कराएगी, तो तेजस्वी यादव के प्रस्ताव पर नीतीश कुमार ने सर्वदलीय शिष्टमंडल के साथ प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की तेजस्वी ने जातिवार जनगणना से समाज के अंदर विभाजन-रेखा के उभरने की चिंता में दुबले हो रहे पुनरुत्थानवादी ताकतों को तार्किक जवाब देते हुए कहा कि जब सेंसस में धर्म का कॉलम रहने से लोग धर्मांध नहीं हो जाते, तो कास्ट का कॉलम जोड़ने से जातीय विद्वेष कैसे फैलने लगेगा?प्रधानमंत्री मोदी के जवाब का इंतज़ार कर रहे तेजस्वी ने उन्हें रिमाइंडर भेजने की बात कही है
‘बौद्धिक’ बिरादरी की मसिक्रीड़ा
अभय दूबे, बद्री नारायण, वेदप्रताप वैदिक, संजय कुमार, संकेत उपाध्याय, रमेश मिश्रा समेत अनेकानेक ‘यथास्थितिवादी बुद्धिजीवियों’ व खबरनवीसों द्वारा जातिवार जनगणना को लेकर तमाम कुतर्क पेश किये जा रहे हैं.
बद्री नारायण दैनिक जागरण में लिखते हैं, ‘सियासी शस्त्र न बने जातीय जनगणना’, दैनिक भास्कर में अभय दूबे लोगों के मन में डर पैदा करने की मंशा से लिखते हैं, ‘जातिगत जनगणना के गहन व बुनियादी प्रभाव होंगे जो इस समय न तो इसके समर्थकों की समझ में आ रहे हैं न विरोधियों के’, नवभारत टाइम्स में वेदप्रताप वैदिक मसिक्रीड़ा करते हैं, ‘कोटा बढ़वाना हो तो क्यों न याद आए जाति’, फिर वे दैनिक भास्कर में निर्गुण भजते हैं, ‘जनगणना में जाति नहीं, जरूरत पूछी जाए तभी पिछड़ों का हित होगा’संकेत उपाध्याय दैनिक भास्कर में मानसमंथन करते नज़र आते हैं, ‘राजनीति का एटमी बम क्यों है आरक्षण: देश में आरक्षण प्रक्रिया की समीक्षा क्यों नहीं की जाती’, वहीं दैनिक जागरण में रमेश मिश्रा चिंतित होकर कलम चलाते हैं, ‘मुख्य जनगणना के साथ-साथ जाति की जनगणना मुश्किल, जानिए क्या-क्या हो सकती हैं दिक्कतें’.बावजूद इन तिकड़म व विषवमन से भरे लेखन के, नेशनल बिल्डिंग में लगी पीढ़ी जद्दोजहद कर रही है. लोग भारतीय समाज के मनोविज्ञान को भूल जाते हैं और उसका निर्गुण बखान कर सच्चाई पर परदा डालने की कोशिश करते हैं.
मंडल कमीशन की रिपोर्ट में बीपी मंडल ने रजनी कोठारी को उद्धृत करते हुए लिखा था, ‘भारत में जो लोग राजनीति में जातिवाद की शिकायत करते हैं, वे ऐसी राजनीति तलाशते हैं, जिसका समाज में कोई आधार नहीं है’. मनीष रंजन ठीक कहते हैं कि कोठारी के ‘जातियों के राजनीतिकरण‘ का सिद्धांत के तहत ही जाति-व्यवस्था को व्यावहारिक चुनौती दी जा सकती है जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी सरकार से जनगणना में पिछड़े वर्ग समूह के आंकड़े जुटाने का निवेदन किया था. डेमोक्रेसी को कभी भी फॉर ग्रांटिड नहीं लिया जा सकता. आर.जी इगरसोल कहते हैं, ‘Eternal vigilance is the price of liberty.’ गेल ओम्वेट ने अलग-अलग मसलों पर उद्वेलित लोगों के अप्रोच पर एक बार टिप्पणी की थी, ‘मंडल के बाद इस देश में कोई बड़ा आंदोलन नहीं हुआ जिसने यहां के जनमानस को झकझोरा हो’.हज़ारों सालों से जिनके पेट पर ही नहीं, बल्कि दिमाग पर भी लात मारी गई है, उनकी प्रतिष्ठापूर्ण ज़िंदगी सुनिश्चित करना इस समाज व देश के सर्वांगीण विकास के लिए वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है.अंततोगत्वा, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की भावना से ही भारत का भला होगा, ‘हम भारत के लोग’ के जीवन में खुशहाली आएगी. आखिरकार, सामाजिक न्याय व बंधुता का प्रश्न मनुष्यता का प्रश्न है और जातिवार जनगणना के हासिल को उसी की एक कड़ी के रूप में देखा जाना चाहिए.

(लेखक नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शोधार्थी हैं और बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्य कार्यकारिणी के सदस्य हैं. व्यक्त विचार निजी हैं)

कृष्णा यादव “पुजारी” की पुलिस हिरासत में मौत मामले में अदालत ने कोतवाल समेत नौ पुलिसकर्मियों का वारंट जारी किया। सभी पुलिसकर्मी चल रहे हैं फरार।

थानाध्यक्ष समेत नौ पुलिस कर्मियों के खिलाफ वारंट जारी

जौनपुर। सीजेएम कोर्ट ने आज बक्शा थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत नौ पुलिस कर्मियों के खिलाफ वारंट जारी किया है। सभी पुलिस घटना के बाद निलंबित होने के बाद फरार चल रहे है। सीजेएम ने आदेश बीते 11 फरवरी को बक्शा पुलिस की कस्टडी हुई पुजारी यादव के मौत के मामले में दी है। इस केश की विवेचना कर रहे सीओ बदलापुर ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया कि कई स्थानों पर दबिश देने के बाद आरोपी पुलिस कर्मियों का पता नही चल रहा है। जिसके कारण विवेचना प्रभावित हो रही है। 

 आरोपित बनाए गए तत्कालीन थानाध्यक्ष अजय कुमार सिंह, एसओजी प्रभारी पर्व कुमार सिंह, कांस्टेबल कमल बिहारी बिंद, जितेंद्र सिंह, राजकुमार वर्मा, श्वेत प्रकाश सिंह, राजन सिंह, जयशील प्रसाद तिवारी, अंगद प्रसाद चौधरी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाए। इस पर कोर्ट ने सभी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। 

 बक्सा थाना क्षेत्र के चक मिर्जापुर निवासी अजय कुमार यादव ने सभी के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराया कि 11 फरवरी 2021 को दिन में बजे एसओजी टीम व थानाध्यक्ष अजय कुमार सिंह फोर्स के साथ मेरे घर पर आए और मेरे भाई कृष्ण कुमार यादव उर्फ पुजारी को पकड़कर थाने ले गए। मेरे भाई के विरुद्ध कोई आपराधिक मुकदमा किसी थाने में दर्ज नहीं था। पुलिस कर्मी भाई को फर्जी मुकदमे में फंसाने की नीयत से थाने पर बैठाए थे। रात आठ बजे थानाध्यक्ष अजय कुमार सिंह व करीब दस की संख्या में पुलिसकर्मी वादी के घर में घुसकर बक्से का ताला तोड़कर 60000 रुपये व सामान उठा ले गए। मना करने पर महिलाओं को गालियां दी।