क्या कोई यादव समाज से संविधान सभा में गया था ?अपना इतिहास न जानने का बड़ा नुकसान यह होता है कि आप कोई नया इतिहास बनाने के लिए ठीक से प्रेरणा नहीं ले पाते हैं।

क्या कोई यादव समाज से संविधान सभा में गया था ?
यह सवाल मैंने जब अपने समाज के बुद्धिजीवियों से किया तो उत्तर लगभग नही के बराबर मिला । जानिए अनेक विद्यालयों व महाविद्यालयों के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले,संविधान सभा के सदस्य और अपनी विद्वता व अनुभव से संविधान निर्माण बहस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले कमलेश्वरी प्रसाद यादव जी के बारे में ।

कमलेश्वरी प्रसाद यादव



कमलेश्वरी प्रसाद यादव खगड़िया से संविधान सभा के मेंबर चुने गये थे और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। इनका जन्म 4 जनवरी, 1902 बिहार के चतरा, जिला मधेपुरा के एक ज़मींदार परिवार में हुआ था और उनका निधन 15 नवम्बर, 1989 में मधेपुरा में हुआ।
बिहार में मशहूर के. पी. कॉलेज की स्थापना मधेपुरा में उन्हीं के कर कमलों द्वारा हुई थी।

सन 1951 में जिला किशनगंज के उदा/विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी की तरफ़ से विधायक चुने गये थे। वह पटना विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र और बीएचयू (बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय) से हिंदी में डबल एम ए करने के साथ पटना विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री भी हासिल किये।
उल्लेखनीय है कि अपना इतिहास न जानने का बड़ा नुकसान यह होता है कि आप कोई नया इतिहास बनाने के लिए ठीक से प्रेरणा नहीं ले पाते हैं और आपका विरोधी अपने मिथकों को ऐतिहासिक बताकर आपके सामने अपना मान सम्मान ऊंचा कर लेते हैं। यादव समाज में ऐसे बहुत से नायक व नायिकाएं रही/रहे हैं जो अपने दौर में परिस्थिति के अनुसार लड़ते रहे हैं जिन्हें आज हम नहीं जानते।



Constituent Assembly Debate को पढ़ते वक़्त उसके मेंबर की जब लिस्ट देख रहा था तो मेरी नज़र अचानक कमलेश्वरी प्रसाद यादव के नाम पर पड़ी तो सोचा आप सभी को भी अवगत करा दूँ।


~यदुवेन्द्र यादव

लेखक~यदुवेन्द्र यादव

मुंबई एयरपोर्ट भी आया अडानी के हाथ, जानिए अब कितने एयरपोर्ट हो गए हैं कंपनी के पास,,,

मुंबई एयरपोर्ट भी आया अडानी के हाथ, जानिए अब कितने एयरपोर्ट हो गए हैं कंपनी के पास,,,

(नई दिल्ली)मंगलुरु, लखनऊ और अहमदाबाद के बाद अब मुंबई एयरपोर्ट की कमान भी उद्योगपति गौतम अडानी की कंपनी अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL) के हाथों में आ गई है। कंपनी ने मुंबई इंटरनैशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIAL) में 23.5 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली है। AAHL ने 1,685.25 करोड़ रुपये में यह हिस्सेदारी दो विदेशी कंपनियों ACSA ग्लोबल लिमिटेड (ACSA) और बिड सर्विसेज डिवीजन (मॉरीशस) लिमिटेड (बिडवेस्ट) से खरीदी।साथ ही कंपनी इस प्रोजेक्ट से बाहर निकल रहे प्रमोटर कंपनी जीवीके ग्रुप की 50.5 फीसदी हिस्सेदारी भी खरीद रही है। इस तरह AAHL की मुंबई इंटरनैशनल एयरपोर्ट लिमिटेड में हिस्सेदारी 74 फीसदी हो जाएगी। इसके साथ ही उसे नवी मुंबई में एयरपोर्ट विकसित करने का अधिकार मिल जाएगा। पिछले साल अगस्त में AAHL ने GVK एयरपोर्ट डेवलपर्स लिमिटेड (GVKADL) के कर्ज को खरीदने का एक समझौता किया था। GVKADL एक होल्डिंग कंपनी है। इसके जरिये GVK ग्रुप की MIAL में 50.50% हिस्सेदारी है।

रवि यादव/ मुंबई: राजेश विक्रांत हरफनमौला कलमकार हैं–प्रेम शुक्ल

राजेश विक्रांत हरफनमौला कलमकार हैं–प्रेम शुक्ल



रवि यादव/ मुंबई: हिंदी सेवा में बाबूराव पराडकर के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता! वे सच्चे अर्थों में हिंदी पत्रकारिता के भीष्म पितामह थे। महाराष्ट्र की धरती के सपूत पराड़कर ने काशी में हिंदी का झंडा बुलंद किया। ठीक उसी प्रकार जैसे मुंबई में राजेश विक्रांत, जिज्ञासा पटेल, निधि गौतम, सागर त्रिपाठी, ह्रदयेश मयंक आदि हिंदी को बढ़ा रहे हैं। यह उद्गार दैनिक सामना के सहायक संपादक प्रभाकर पवार ने राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक विकलांग की पुकार परिवार द्वारा सांताक्रुज पूर्व के मौलाना आजाद सभागृह में राजेश विक्रांत के लेखन, पत्रकारिता व साहित्य के 30 साल पर आयोजित एक विशिष्ट कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में व्यक्त किए। मंच पर वरिष्ठ पत्रकार विमल मिश्र, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व विकलांग की पुकार के संरक्षक प्रेम शुक्ल, पत्रकारिता कोश के संपादक आफताब आलम और साहित्य प्रेमी शिवजी सिंह भी मौजूद रहे। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तथा वरिष्ठ पत्रकार प्रेम शुक्ल ने कहा कि मैं दोपहर का सामना की शुरुआत यानी 23 फरवरी 1993 से राजेश विक्रांत से परिचित हूँ। वे हरफनमौला कलमकार हैं। किसी भी विषय पर लिखने में माहिर। रिश्ते बनाने के विशेषज्ञ। व्यंग्य भी बहुत बढ़िया लिखते हैं। इनका कॉलम बतरस काफी चर्चित रहा। उक्त अवसर पर “पत्रकारिता कोश “के2021वेंअंक का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मुंबई मित्र वृत मित्र के समूह संपादक अभिजीत राणे ने कहा कि साहित्य व पत्रकारिता में समर्पित हैं राजेश विक्रांत। वे मेरे पिता तुल्य हैं। मेरा उनका 15 साल का संबन्ध है। वरिष्ठ पत्रकार विमल मिश्र ने राजेश विक्रांत की 13 वीं पुस्तक कोरोना- डाउन के प्रति आशीर्वाद दिया।
इस कार्यक्रम में आशीर्वाद के निदेशक डा उमाकांत बाजपेयी, प्रख्यात शायर डॉ सागर त्रिपाठी, कवि डा रजनीकांत मिश्र, एनडीटीवी के सुनील सिंह, पत्रकार विकास संघ के अध्यक्ष आनंद मिश्र, पत्रकार संतोषी गुलाबकली मिश्र, मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी, समाजसेवी जितेंद्र सिंह जीतू, महबूब खान व डॉ नीलेश कोयन्डे का सम्मान किया गया और सुविख्यात कवि तथा चिंतन दिशा के संपादक ह्रदयेश मयंक को द्वितीय “डॉ गिरिजा शंकर त्रिवेदी साहित्य सम्मान” प्रदान किया गया। कार्यक्रम में भारत पब्लिकेशन, मुंबई द्वारा प्रकाशित आलेख संग्रह ‘कोरोना-डाउन’- राजेश विक्रांत, उपन्यास ‘एलओसी- लव अपोज क्राइम’- जिज्ञासा पटेल व कविता संग्रह ‘इंकड बाई सौल’- निधि गौतम का विमोचन भी सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन कवि तथा दोपहर का सामना के मुख्य उप संपादक अभय मिश्र ने किया व आभार प्रदर्शन डॉ अनंत श्रीमाली द्वारा किया गया। विकलांग की पुकार के कार्यकारी संपादक सरताज मेहदी के नेतृत्व में संपन्न इस कार्यक्रम में वरिष्ठ गजलकार हस्तीमल हस्ती, हरियश राय,
वरिष्ठ पत्रकार सैयद सलमान, हमारा महानगर के भानु प्रकाश मिश्र, श्री महाराष्ट्र रामलीला मंडल के महासचिव सुरेश डी मिश्र, आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली, मुंबई भाजपा प्रवक्ता उदय प्रताप सिंह, कवि डा मुकेश गौतम, एड अशोक मिश्र, एड रिद्धि मिश्रा, ऐबाद अंसारी, राधेश्याम निर्मल, संजय सिंह, एड. जी. एस. तिवारी, योगाचार्य ज्ञानेंद्र पांडेय, के के त्रिपाठी, अनुपम मिश्र, आस्था मिश्रा, एड प्रीति पांडेय, पत्रकार अजय सिंह, समाजसेवी मंगेश कनौजिया, समाजसेवक राम चरित्र कनौजिया, एंकर नीता बाजपेयी, कथाकार संगीता बाजपेयी, कवयित्री संगीता तिवारी ‘आसमा’, नताशा गिरि शिखा, संगीता पांडेय, हिंदुस्तानी, जाकिर हुसैन रहबर, शैलेन्द्र श्रीवास्तव, डा भालचंद्र तिवारी, अमित कुमार, पंकज जोबनपुत्रा, राजकुमार कोरी, पत्रकार धर्मेंद्र पांडेय, निमेश जोबनपुत्रा, तस्लीम खान, नूर हसन, कवि रवि यादव आदि का विशेष योगदान रहा। समापन नन्हीं कलाकार ओस संतोषी मिश्रा मराठे के बांसुरी पर राष्ट्रगान से हुआ।

क्यों भुला दिए गए जिन्ना को चुनौती देने बाले अब्दुल क़य्यूम अंसारीं….??? “एक जुलाहा पठान से इतना डर गयामोटर से उतरा और वहीं पे मर गया।”

क्यों भुला दिए गए जिन्ना को चुनौती देने बाले अब्दुल क़य्यूम अंसारीं….???

“एक जुलाहा पठान से इतना डर गया

मोटर से उतरा और वहीं पे मर गया।”

यह तुकबंदी बिहार के एक मौजूदा विधायक के नाना ने 1973 में ‘बाबा-ए-क़ौम’ अब्दुल क़य्यूम अंसारी के बारे में की थी। अब्दुल क़य्यूम अंसारी वह अज़ीम शख़्सियत रहें हैं जिन्होंने जिन्ना की सांप्रदायिक राजनीति और धर्म के आधार पर अलग देश, पाकिस्तान बनाने की कोशिशों का डट कर विरोध किया था। जिस ज़माने में मुस्लिम लीग ख़ुद को देश के मुसलमानों की अकेली ठेकेदार समझ रही थी उसी ज़माने में अंसारी ने उसे चुनाव में चुनौती दी। बिहार विधान सभा में 6 सीटें जीत कर यह साबित कर दिया सब मुसलमान जिन्ना के पीछे नहीं हैं। तब चुनाव पृथक निर्वाचन प्रणाली से हुए थे अर्थात हिन्दू समाज ने हिन्दू उम्मीदवारों को वोट दिया और मुसलमानों ने मुस्लिम उम्मीदवारों को।

आज ‘बाबा-ए-क़ौम’ अब्दुल क़य्यूम अंसारी का 115वां जन्म दिन है। इस मौक़े पर देश, समाज और वंचितों के हक़ की लड़ाई लड़ने वाली इस अज़ीम शख़्सियत को याद करना प्रासांगिक होगा। उन की पैदाइश 1 जुलाई 1905 को उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर ज़िले के नवली गांव में हुई थी। बाद में उन का परिवार बिहार के डेहरी-आन-सोन चला गया। उन्होंने दसवीं तक की पढ़ाई सासाराम में की, बाद में उच्च शिक्षा के लिए अलीगढ़ और कलकत्ता (अब कोलकाता) और इलाहबाद (अब प्रयागराज) तक का सफ़र तय किया। उन का तअल्लुक़ एक धनी परिवार से था लेकिन आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने शान-ओ-शौक़त छोड़ कर सादगी की ज़िंदगी अपना ली।

बहुत कम उम्र में उन्होंने ख़ुद को आज़ादी की लड़ाई में झोंक दिया था। वह 16 साल की उम्र में जेल भी गए। दरअसल हुआ यह कि कांग्रेस के आह्वान पर उन्होंने सरकारी स्कूल छोड़ दिया। उन के साथ तमाम बच्चों ने भी सरकारी स्कूल छोड़ा। ऐसे बच्चों के लिए उन्होंने एक स्कूल की स्थापना की। यह घटना असहयोग और ख़िलाफ़त आंदोलन के दौरान की है। इन आंदोलनों में हिस्सा लेने की वजह से ही उन्हें कम उम्र में गिरफ़्तार करके जेल भेजा गया। जेल से छूटने के बाद भी उन का आंदोलनों में हिस्सा लेना जारी रहा। इसी वजह से उन्हें अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए इधर-उधर भागना पड़ा।

उन्होंने एक युवा नेता के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ मिल कर काम किया। 1928 में कलकत्ता की अपनी यात्रा के दौरान साइमन कमीशन के ख़िलाफ़ छात्रों के आंदोलन में हिस्सा लिया। उन्होंने मुस्लिम लीग की साम्प्रदायिक नीतियों का खुल कर विरोध किया। वह भारत को विभाजित करके पाकिस्तान बनाने की मुस्लिम लीग की मांग के ख़िलाफ़ थे। मुस्लिम लीग से मुकाबले के लिए उन्होंने ‘मोमिन आंदोलन’ शुरू किया। इस बैनर के तहत उन्होंने सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से पिछड़े मोमिन समुदाय के उत्थान के लिए काम किया, जो उस समय भारत की मुस्लिम आबादी का कम से कम आधा था।

अब्दुल क़य्यूम अंसारी जीवन भर अखिल भारतीय मोमिन कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष रहे। मोमिन आंदोलन ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का समर्थन किया जिसे वह एक अखंड भारत तथा सामाजिक समानता, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र की स्थापना और विकास के लिए लड़ रहे थे। उन्होंने कारीगर और बुनकर समुदायों के कल्याण और देश के कपड़ा उद्योग में हथकरघा क्षेत्र के विकास के लिए भी काम किया। बिहार की राजनीति में ग़रीब, पिछड़े और दलितों के मसीहा के रूप में उभरे अब्दुल कयूम अंसारी ने शिक्षा और साक्षरता के प्रसार के लिए काम किया। उन्हीं की कोशिशों से 1953 में पहला अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग आयोग गठित किया गया था।

अब्दुल क़य्यूम अंसारी एक कुशल पत्रकार, लेखक और शायर भी थे। वह उर्दू साप्ताहिक ‘अल-इस्लाह’ (द रिफॉर्म) और एक उर्दू मासिक ‘मसावात’ (समानता) के सम्पादक थे। उन के अख़बारों के नाम से ही उन की विचारधारा का पता चल जाता है। वह पूरे समाज को बराबरी पर लाना चाहते थे। ख़ास कर कमज़ोर वर्गों को आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षिक रूप से मज़बूत बनाने के हक़ में थे। इस के लिए उन्होंने जी तोड़ संघर्ष किया। आज़ादी से पहले आंदोलनों के ज़रिए और आज़ादी के बाद सरकार के मंत्री के रूप में दबे कुचले समाज के उत्थान के लिए भरसक प्रयास किया।

अब्दुल क़य्यूम अंसारी सही मायनों में जनता के नेता थे। विशेष रूप से वंचित और ग़रीब लोगों में सब से क़रीब थे। वह अपनी मृत्यु तक कांग्रेस के सच्चे और वफ़ादार नेताओं में से एक थे। वह लगभग सभी मुख्यमंत्रियों के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री रहे। वह सभी समुदाय के ग़रीबों के मसीहा थे। यह वही महान शख़्सियत हैं जिन्होंने बिहार के लगभग सभी ज़िलों में ग़रीब छात्रों के लिए छात्रावास और मुफ़्त भोजन की स्थापना की थी। उन्हीं की शुरु की गई इस योजना को आज केंद्र और राज्य सरकारें मिल कर पूरे भारत में मिड-डे मील योजना के नाम से चला रही हैं।

उन की पार्टी मोमिन कॉन्फ्रेंस ने 1946 का आम चुनाव लड़ा। मुस्लिम लीग के ख़िलाफ़ बिहार विधानसभा में छह सीटें जीतने में कामयाब रही। इस प्रकार वह बिहार केसरी श्री कृष्ण सिंह के मंत्रिमंडल में बिहार के मंत्री बनने वाले पहले मोमिन बन गए। युवा मंत्री के रूप में वो बिहार केसरी श्री बाबू और बिहार विभूति अनुग्रह बाबू दोनों के विश्वास पात्र बन कर रहे। बाद में उन्होंने मोमिन कॉन्फ्रेंस को एक राजनीतिक संस्था के रूप में भंग कर इसे एक सामाजिक और आर्थिक संगठन बना दिया और ख़ुद कांग्रेस में शामिल हो गए। वह लगभग 17 वर्षों तक बिहार मंत्रिमंडल में मंत्री रहे और विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों को संभाला और निस्वार्थ सेवा और ईमानदारी से अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाया।

अक्टूबर 1947 में जब क़बाइलियों के भेष में पाकिस्तान ने कश्मीर पर हमला किया तो उस की निंदा करने वाले क़य्यूम अंसारी पहले मुस्लिम नेता थे। उन्होंने भारत के मुसलमानों को देश के सच्चे नागरिकों के रूप में पाकिस्तान की तरफ़ से किए गए इस आक्रामण का मुक़ाबला करने के लिए प्रेरित किया। इस के बाद उन्होंने 1947 में पाक अधिकृत कश्मीर को ‘आज़ाद’ कराने के लिए ‘भारतीय मुस्लिम युवा कश्मीर मोर्चा’ की स्थापना की। बाद में, उन्होंने सितंबर 1948 के दौरान हैदराबाद में रज़ाकारों के भारत विरोधी विद्रोह में भारत सरकार का समर्थन करने के लिए भारतीय मुसलमानों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अफ़सोस की बात यह है कि भारतीय समाज ख़ास कर मुस्लिम समाज ने स्वतंत्रता सेनानी, सच्चे देश प्रेमी, समाज सुधारक और हमेशा वंचितों के हक़ की आवाज़ उठाने वाली इस शख़्सियत को भुला दिया। जिस व्यक्ति ने देश के लिए क़ुर्बानी दी, जिन्ना के ‘टू नेशन फार्मूले’ का डट कर मुक़ाबला किया, उसे भुला दिया गाया। 1 जुलाई 2005 को, भारत सरकार ने आज़ादी की लड़ाई और सामाजिक उत्थान में उन के योगदान को याद करते हुए डाक टिकट जारी किया। बेहतर तो यह होता कि गंगा-जमुनी तहज़ीब को क़ायम करने के लिए बिहार और उत्तर प्रदेश में उन के नाम से केंद्रीय विश्वविद्यालय खोला जाता।

अब सवाल यह उठता है कि आख़िर एक अज़ीम शख़्सियत को आख़िर क्यों भुला दिया गया? क्या सिर्फ़ इस लिए कि उन का ताल्लुक़ समाज के कमज़ोर (पसमांदा) तबक़े से था और कमज़ोर तबक़ों को बराबरी और सम्मान दिलाना चाहते थे! समाज में बराबरी के विरोधी ब्राह्मणवादी (सय्यदवादी) सोच के लोगों ने उन के विचारों और उन के योगदान पर हमेशा पर्दा डालने की कोशिश की। बिहार में पसमांदा राजनीति के अगुवा, पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी ने अपनी किताब मसावात की जंग में विस्तार से बताया है कि अशराफ़िया तबक़े के मुस्लिम नेताओं के साथ ही ग़ैर अंसारी पिछड़े तबक़े के मुस्लिम नेता अब्दुल क़य्यूम अंसारी के बारे में कितनी घटिया सोच रखते थे।

मसावात की जंग के पेज न० 143 पर अली अनवर लिखते हैं कि ग़ुलाम सरवर (बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष) ने एक इंटरव्यू में अब्दुल क़य्यूम अंसारी को तत्कालीन मुख्यमंत्री के.बी. सहाय का ‘चमचा नंबर वन’ बताते हुए कहा है कि अंसारी को चमचागिरी के एवज़ में कैबिनेट मंत्री का पद मिल गया था। क़य्यूम अंसारी आज़ादी से पहले अर्थात 1946 में कैबिनेट मंत्री थे। पूरा देश जानता है कि वह अगर कैबिनेट मंत्री थे तो किसी श्री बाबू, के.बी. सहाय या केदार पांडेय के रहम-ओ-करम पर नहीं बल्कि अपने जनाधार और आज़ादी की लड़ाई में अपने योगदान की बदौलत थे। मंत्री का ओहदा तो उन के लिए बहुत छोटा था।

कांग्रेस के पुराने लोग बताते है कि 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अब्दुल क़य्यूम अंसारी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने का मन बना लिया था। दिल्ली में सब कुछ तय हो गया था और उन्हें शपथ लेने की तैयारी करने को कह कर पटना भेज दिया गया था। लेकिन उसी समय एक हादसा हो गया। डेहरी-आरा नहर का बांध टूटने से अमियावर गाँव में बाढ़ आ गई। वह हालात का जायज़ा लेने गए थे। गाँव को हुए नुक़सान का निरीक्षण करने और बेघर लोगों को राहत पहुंचाने के दौरान ही अचानक हार्ट अटैक से 18 जनवरी 1973 को उन की मृत्यु हो गई। यह भी कहा जाता है कि उन्हें पता चल गया था कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का फ़ैसला पलटा जा चुका है। इसी सदमे में उन की मौत हुई। इसी वजह से पठान नेता ने वह तुकबंदी की थी जिस का ज़िक्र शुरु में किया गया है।

बहरहाल अब्दुल क़य्यूम अंसारी और उन की विचारधारा आज और भी प्रासंगिक है। देश भर में बरसों से हाशिए पर रह रहे पिछड़े तबक़े के मुसलमान यानि पसमांदा मुसलमान अब राजनीति की मुख्यधारा में शामिल हो कर केंद्र और राज्यों की सत्ता में अपनी हिस्सेदारी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए अब्दुल क़य्यूम अंसारी मशाल-ए-राह हैं। उन की ज़िंदगी आने वाली पीढ़ियों को रास्ता दिखाती रहेगी। ऐसे सच्चे देशप्रेमी, समाज सुधारक नेता को उन की यौम-ए-पैदाइश (यौम-ए-मसावात) के मौक़े पर दिल की गहराइयों से ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करता हूँ।

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लेखक: युसूफ़ अंसारी

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, राजनीतिक विश्लेषक, चिंतक और पसमांदा समाज के प्रखर वक्ता

प्रचार / प्रसार – टीम मंडल आर्मी सामाजिक न्याय मिशन

जौनपुर/जलालपुर :पाक्सो एक्ट का अभियुक्त हुआ गिरफ्तार —- —-

पाक्सो एक्ट का अभियुक्त हुआ गिरफ्तार —-

जलालपुर —- क्षेत्र में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे चेकिंग अभियान के तहत क्षेत्राधिकारी केराकत के नेतृत्व तथा इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश सिंह के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत मंगलवार को एसआई अखिलेश यादव मय हमराह क्षेत्र में वांछित वारंटियों की तलाश में घुम रहे थे । तभी मुखबिर द्वारा सूचना मिली की धारा 376 आईपीसी व 5/6 पाक्सो एक्ट का आरोपी कही भागने के चक्कर में जलालपुर चौराहे पर खड़ा है । सूचना मिलते ही सक्रियता दिखाते हुए एसआई अखिलेश यादव मय हमराह हेड का. रितेश सिंह व कान्सटेबल सोनू मौर्या को साथ लेकर सुबह लगभग साढ़े दस बजे जलालपुर चौराहे पर घेराबंदी कर पाक्सो एक्ट का आरोपी दीलीप कुमार पुत्र इन्द्रासन निवासी नेवादा थाना जलालपुर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिए ।पुलिस की सक्रियता से आरोपी भागने में असफल रहा ।

बसपा के पूर्व महासचिव व काँग्रेस नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी गिरफ्तार कर जेल भेजे गएबसपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर भी गिरफ्तार कर जेल भेजे गए

लखनऊ से बहुत बड़ी खबर
बसपा के पूर्व महासचिव व काँग्रेस नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी गिरफ्तार कर जेल भेजे गए
बसपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर भी गिरफ्तार कर जेल भेजे गए
नसीमुद्दीन सिद्दीकी और राम अचल राजभर ने आज एमपी एमएलए कोर्ट में किया था सरेंडर
सरेंडर के साथ अंतरिम जमानत की अर्ज़ी भी डाली थी
कोर्ट ने अंतरिम जमानत की अर्ज़ी खारिज़ की
नियमित ज़मानत अर्ज़ी पर कल होगी सुनवाई
कोर्ट ने दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जेल
भाजपा नेता दयाशंकर सिंह के परिवार की महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी का मामला
कल कोर्ट ने जारी किया था कुर्की का आदेश
दोनों आरोपियों को किया था भगोड़ा घोषित

अबैध खनन ओवरलोडिंग के चलते जनपद की सड़कों का बुरा हाल है सांसद विशंभर प्रसाद निषाद जी ने प्रेस नोट जारी कर वर्तमान सरकार का ध्यानआकर्षित कियाआत्माराम त्रिपाठी की रिपोर्ट

अबैध खनन ओवरलोडिंग के चलते जनपद की सड़कों का बुरा हाल है सांसद विशंभर प्रसाद निषाद



आत्माराम त्रिपाठी की रिपोर्ट
बांदा सांसद विश्वंभर प्रसाद निषाद ने कहा कि जनपद में बालू खनन ओवरलोडिंग के चलते वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों से होकर शहरी क्षेत्रों में भी सड़कों का यह हाल है कि लोगों को निकलने में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है
बांदा_समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राज्यसभा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद ने कहा कि जब से प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है तब से प्रदेश की सड़कों का बुरा हाल है सड़कें पूर्ण रूप से ध्वस्त होकर बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गई हैं जिनके निर्माण मरम्मत ई करण के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं। सिर्फ खाऊ कमाऊ योजनाएं बनाकर खानापूर्ति करने का काम किया जा रहा है। सांसद विश्वंभर प्रसाद निषाद ने कहा कि जनपद बालू खनन ओवरलोडिंग के चलते वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों से होकर शहरी क्षेत्रों में भी सड़कों का यह हाल है कि लोगों को निकलने में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है खस्ताहाल सड़कों के कारण ग्रामीणों क्षेत्रों में एंबुलेंस तक समय से नहीं पहुंच पाती है जबकि पूरे प्रदेश के संपर्क मार्गों में विभाग से गड्ढा मुक्त का बोर्ड लगा कर फर्जी वाहवाही लूटी जा रही है। जबकि जनता हकीकत सब जानती है जनता फिर भी मजबूरन खामोश है।सांसद विशंभर प्रसाद निषाद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी कार्यालय के नजदीक नया बाईपास बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील होकर ध्वस्त हो चुका है। बालू के अवैध परिवहन ने रोडो को बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील कर दिया है। तथा की नदी पर बना पुल भी जर्जर हालत में है इसी तरह भारतीय जनता पार्टी कार्यालय के आगे कनवारा रोड एवं आलोना , साड़ी, अमलो र यथा महोबा रोड से आछौरौंड मार्ग लौमर जसपुरा से अमारा बरे हटा दुरेडी रोड महोबा रोड से इंद्रपुरवा मार्ग गिरवा से स्योड़ा मार्ग मारौलि उजरेहटा मार्ग साड़ी से उसरा मार्ग पूरन से कमासिन मार्ग सहित जनपद से आधा सैकड़ा से ज्यादा संपर्क मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गया है जहां नाही वर्तमान की सरकार सुध ले रही है। और ना ही विभाग सांसद विशंभर प्रसाद निषाद ने कहा कि वर्तमान सरकार सिर्फ दिखावा और जुमलेबाजी कर रही है। प्रदेश के विकाश से कोई लेना देना नहीं है

प्रतापगढ़/दिल्ली #सेक्स_रैकेट का खुलासा #बीजेपी की महिला नेता के यहां चलता था सेक्स रैकेट पुलिस की भनक लगते ही सेक्स रैकेट सरगना हुई रफूचक्कर

बीजेपी की महिला नेता यहां चला रहा थी सेक्स रैकेट का कारोबार
By: अखिलेश त्रिपाठी


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sex racket
राष्ट्रीय महिला आयोग के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा, जानिए क्या है पूरा मामला

प्रतापगढ़. बीजेपी की महिला नेता और पूर्व सभासद सेक्स रैकेट का कारोबार प्रतापगढ़ में चला रही थी और पुलिस को कानों कान खबर नहीं हुई। राष्ट्रीय महिला आयोग में जब एक युवती ने जबरन देह व्यापार कराने की शिकायत दर्ज कराई तो पूरे मामले का खुलासा हुआ।

महिला ने प्रतापगढ़ के मीरा भवन की रहने वाली पूर्व सभासद और बीजेपी नेता रमा मिश्रा के खिलाफ देह व्यापार का आरोप लगाया है। दिल्ली के गोविंदपुर थाने में भाजपा नेत्री रमा मिश्रा समेत पांच पर देह व्यापार का केस दर्ज किया गया है। साल 2015 से जनपद के साथ गैर जनपदों में भी देह व्यापार का धंधा चल रहा था।

वहीं पुलिस ने इस संबंध में कार्रवाई करते हुए जब बीजेपी नेता के घर पर छापेमारी की, तो वह फरार हो गई। पुलिस बीजेपी नेता की तलाश में जुटी है।

खुटहन (जौनपुर)यूपी पंचायती चुनाव कालखंड का गजब कारनामा प्रधान सहित इक्यावन लोगों का नाम विलोपित सूची में डाले जाने का आरोप

प्रधान सहित इक्यावन लोगों का नाम विलोपित सूची में डाले जाने का आरोप

खुटहन ( जौनपुर) 17 जनवरी
लोढ़िया गाँव के प्रधान ने अपने परिवार सहित गांव में रह रहे कुल इक्यावन मतदाताओं का नाम फर्जी तरीके से बिलोपन सूची में डाले जाने का आरोप लगाते हुए उप जिलाधिकारी शाहगंज व खंड विकास अधिकारी को प्रार्थना पत्र दिया है। उनका दावा है कि प्रकाशन के लिए तहसील से जिले पर भेजी गयी सूची में फर्जी रूप से उक्त मतदाताओं को बिलोपित दिखाया गया है। वहीं बीएलओ पुष्पलता यादव का कहना है कि हमारे द्वारा कुल 26 मतदाताओं का नाम जो अस्थायी रूप से बाहर रहते हैं, या मृतक हो चुके हैं। उन्हें ही बिलोपित सूची में डाला गया है। इसके अतिरिक्त यदि संखा बढ़ाई गई है तो उसकी जानकारी हमें नहीं है।

गांव के प्रधान प्रेमचंद्र यादव का आरोप है कि मतदाता सूची में तहसील मुख्यालय से लेकर जिले तक बड़ा खेल किया जा रहा है। बीएलओ के द्वारा 26 मतदाताओं की बिलोपन सूची भेजा गया था। जबकि विश्वस्त सूत्र से जानकारी करने पर पता चला कि इस सूची में कुल 77 नाम दर्ज कर दिए गये है। आरोप है कि सूची में खुद उनका तथा उनके परिवार के दर्जन भर लोगो सहित 51 मतदाताओं को फर्जी तरीके से सूची से बाहर कर दिया गया है। जबकि वे खुद गाँव के प्रधान है। इस संबंध में बीडीओ गौरवेंद्र सिंह ने बताया कि ग्राम प्रधान के द्वारा लगाये गए आरोप की जांच कर कार्यवाही की जायेगी।



खुटहन ( जौनपुर) 17 जनवरी
लोढ़िया गाँव के प्रधान ने अपने परिवार सहित गांव में रह रहे कुल इक्यावन मतदाताओं का नाम फर्जी तरीके से बिलोपन सूची में डाले जाने का आरोप लगाते हुए उप जिलाधिकारी शाहगंज व खंड विकास अधिकारी को प्रार्थना पत्र दिया है। उनका दावा है कि प्रकाशन के लिए तहसील से जिले पर भेजी गयी सूची में फर्जी रूप से उक्त मतदाताओं को बिलोपित दिखाया गया है। वहीं बीएलओ पुष्पलता यादव का कहना है कि हमारे द्वारा कुल 26 मतदाताओं का नाम जो अस्थायी रूप से बाहर रहते हैं, या मृतक हो चुके हैं। उन्हें ही बिलोपित सूची में डाला गया है। इसके अतिरिक्त यदि संखा बढ़ाई गई है तो उसकी जानकारी हमें नहीं है।

गांव के प्रधान प्रेमचंद्र यादव का आरोप है कि मतदाता सूची में तहसील मुख्यालय से लेकर जिले तक बड़ा खेल किया जा रहा है। बीएलओ के द्वारा 26 मतदाताओं की बिलोपन सूची भेजा गया था। जबकि विश्वस्त सूत्र से जानकारी करने पर पता चला कि इस सूची में कुल 77 नाम दर्ज कर दिए गये है। आरोप है कि सूची में खुद उनका तथा उनके परिवार के दर्जन भर लोगो सहित 51 मतदाताओं को फर्जी तरीके से सूची से बाहर कर दिया गया है। जबकि वे खुद गाँव के प्रधान है। इस संबंध में बीडीओ गौरवेंद्र सिंह ने बताया कि ग्राम प्रधान के द्वारा लगाये गए आरोप की जांच कर कार्यवाही की जायेगी।

लखनऊ :यूपी में शर्मा जी की इंट्री ने बढ़ाई मंत्रियों के दिलों की धड़़कन, कटेगा कई मंत्रियों का पत्ता,

*यूपी में शर्मा जी की इंट्री ने बढ़ाई मंत्रियों के दिलों की धड़़कन, कटेगा कई मंत्रियों का पत्ता,*
*लखनऊ*
गुजरात कैडर के रिटायर्ड आईएएस अरविंद कुमार शर्मा के भाजपा ज्‍वाइन करने के तत्‍काल बाद विधान परिषद प्रत्‍याशी घोषित होने से यूपी के तमाम मंत्रियों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। खासकर उन मंत्रियों की जिन्‍होंने परफार्मेंस की बजाय कमाई को वरीयता दी है। वह अब अपने-अपने संपर्कों के जरिये अपनी कुर्सी बचाने के प्रयास शुरू कर दिये हैं। कोई कामख्‍या के दर्शन अपनी कुर्सी बचाने में जुटा है तो कोई संघ के वरिष्‍ठ नेताओं के यहां पैरवी कराने में लगा हुआ है।

पार्टी के विश्‍वस्‍त सूत्रों ने बताया कि चुनावी वर्ष में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ बिजली, पानी और सड़क जैसी जनता से जुड़े बुनियादी विभागों से बेहतर काम चाहते थे, लेकिन इन विभागों के मंत्री अभी तक उनकी उम्‍मीदों पर खरे नहीं उतर पाये हैं। योगी चुनाव में जाने से पहले हर मोर्चे को मजबूत करना चाहते हैं। इसी क्रम में वह पिछले दिनों पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर इस परेशानी से अवगत कराया था तथा रिजल्‍ट ओरियेंटेड व्‍यक्ति की मांग की थी।

योगी आदित्‍यनाथ ने मोदी से उनके मंत्रिमंडल सहयोगी एस जयशंकर तथा हरदीप पुरी जैसे स्किल्‍ड व्‍यक्ति की मांग की थी ताकि यूपी में सड़क, बिजली और पानी जैसे विभागों की कार्यप्रणाली का मैकेनिज्‍म सुधारा जा सके। मोदी-योगी की इस मुलाकात के बाद ही मऊ जिले के मूल निवासी और गुजरात कैडर के मोदी के विश्‍वासपात्र आईएएस अरविंद शर्मा को रिटायरमेंट से दो साल पहले ही वीआरएस लेने का निर्देश दे दिया गया। वीआरएस लेने के साथ ही यह सामने आ गया कि यूपी में उन्‍हें महत्‍वपूर्ण पद दिया जायेगा।

माना जा रहा है कि विधान परिषद का चुनाव निपटने के बाद योगी मंत्रिमंडल का तीसरा और आखिरी विस्‍तार होगा। इसमें अरविंद कुमार शर्मा को डिप्‍टी सीएम बनाकर महत्‍वपूर्ण विभागों की जिम्‍मेदारी सौंपी जायेगी। यह विस्‍तार लंबे समय से लटक रहा था, क्‍योंकि योगी की टीम में उनकी तरह मेहनत करने वाले मंत्रियों का निहायत ही अभाव है। इस विस्‍तार में कई लापरवाह मंत्रियों की कुर्सी भी जाने वाली है। दो-चार नये चेहरों को भी चुनावी समीकरण देखते हुए जगह दी जायेगी। खबर है कि पैसे देकर पद पाने वाले दूसरे दलों से आये लोग भी निशाने पर हैं।

मुख्‍यमंत्री होने के बावजूद योगी आदित्‍यनाथ राज्‍य के सभी 75 जिलों का एक से अधिक बार दौरा कर चुके हैं, जनता की परेशानियों से रूबरू हो चुके हैं, लेकिन उनकी मंत्रिमंडल का एक भी सहयोगी आज तक राज्‍य के सभी जिलों में नहीं जा सका है, क्‍योंकि उसकी दिलचस्‍पी जनता में नहीं है। एक भी मंत्री ऐसा नहीं है जो कह सके कि उसने उत्‍तर प्रदेश के सभी जिलों का दौरा करके जनता की परेशानियों से अवगत हुआ है। मंत्रियों की इसी लापरवाही से योगी लगातार कुपित रहे हैं। मंत्रियों की दिलचस्‍पी जनता की समस्‍याओं से ज्‍यादा टेंडर मैनेज करने तथा वसूली कराने में रही है।

सिंचाई विभाग में आज भी उसी बसपा नेता की तूती बोलती है, जिसने योगी आदित्‍यनाथ को खुले मंच से धमकी दी थी। उसके तथा उसकी कंपनी के खिलाफ तमाम शिकायतों के बावजूद वह टिका हुआ है, क्‍योंकि विभागीय अधिकारी और विभागीय मंत्रियों की हर सुविधा का ख्‍याल रखता है। यूपी में घर-घर पानी पहुंचाने की महत्‍वाकांक्षी योजना चल रही है, लेकिन विभाग अब तक योगी की उम्‍मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है, जबकि 2024 तक इस परियोजना को पूरा करने का लक्ष्‍य है।

बिजली विभाग का भी यही हाल है मं‍त्रीजी और उनके चेले टेंडर सेट कराने में व्‍यस्‍त हैं, जनता बिजली बिल और स्‍मार्ट मीटर की लूट से बेहाल है। गलत-सलत बिल आ रहा है, और जनता उपकेंद्रों के चक्‍कर काट रही है। जनता इन बेकार की परेशानियों से सरकार से नाराज हो रही है। इस तरह की तमाम शिकायतें भी रोज मुख्‍यमंत्री तक पहुंचती हैं। वो सुधार करने के निर्देश देते हैं, लेकिन समस्‍या सुलझाने का कोई ठोस मैकेनिज्‍म मंत्रीजी और उनके विभाग के पास नहीं है।

योगी लगातार कई मोर्चों पर अकेले जूझ रहे थे, क्‍योंकि जिन लोगों की लूट की दुकानें योगी के चलते बंद हुईं वह सारे लोग अलग-अलग फ्रंट से रोज योगी के खिलाफ षणयंत्र रचने में जुटे रहते हैं। वह तमाम मंत्री भी योगी के खिलाफ हैं, जो पैसे कमाने के सपने लेकर आये थे और योगी के चलते जिनकी उम्‍मीदें परवान नहीं चढ़ पाईं। योगी की नजर परिवहन विभाग पर भी है, जहां के भ्रष्‍ट लोग ओवरलोड वाहनों से राज्‍य की सड़कों को खुलेआम रौंदवा रहे हैं। विस्‍तार में इस विभाग के भी चपेट में आने की संभावना जताई जा रही है।

अरविंद कुमार शर्मा के एमएलसी घोषित होने के बाद तमाम मं‍त्री तो घबराहट में हैं।