गाय को घोषित किया जाए राष्ट्रीय पशु, किसी को नहीं इसे मारने का अधिकार: हाई कोर्ट

गाय को घोषित किया जाए राष्ट्रीय पशु, किसी को नहीं इसे मारने का अधिकार: हाई कोर्ट

गौ माता राष्ट्र माता



इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैदिक, पौराणिक, सांस्कृतिक महत्व व सामाजिक उपयोगिता को देखते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव दिया है। कोर्ट ने कहा कि भारत में गाय को माता मानते हैं। यह हिंदुओं की आस्था का का विषय है। आस्था पर चोट से देश कमजोर होता है। कोर्ट ने कहा गो मांस खाना किसी का मौलिक अधिकार नहीं है। जीभ के स्वाद के लिए जीवन का अधिकार नहीं छीना जा सकता। बूढ़ी बीमार गाय भी कृषि के लिए उपयोगी है। इसकी हत्या की इजाजत देना ठीक नहीं। यह भारतीय कृषि की रीढ़ है।कोर्ट ने कहा पूरे विश्व में भारत ही एक मात्र देश है जहां सभी संप्रदायों के लोग रहते हैं। पूजा पद्धति भले ही अलग हो, सोच सभी की एक है। एक दूसरे के धर्म का आदर करते हैं। कोर्ट ने कहा गाय को मारने वाले को छोड़ा तो फिर अपराध करेगा। कोर्ट ने संभल के जावेद की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने दिया है।

जय श्री कृष्ण : पर कौन से कृष्ण ?मैं भी उन लोगों और खास तौर से उन यादवों में शामिल हूँ जो श्री कृष्ण को अपने आराध्य मानते हैं, पूर्वज समझते हैं। पर मैं उनलोगों में शामिल नहीं हूँ जो श्री कृष्ण की व्याख्या और वर्णन गीता के उस नायक से करते हैं : प्रोफेसर सूरज यादव मंडल ।पुरा लेख पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें…….

जय श्री कृष्ण : पर कौन से कृष्ण ?
मैं भी उन लोगों और खास तौर से उन यादवों में शामिल हूँ जो श्री कृष्ण को अपने आराध्य मानते हैं, पूर्वज समझते हैं।
पर मैं उनलोगों में शामिल नहीं हूँ जो श्री कृष्ण की व्याख्या और वर्णन गीता के उस नायक से करते हैं जो अपने कई श्लोकों में “ब्राह्मणवाद” के पोषक नज़र आते हैं। हमारे श्री कृष्ण वो हैं जो “ब्राह्मणवाद” के सबसे श्रेष्ठ देवता इंद्र के पूजा के विरोधी हैं और उन्हें सबक सिखाने के लिए इंद्र हर संभव कोशिश करते हैं। परन्तु श्री कृष्ण मथुरावासियों की न सिर्फ रक्षा करते हैं अपितु इंद्र को पराजित होने पर विवश करते हैं।
तब तो काल्पनिक “सुदामा” के चरित्र को जोर शोर से उभारना ज़रूरी हो गया था।
मैं इस पोस्ट में विस्तृत चर्चा नहीं करूँगा क्योंकि यह शोध उपरांत एक लेख का विषय होगा।
ब्राह्मणवाद की एक बड़ी खासियत है, “धर्म” के नाम पर बनाये गए उनके नियम और आडम्बर से वे सामाजिक और राजनैतिक तौर पर अपने वर्चस्व को बनाये रखते हैं। अगर उन्हें कोई गंभीर चुनौती मिलती है तो उस ताक़त या संगठन को अपने सांस्कृतिक ताने बाने में समेट कर उसे इसी “ब्राह्मणवाद” में समाहित कर लेते हैं।
इसी क्रम में : जिनसे जीत नहीं सकते उन्हें मिला लो।
ऋग्वेद से लेकर तमाम शास्त्रों में अहीर व अहीर नायक कृष्ण अनार्य कहे गए हैं लेकिन इसके बावजूद जब इस देश के मूल निवासियों में कृष्ण का प्रभाव कायम रहा तो इन आर्यों ने कृष्ण के साथ नृशंसता बरतने के बावजूद उन्हें भगवान बना दिया और कृष्णवंशीय बहादुर जाति को अपने सनातन पंथ का हिस्सा बनाने में कामयाबी हासिल कर ली। जब कृष्ण अनार्य थे तो गीतोपदेश का सवाल उठना लाजिमी है गीतोपदेश में कृष्ण ने खुद भगवान होने, ब्राह्मण श्रेष्ठता, वर्ण व्यवस्था बनाने जैसे अनेक गले न उतरने वाली बातें कही हैं। ऋग्वेद स्वयं ही गीता में उल्लेखित बातों का खंडन करता है। जब कृष्ण खुद वेद के अनुसार असुर और इंद्रद्रोही थे तो वे वर्ण व्यवस्था को बनाने की बात कैसे कर सकते हैं। गीता में ब्राह्मणवाद को मजबूत बनाने वाली जो भी बातें कृष्ण के मुंह से कहलवाई गई हैं वे सत्य से परे हैं। काले, अवर्ण असुर कृष्ण कभी भी वर्ण-व्यवस्था के समर्थक नहीं हो सकते। भारत के मूल निवासियों में अमिट छाप रखने वाले कृष्ण का आभामंडल इतना विस्तृत था कि आर्यों को मजबूरी में कृष्ण को अपने भगवानों में सम्मलित करना पड़ा। यह कार्य ठीक उसी तरह से किया गया जिस तरह से ब्राह्मणवाद के खात्मा हेतु प्रयत्नशील रहे गौतम बुद्ध को ब्राह्मणों ने गरुड़ पुराण में कृष्ण का अवतार घोषित कर खुद में समाहित करने की चेष्टा की।
जिस तरह से असुर कृष्ण की भारतीय संस्कृति आर्यों ने उदरस्थ कर ली उसी तरह बुद्ध की वैज्ञानिक बातों ने हिन्दू धर्म के अवैज्ञानिक कर्मकांडों के समक्ष दम तोड़ दिया। डॉ. आंबेडकर के बौद्ध धर्म ग्रहण करने के बाद अब भारत में कुछ बौद्ध नजर आ रहे हैं, वरना इन आर्यों ने बुद्ध को कृष्ण का अवतार और कृष्ण को विष्णु का अवतार घोषित कर कृष्ण एवं बुद्ध को निगल लिया था। कितनी विडंबना है कि विष्णु का अवतार जिस कृष्ण को बताया गया है, वह कृष्ण लगातार वेद से लेकर महाभारत ग्रंथ में इंद्र से लड़ रहा है।
ब्रिटेन में लैंकैस्टर विश्वविद्यालय के धार्मिक अध्ययन विभाग में मानद शोधकर्ता रहीं फ्रीडा मैशे ने एक किताब लिखी है – ‘कृष्ण, ईश्वर या अवतार? कृष्ण और विष्णु के बीच संबंध’. इसमें वे लिखती हैं कि कृष्ण-वासुदेव, पहले यादव समुदाय की सत्वत्त और वृष्णि जनजातियों के नायक हुआ करते थे. इन्हें समय के साथ-साथ देवता मान लिया गया। फिर दोनों एक हो गए।
कृष्ण का सबसे पहला जिक्र छठी शताब्दी ईसापूर्व में ‘छंदोग्य उपनिषद’ में मिलता है। चौथी शताब्दी ईसापूर्व में पाणिनि की ‘अष्टाध्यायी’ (संस्कृत व्याकरण का ग्रंथ) में कृष्ण को एक देव की तरह प्रस्तुत किया गया है। साथ ही इसमें वृष्णिवंशी यादव जनजाति के बारे में भी विस्तार से बताया गया है, जिससे कृष्ण जुड़े हुए थे। मौर्य राजदरबार में यूनान (ग्रीस) के दूत रहे मेगस्थनीज की किताब ‘इंडिका’ में बताया गया है कि किस तरह शूरसेनियों (वृष्णिवंशी यादवों की ही एक शाखा) ने मथुरा में कृष्ण को देवता की तरह पूजना शुरू किया। इस तरह चौथी शताब्दी ईसापूर्व में कृष्ण-वासुदेव न सिर्फ नायक से देवता के रूप में परिवर्तित हुए, बल्कि काफी लोकप्रिय भी हो चुके थे।
दूसरी शताब्दी ईसापूर्व तक वैदिक पूजा पद्धति कठोर हो चुकी थी और उसके धार्मिक संस्कार महंगे. इसी दौरान सम्राट अशोक के समर्थन और प्रचार कार्य की वजह से बौद्ध दर्शन अपना आधार बढ़ाता जा रहा था। इसी बीच, बड़े पैमाने पर विदेशी आक्रमणकारियों (जैसे शक आदि) का भारत में आगमन शुरू हो गया. वे बौद्ध दर्शन आदि से ज्यादा सहानुभूति रखते थे। ऐसे में, पुरोहित वर्ग के अधिकार और असर में कमी आने लगी. निचले वर्णों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हुई और उन्होंने वर्ण व्यवस्था को चुनौती देना शुरू कर दिया। और जैसा कि सुवीरा जायसवाल अपनी किताब ‘वैष्णववाद की उत्पत्ति और विकास’ में लिखती हैं – ‘ब्राह्मणों ने कृष्ण-वासुदेव के भक्ति-पंथ पर कब्जा कर लिया. वे कृष्ण को नारायण-विष्णु का स्वरूप बताने लगे। इसके पीछे उनका मकसद संभवत: सामाजिक आचार-व्यवहार में अपना अधिकार और प्रभुत्व एक बार फिर से स्थापित करना था.’ यहां जिक्र करना दिलचस्प होगा कि नारायण और विष्णु भी पहले अलग देवों की तरह पूजे जाते थे. बाद में दोनों को एक ही मान लिया गया।
दरअसल, ब्राह्मणवादी व्यवस्था और कृष्ण की व्यवस्था दो विपरीत धाराएं थीं। कृष्ण ने ब्राह्मणवादी व्यवस्था से जुड़ी हर बड़ी से छोटी चीज को बदल दिया था।
कृष्ण ने ब्राह्मणवादी व्यवस्था के ज्ञान मार्ग के विपरीत कर्म मार्ग की स्थापना की थी।
ब्राह्मणवादी व्यवस्था में भाग्यवाद था। इसके विरोध में कृष्ण ने पुरुषार्थ की स्थापना की थी।
कृष्ण ने ब्राह्मणवादी व्यवस्था से जुड़े स्वर्ग और नरक के विरोध में मोक्ष की स्थापना की थी।
ब्राह्मणवादी व्यवस्था में एकल जन्म की प्रतिष्ठा थी। कृष्ण ने इसके विरोध में पुनर्जन्म की स्थापना की थी।
ब्राह्मणवादी व्यवस्था में नदी घाटी सभ्यता की प्रतिष्ठा थी। हड़प्पा सभ्यता नदी घाटी सभ्यता थी। कृष्ण ने इसके विरोध में पहाड़ सभ्यता की स्थापना की यानी लोगों की बसावट पहाड़ के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गयी। गोवर्धन पर्वत को उठाना इसी के बारे में बताता है।
कृष्ण की व्यवस्था में लाश पवित्र थी। इसी कारण परिजन स्वयं ढोकर ले जाते थे और लाश जलाते थे। महात्मा बुद्ध के अस्थि भस्मों पर चैत्य बनाये गये। ब्राह्मणवादी व्यवस्था में लाश अपवित्र थी। चांडाल ले जाता था और दफनाता था।
कृष्ण ने सुदर्शन का इस्तेमाल किया। सुदर्शन यानी सुंदर दर्शन। कृष्ण की सांख्यकारिका सुदर्शन का प्रतिनिधित्व करती है। अशोक चक्र वास्तव में
कृष्ण चक्र है। इसकी 24 लकीरें सांख्यकारिका के 24 तत्वों का प्रतिनिधित्व करती है। यह ब्राह्मणवादी दर्शन के विरोध में था।
ब्राह्मणवादी व्यवस्था का सबसे बड़ा आधार आत्मावाद था। कृष्ण ने इसका समापन कर दिया था। इसे ही बौद्ध व जैन धर्म ने अपनाया।
कृष्ण ने ब्राह्मणवादी व्यवस्था में प्रतिष्ठित मंदिर व मूर्तिपूजा को समाप्त कर दिया था। यही हीनयानी बौद्ध धर्म का आधार था। कृष्ण ने प्रतीक पूजा की स्थापना की। भगवान शिव के प्रतीक लिंग की पूजा आज भी जारी है।
पूजा का तरीका था-परिक्रमा करना। प्रतीक की परिक्रमा की जाती थी। भगवान गणेश ने भी शिव और पार्वती की परिक्रमा की थी। बौद्ध धर्म में स्तूप की परिक्रमा ही मुख्य रुप था।
कृष्ण की व्यवस्था के आधार पर बौद्ध व जैन धर्म पनपा।
महाभारत में पांच गणों का उल्लेख है-अंधक, वृष्णि, यादव, कुकुर व भोज। इन्होंने एक संघ के अंतर्गत स्वयं को संगठित किया। कृष्ण इसके प्रधान थे।
कृष्ण ने प्रतिष्ठित किया कि गणतंत्र का शासन विनय से चलता है। ब्राह्मणवादी व्यवस्था में राजतंत्र था और दंड से चलाया जाता था। इसी कारण गणेश को विनायक कहा जाता है। यह एक उपाधि की तरह है। महात्मा बुद्ध ने भी विनय व धर्म को शास्ता (शासक) कहा। कृष्ण द्वारा प्रतिपादित पुरुषार्थ का पहला उद्देश्य धर्म था।
दक्षिण भारत में स्थानीय स्वशासन का महत्व लंबे समय तक बना रहा क्योंकि यह परंपरा का हिस्सा था और कृष्ण द्वारा स्थापित गणतांत्रिक व्यवस्था का अवशेष। इसी कारण राजाओं ने भी सम्मान दिया।
बाद में गणतंत्र के स्थान पर राजतंत्र का उदय होने लगा। जनपद महाजनपद बनने लगे। कृषि व्यवस्था का तेजी से प्रसार होने लगा। युद्ध में दास बनाये लोगों को कृषि दासता में धकेला जाने लगा। ऋणी लोगों को भी कृषि दासता में धकेला गया।
खैर, अभी अपनी बात को यहीं विराम देता हूँ।
यह ध्यान रहे कि परशुराम की मूर्ति स्थापित करने वाले श्री कृष्ण के उपासक नहीं हो सकते।

लेखक मंडल कमीशन के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बिहार बी पी मंडल के पौत्र हैं

✍️ Dr Suraj Yadav डॉ सूरज मण्डल।

📢📢 आवश्यक सूचना 📢📢जातिवार जनगणना की मांग को लेकर राष्ट्रीय साझा असहयोग आंदोलन के बैनर तले दूसरे चरण की पद यात्रा भभुआ ( कैमूर ) से लेकर पटना ( बिहार ) तक

*📢📢 आवश्यक सूचना 📢📢*

*जातिवार जनगणना की मांग को लेकर राष्ट्रीय साझा असहयोग आंदोलन के बैनर तले दूसरे चरण की पद यात्रा भभुआ ( कैमूर ) से लेकर पटना ( बिहार ) तक*

*दिनाँक : 11 सितम्बर 2021 से 21 सितंबर 2021 तक*

*बिषय : जातिवार जनगणना की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में बहुजन समाज के संगठनों को शामिल करना*

*गूगल मीट का समय व दिन – समय शाम 05 बजे, दिन बुधवार, तारीख – 01 – 09 – 2021*

प्रिय क्रांतिकारी भाइयों / बहनों!

*जातिवार जनगणना की मांग को लेकर मंडल आर्मी संगठन की अगुआई में राष्ट्र व्यापी आंदोलन देश भर में चलाया जा रहा है. जिसके तहत प्रथम चरण की पद यात्रा का कार्यक्रम 16 अगस्त से 25 अगस्त जयपुर से दिल्ली तक मंडल आर्मी चीफ अनिरुद्ध सिंह विद्रोही जी के नेतृत्व व राष्ट्रीय साझा असहयोग आंदोलन मोर्चा में शामिल संगठनों के सहयोग से सम्प्पन हुई, अब दूसरे चरण की पद यात्रा भभुआ ( कैमूर ) से पटना , बिहार में 11 सितम्बर को शुरू होकर 21 सितम्बर को समाप्त होगी. जैसा कि आपको ज्ञात हो कि इस आंदोलन की मुख्य मांग 2011 की जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक करवाना व 2021 – 22 में होनी बाली जनगणना में जातिवार जनगणना करवाना है.*

*अतः आप सभी बहुजन समाज के संगठन व साथी जो राष्ट्रीय साझा असहयोग आंदोलन में शामिल होकर इस को मजबूत बनाना चाहते हैं उनको एक मंच पर लाने व आंदोलन में शामिल करने के उद्देश्य से यह गूगल मीट “राष्ट्रीय साझा असहयोग आंदोलन” की तरफ से बुधवार 01 सितंबर 2021 शाम 05 बजे रखी गई है. आप सभी से अपील है कि इस गूगल मीट में तय समय पर शामिल होकर अपने विचार रखें और इस राष्ट्रीय साझा असहयोग आंदोलन का हिस्सा बनें.*

*जनगणना में यदि जाति का कॉलम नहीं, तो जनगणना में हमारे घर से कोई सहयोग नहीं*



*निवेदक – अनिरुद्ध सिंह विद्रोही*
*मंडल आर्मी चीफ व संयोजक : राष्ट्रीय साझा असहयोग आंदोलन*

सीएम पर अभद्र टिप्पणी करने वाले पर एफआईआर दर्ज

सीएम पर अभद्र टिप्पणी करने वाले पर एफआईआर दर्ज
बदलापुर। हिन्दू युवा वाहिनी के मुख्य संरक्षक प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अमर्यादित टिप्पणी किये जाने के आरोप में पुलिस एक पर केस दर्ज कर जांच पड़ताल में जुटी है! सोमवार को हिंदू युवा वाहिनी के बारह से अधिक आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने प्रभारी निरीक्षक को पत्रक सौंप कर सम्बन्धित पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग किया था । हिंदू युवा वाहिनी के रामकृष्ण सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार मिश्र से मिलकर आरोप लगाया था कि राकी बादशाह नाम से फेसबुक पर आईडी चला कर वार्ड नंबर 13 पुरानी बाजार निवासी मुस्ताक जोगी पुत्र पप्पू जोगी ने मुख्यमंत्री एवं हिंदू युवा वाहिनी के संरक्षक योगी आदित्यनाथ पर अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया है। जिसको लेकर हिंदू युवा वाहिनी सहित अन्य लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने पुलिस से प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए केस दर्ज कर कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग किया था । प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार मिश्रा ने बताया कि सम्बंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसकी गिरप्तारी के लिए टीम गठित की गयी है!

#बिग_ब्रेकिंग #Breakingnews दलित पत्रकार संतोष कुमार के साथ लूट पाट गंभीर मारपीट के मामले को लेकर सांसद जौनपुर @SSYadavMP हुए सख्त @jaunpurpolice को त्वरित कार्यवाही कर अवगत कराने का दिया आदेश जाने क्या है पूरा मामला :रिपोर्ट बिपिन कुमार प्रजापति

https://twitter.com/SSYadavMP/status/1432642819919790085?t=SLP5iPE1UO8FJasChOT2kQ&s=19

जिलाधिकारी कार्यालय के सामने 10 दिन से पत्रकार आमरण अनशन पर,नहीं हो रही हमलावरों की गिरफ्तारी

द मूकनायक की संपादिका पत्रकार एक्टिविस्ट मीना कोटवाल के ट्वीट पर सांसद जौनपुर ने लिया संज्ञान


जौनपुर- बदलापुर तहसील अंतर्गत महाराजगंज थाना के सवंसा गांव निवासी पत्रकार संतोष कुमार की पत्नी रेशमा ने दिनांक 21.08 .2021 को डीएम मनीष कुमार वर्मा को लिखित रूप से प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि उनके पति पर यादवेंद्र प्रताप सिंह पुत्र भानु प्रताप सिंह ने दिनांक 26 जून 2021 को जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए जानलेवा हमला किया था जिसमें पति का दोनों पैर टूट गया था। आरोपित के खिलाफ विभिन्न धाराओं- 120/ 2021 धारा 147 ,392, 325, 323, 504, 506, 427 तथा एससी एसटी एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत हुआ था किंतु 17 अगस्त 2021 को मुकदमा दर्ज होने के 13 दिन के बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई जिससे मजबूर होकर पीड़ित तथा उसके परिवार को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने आमरण अनशन पर बैठने को विवश होना पड़ा । पीड़ित पत्रकार संतोष कुमार अपने परिवार सहित 20 अगस्त से कलेक्ट्रेट परिसर में आमरण अनशन पर हैं लेकिन 10 दिन से डीएम द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। पीड़िता द्वारा आरोप लगाया गया है कि थाना अध्यक्ष महाराजगंज व क्षेत्राधिकारी बदलापुर की मिलीभगत से ही ऐसी घटना को अंजाम दिया गया। दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि दिनांक 20 अगस्त को आते जाते समय सार्वजनिक रास्ता बंद करवा रहे थे और जब विरोध किया गया तो यादवेंद्र सिंह ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने आदमियों विनोद पुत्र जंगाली, अर्जुन पुत्र राजन, अजय पुत्र मुरली, अंकित पुत्र विनोद, सौरभ पुत्र मनोज, महिला को बुरी तरह से मारे पीटे तथा विनोद पुत्र जंगाली,अजय तथा उपरोक्त लोगों ने महिला के साथ अश्लील हरकत करते हुए छेड़छाड़ किए और मोटरसाइकिल भी क्षतिग्रस्त कर दिए और घर में बंद करके बाहर से दरवाजे में ताला बंद कर दिए।चिंताजनक और अफसोस वाली बात यह है कि पूरी तरह से अपराध मुक्त करने की बात करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश में देश के चतुर्थ स्तंभ को ढहाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है जो लोकतंत्र की सरेआम हत्या है। पुलिस विभाग के संबंधित अधिकारी कर्मचारी भी पत्रकार के मामले में उनके ऊपर फर्जी मुकदमे करके अपनी खुन्नस निकालते हुए द्वेष पूर्वक लोकतंत्र का गला घोटने का कार्य कर रहे हैं किंतु आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर 10 दिन से अधिक समय तक आमरण अनशन पर बैठने के बाद भी डीएम के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है जो लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात है।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिसनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस वाराणसी श्री एस के भगत ने अपर पुलिस निदेशक वाराणसी और जौनपुर पुलिस को मामले की जांच कर शीघ्र रिपोर्ट तलब किए

https://twitter.com/IgRangeVaranasi/status/1432696515353530370?t=2_FEOlKctr_E5149XIKmsg&s=19

सीएम योगी का प्रशासन पत्रकारों की जब नहीं सुन रहा है तो आम जनता के साथ कैसा बर्ताव करता होगा जिसका अनुमान आप स्वयं लगा सकते हैं। योगी के शासनकाल में प्रशासन पूरी तरह से अंधा, गूंगा ,बहरा और इतना लाचार हो गया है कि सही गलत उचित अनुचित कुछ भी सूझ नहीं रहा है। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा के कार्यकाल में इनके ही अधिकारी कर्मचारी इन के आदेश को नहीं मान रहे हैं न ही सुन रहे हैं और न तो इनके आदेश का भी कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। इनके अधिकारी कर्मचारी पूरी तरह से निरंकुश हो चुके हैं और पूरी तरह से अराजकता का माहौल बन गया है। डीएम को भी इतना भान नहीं है कि उनके कार्यालय के सामने पीड़ित पत्रकार अपने परिवार सहित आमरण अनशन पर बैठा है आखिर प्रशासन की मंशा क्या है और मौन क्यों है?

https://twitter.com/deepchand001/status/1432691576191389697?t=Oiwuf4N1rCfOlLUlN95ROw&s=19

https://twitter.com/DeepakK00865103/status/1432700235248177153?t=dRS-sMBZQ_0hxrC5rcCnlg&s=19

https://twitter.com/mangeram0154/status/1432662001365356548?t=jMsySu-6pS8HQWKg-l3ymw&s=19

https://twitter.com/RaviJatavRj/status/1432671203072774144?t=J7yETEpZ_u_rurGW_iTWtg&s=19

पूरे प्रकरण पर जौनपुर पुलिस की जांच रिपोर्ट

रिपोर्ट बिपिन कुमार प्रजापति

नोट:उपरोक्त सभी कथन/खबर समसमायिक घटनाक्रम के संबंध में पत्रकार की कलम से कलमबद्ध हुए आलेख मात्र हैं । इनसे किसी भी आरोपी के दोषी होने की पुष्टि नहीं करते। अपराध रोकथाम और अन्वेष्ण पुलिस का कार्य है जिसे वो सुचारू रूप से कर सकते हैं। हमे अपने कार्यपालिका और न्यायपालिका में आस्था रखना चाहिए

#बांदा आपकी इमानदार कार्य शैली पर शक नही है आत्माराम त्रिपाठी की ✍🏻से

आपकी इमानदार कार्य शैली पर शक नही है
आत्माराम त्रिपाठी की ✍🏻से
बांदा मंडल एव जनपद को काफी समय के बाद एक योग्य प्रशासक मिले जिनकी कार्य शैली पर शक करना बेइमानी होगी।किंतु जब उन्ही के अधिकारी कर्मचारियो द्वारा उनकी छबि को ठेस लगाने हेतु कमर कसी जा चुकी हो तो आमजन क्या कर सकता है? आज चारो तरफ आमजन मे एक ही चर्चा परिचर्चाएं है मुद्दतों के बाद उन्हे अपने मंडल मे एक स्वच्छ छबि वाले व म्रदुभाषी सबकी सुनने वाले सबके साथ न्याय करने वाले मंडलायुक्त,पुलिस उपमहानिरीक्षक मिले इसी तरह जनपद मे जिलाधिकारी एंव पुलिस अधीक्षक।जो सबको सुन रहे है सबको समय से न्याय दिलाने की कोशिस भी करते है।इसी तरह स्वास्थ विभाग मे देखा जाए तो मेडिकल कॉलेज बांदा मे एक से बढकर एक सुयोग्य डाक्टरो की टीम है जिनके व्योहार से यह नही लगता की वह पराए है एकदम देवदूत फरिस्तो की तरह रोगी को रोगमुक्त करने का प्रयास करते है मै अगर किसी एकाध डाक्टरो की प्रशंसा करू तो वह मेरी चापलूसी कहलाएगी लेकिन मै ऐसा आज नही करूंगा इतना जरूर कहूंगा की वह बधाई के पात्र है।मेडिकल कालेज बांदा मे कुछ खामी है जिसके कारण साफ सफाई अव्यावस्थित है इसके लिए सफाई कर्मी दोषी नही है बल्कि मारीजो के साथ पहुच रहे उनके तीमारदार है जो मैने स्वंय देखा डेस्टविन रखे है कचडा वासवेसिन मे डाला जाता है पीकदान है पर फर्श एंव रोशनदानो को पीकदान बना दिया जाता है।
अब हम बात करते है छबि पर जनपद के नरैनी महुआ ब्लाक मे स्वंय सहायता समूह के द्वारा दीदीओं के माध्यम से 06वर्ष के बच्चो व गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार वितरण किया जाता है।पर यंहा जिन्हे डी एम एम की उपाधि मिली हुई है वह इस पौष्टिक आहार को पूरा हजम कर जाता है और डकार भी नही लेता पीडित स्थानिय प्रशासनिक अधिकारियो से सिकायत करता है तो समझौता करने की बात कही जाती है सो समझ मे नही आता समझौता व्यवस्था के साथ है य भ्रष्टाचार भ्रष्टाचारियों से करना है।
आज इस लचर व्यवस्था के चलते आमजन को मिलने वाली सुबिधा इन भ्रष्टाचारियों के जेब मे जा रही है और बदनाम हो रहे जनपदीय आला अधिकारी गलत यंहा हो रहा है छबि खराब हो रही जनपदीय आला अधिकारियो की।
इसी तरह पुलिस विभाग मे है पुलिस अधीक्षक का लगातार प्रयास है की उनका जनपद भय मुक्त हो युवा वर्ग को नशा के आगोस मे जाने से कैसे बचाएं इसके लिए उन्होने अबैध मादक पदार्थों की तस्करी करने वालो के बिरूद्ध अभियान छेडा जिसमे उन्हे काफी हद तक सफलता भी मिली करोडो रूपए के मादक पदार्थों की बरामदी व तस्करो को गिरफ्तार कर जेल भेजना इस बात के सबूत है पर यह बरामदगी इस बात का भी सबूत है की उनके जनपद मे नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालो का एक बडा नेटवर्क है जिसे कंही न कंही उन्ही के अधिकारी कर्मचारियो का व आबकारी विभाग का संरक्षण प्राप्त है जो उनकी छबि को धूमिल करने मे पीछे नही रहते है।
आज सबसे बिकट दयनीय स्थित शिक्षा विभाग की है इनके मुखिया से कोई जानकारी मांगी जाए तो बताने मे आनाकानी करते है विद्यालय कब खुलना व बंद होना चाहिए अध्यापको को विद्यालय कब उपस्थित दर्ज करानी चाहिए और कब जाना चाहिए बताने मे अपनी तौहीन समझते है यही नही विद्यालयो की कमियों को इनकी अकर्मंडता कोई कलमकार न देखे इसके लिए इन्होने विद्यालयो मे कलमकारो के प्रबेश पर अपने मातहतो को मौखिक आदेश दे रोक लगा दी है। कुछ का कहना है की इन्होने ऐसा लिखित आदेश जारी कर दिया है किंतु हमारे पास ऐसे किसी आदेश की कोई प्रति नही है इसलिए हम दावे के साथ नही कह सकते है की ऐसा तुगलकी फरमान जारी हो चुका है।

स्वतंत्रता दिवस पर मीरगंज थानाध्यक्ष #राणा_प्रताप_यादव को एसपी @ipsajaysahni ने दिया प्रशस्ति पत्र । उनके सम्मानित होने पर थाना मीरगंज के पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ा है पूरे थाने में हर्ष और खुशी छा गई । @jaunpurpolice @adgzonevaranasi @igrangevaranasi

स्वतंत्रता दिवस पर मीरगंज थानाध्यक्ष को एसपी ने दिया प्रशस्ति पत्र



मीरगंज।स्वतंत्रता दिवस समारोह में थानाध्यक्ष मीरगंज राणा प्रताप यादव सम्मानित किए गए हैं उन्हें पुलिस अधीक्षक ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है उनके सम्मानित होने पर मीरगंज के पुलिसकर्मियों में खुशी हैं बता दें एक दिन पहले ही मीरगंज पुलिस ने मुठभेड़ में एक बदमाश को गिरफ्तार किया था उसके ऊपर 28 अपराधिक मुकदमे थे स्वतंत्रता दिवस पर पुलिस लाइन जौनपुर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसमें पुलिस अधीक्षक अजय कुमार साहनी ने थानाध्यक्ष मीरगंज राणा प्रताप यादव को उनके द्वारा कानून व्यवस्था स्थापित करने में सराहनीय कार्य करने पर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया उनके प्रशस्ति पत्र मिलने पर मीरगंज के पुलिसकर्मियों में खुशी देखी जा रही है बताया जा रहा है कि एक दिन पहले ही जरौना गांव के पास शातिर बदमाश को मुठभेड़ में गिरफ्तार करने के बाद उन्हें यह पुरस्कार दिया गया है जिसकी घोषणा पुलिस अधीक्षक ग्रामीण त्रिभुवन सिंह ने भी की थी थानाध्यक्ष मीरगंज राणा प्रताप यादव ने बताया कि पुलिस अधीक्षक महोदय के हाथों प्रशस्ति पत्र मिलने के बाद उन्हें खुशी है आगे और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरणा मिलेगी।

पत्रकार संजय सिंह राणा के एक्सीडेंट से आक्रोशित हुए पत्रकार कहा भ्रष्टाचार की पोल खोलने वालों पर गाड़ी चला दी गई : आत्मा राम त्रिपाठी की रिपोर्ट

पत्रकार संजय सिंह राणा के एक्सीडेंट से आक्रोशित हुए पत्रकार कहा भ्रष्टाचार की पोल खोलने वालों पर गाड़ी चला दी गई : आत्मा राम त्रिपाठी की रिपोर्ट

पत्रकार को जान से मारने की नियत से माफियाओं ने गाडी से कुचला
पुलिस प्रशासन माफियाओं के बिरूद्ध रिपोर्ट दर्ज करने मे कर रहा आनाकानी
पत्रकार की हालत गंभीर
पत्रकारो की एक टीम लखनऊ से चित्रकूट के लिए रवाना
आत्माराम त्रिपाठी की रिपोर्ट
चित्रकूट। पत्रकार खबर को यदि सच्चाई से प्रकाशित कर दे तो उसे कई तरह से धमकियां दी जाती है। यदि धमकी से बच जाए तो उसे जान से मारने के लिए गाड़ी चढ़ा दी जाती है।

ऐसी घटना चित्रकूट में सत्ताधारी पार्टी के दबंग नेता ठेकेदार ने अभी मीडिया ग्रुप के उप संपादक पत्रकार संजय राणा के ऊपर गाड़ी चढा दी जिससे संजय राणा गंभीर रूप से घायल हो गए । उन्हें सीएससी अस्पताल से तत्काल इलाहाबाद मेडिकल कालेज रेफर किया गया है हालत नाजुक बनी हुई है।
बताया गया है कि एक बोलेरो जीप जो किसी दबंग ठेकेदार की बताई गई है, पर सिर्फ चालक बैठा था। श्री राणा कहीं से आ रहे थे कि उस जीप को उनके ऊपर चढ़ा कर जान से मारने की कोशिश की गई। संयोग ऐसा हुआ कि जीप राणा के पैर को ही कुचल पाया और चालक मौके से फरार हो गया। राणा के पैर की हड्डी कुचली गई है और आनन फानन में चित्रकूट से उन्हें प्रयागराज रेफर कर दिया गया जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
बहरहाल अभी तक प्रशासन की ओर से कोई सार्थक कार्यवाही नहीं किए जाने की सूचना है।
हम बताना चाहेंगे कि श्री राणा सदैव बिना किसी पूर्वाग्रह प्रेरणा के सामाजिक सरोकार से जुड़ी ख़बरें प्रकाशित करते हैं और गाहे बेगाहे धमकियों से भी डरा नहीं करते थे। चाहे सरकारी अधिकारियों की गलत गतिविधियां हों या राजनेताओं की उन्होंने कभी कलम को झुकने नहीं दिया। आज उसी का नतीजा है कि इन पर जानलेवा हमला किया गया।
अभी मीडिया ग्रुप के प्रबंध संपादक प्रदेश के उच्च अधिकारियों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो और श्री राणा की उचित देखभाल और सहायता का बंदोबस्त किया जा सके।

हम प्रदेश में कार्यरत पत्रकार हित संगठनों से जुड़े तमाम लोगों से आग्रह करना चाहते हैं कि वे श्री राणा पर हुए इस हमले के संबंध में सरकारी कमलों से पूछताछ कर श्री राणा और उनके आश्रितों को उचित सहायता मुहैया कराने का प्रयास करें।

लेटे हनुमान मंदिर पहुंची गंगा की धारा, बजरंग बली को कराया स्नान

*लेटे हनुमान मंदिर पहुंची गंगा की धारा, बजरंग बली को कराया स्नान*..



प्रयागराज : संगम के किनारे स्थित लेटे हनुमान मंदिर में गुरुवार को मां गंगा की धारा पहुंच गई. चंद ही पलों में हनुमान जी की लेटी हुई आदमकद प्रतिमा गंगा की गोद में समा गई. गंगा में डूबते हुए हनुमान जी के मंदिर के अद्भुत पल को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. घुटनों तक पानी में चलकर श्रद्धालुओं ने बजरंग बली के दर्शन किए.

बता दें कि प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्‍तर तेजी से बढ़ रहा है. गुरुवार की दोपहर गंगा का पानी त्रिवेणी बांध स्थित लेटे हनुमान मंदिर तक पहुंच गया. ऐसी मान्‍यता है कि बारिश के दिनों में हर वर्ष मां गंगा लेटे हनुमान जी को स्नान कराने पहुंचती हैं. हनुमान मंदिर में जैसे ही मां गंगा की धारा पहुंची वैसे ही भक्‍त जयकारे लगाने लगे. भक्तों ने घुटनों तक पानी में चलकर बजरंग बली के दर्शन किए.

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और लेटे हनुमान मंदिर के महंत नरेंद्र गिरी ने दूध, दही, घी और शहद समेत पंचामृत से मां गंगा का अभिषेक कर उनकी आरती उतारी. इसके साथ ही लेटे हनुमान जी की शयन मुद्रा वाली आरती उतारी गई. महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि हनुमान जी अब मां गंगा की गोद में शयन करेंगे, क्योंकि हनुमान जी भगवान शिव के 11वें अवतार हैं और गंगा जी शिव जी की जटा से निकली हैं. इसी वजह से बजरंग बली को आशीर्वाद मिला था कि सावन के महीने में मां गंगा उन्हें स्नान करवाने पहुंचेंगी.

जनता ने नकारा फिर भी बडी निर्लज्जता के साथ कहते है की जनता उनके साथ है। आत्माराम त्रिपाठी की✍🏻से

जनता ने नकारा फिर भी बडी निर्लज्जता के साथ कहते है की जनता उनके साथ है
आत्माराम त्रिपाठी की✍🏻से


2022चुनाव की आहट सुनाई देनी लगी है सभी पार्टियो दलो के लोग अभी से अपनी रणनीति बनाने मे जुट गएं है ।तिलक तराजू औ तलवार इनको मारो जूता चार का नारा बुलंद करने वाली पार्टी द्वारा अब इनको साधने की कवायद तेज कर दी गई है तो कुछ पार्टियो दलो द्वारा अपने परमपरागत मतदाताओ को साधने की चुनौती उनके सामने सुरसा की तरह मुह बाए खडी है।

जबकी इसी तरह इन दलो के सामने सबसे बडी चुनौती है जनप्रिय उम्मीदवार खडा करने की तो आज पूरे प्रदेस मे सभी पार्टियो दलो द्वारा मंथन किया जा रहा है अपने संभावित प्रत्याशियो के बारे मे जानकारी एकत्र की जा रही है।

जबकी सबसे बिषम परिस्थित सत्तारूढ पार्टी के सामने है उसके अधिकांश सांसद विधायक है जो अबैध रेत खनन मे सलिप्तता के चलते आमजन के मध्य अपनी छबि धूमिल कर चुके है व जनता के विकास नही बल्कि स्वय के विकास मे लगे रहे।

इनकी निष्ठा किसी दल पार्टी मे नही है यह सभी अवसरवादी है डाल के बंदर है अवसर देखा तो इस डाल से उस डाल पे फुदक कर पहुचना इनकी फिदरत है ऐसे लोग न तो जनता के हितैषी है नही किसी दल पार्टी के और कहलाते है विकास पुरूष ।

यह अपनी निधि जो जनहित कार्यो के लिए इन्हे प्रदान की जाती है उसमे यह बिना 20परशेन्ट कमीशन लिए नही जारी करते ऐसे मे कितना विकास होगा यह अनुमान सहज लगाया जा सकता है।फिर भी यह विकास पुरूष कहलाते है।

ऐसे लोग हरदल पार्टी मे भरे पडे है।चुनाव आयोग मे दिए गए इनलोगो की निजी जानकारियो मे गौर किया जाय तो अधिकांश कुख्यात अपराधी है फिर भी माननीय कहलाते है।

आज पंचायत चुनाव परिणाम मे अगर इमानदारी से सत्तारूढ पार्टी ने नजर डाली होती व उस सत्य को स्वीकार किया होता जिसमे वह पराजित हुई जनता ने उसे नही बल्कि उनके विधायक सांसद को नकारा है उनके कारनामो को नकारा है रही बात जिला पंचायत,व्लाक प्रमुख चुनाव परिणाम की जिसको लेकर सत्तारूढ पार्टी अपनी पीठ थपथपा रही है तो एक कहावत है जिसकी लाठी उसी की भैस है जो सदियों से चली आ रही इस परमपरा को भाजपा ने जीवित रखा है और सिध्द कर दिया की वह भी औरो से कम नही है।

पंचायत चुनाव परिणाम ही विधायक सांसद के रिपोर्ट कार्ड है जिसे जनता ने अपने मत से कही स्वीकार किया तो कहीं अस्वीकार कर दे दिया है फिर भी बडी निर्लज्जता के साथ कहते है जनता उनके साथ है।