रवि यादव/मुम्बई: दादर में” मास बिच क्लीन अप 2020″संपन्न।

दादर में” मास बिच क्लीन अप 2020″संपन्न।

रवि यादव / मुबंई,63वाँ इन्टरनेशनल लियो दिवस एवं डाँ बाबासाहेब आंबेडकर के64वाँ महापरिनिर्वारण दिवस के उपलक्ष में”

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुंबई पुलिस के उप  पुलिस निरीक्षक श्री राहुल  जोग एवं उनकी टीम, photo: Ravi Yadav

लिओ क्लब आँफ गु. ना. खालसा कालेज” ने हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी “मास बिच क्लीन अप 2020” का आयोजन दादर चौपाटी पर किया । क्लब के कुल87 विद्यार्थी स्वयंसेवकों ने सरकारी covid-19के निर्देशों का पालन करते हुए बीएमसी की मदद से सुबह 8:00 बजे से 10:00 बजे तक 50 से 60 किलो कचरा साफ किया सारे स्वयंसेवकों ने अपने शहर मुंबई को साफ रखने के प्रतिज्ञा ली ।इस अभियान में विज्ञान ,वाणिज्य और कला के हर क्षेत्र के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुंबई पुलिस के उप पुलिस निरीक्षक श्री राहुल जोग एवं उनकी टीम, लायंस क्लब के पदाधिकारी जोन चेयरपरसन श्री मनोज शाह, लियो एडवाइजर श्री वर्षा बोरा ,लियो मल्टीपल जिला अध्यक्ष श्री मंथन मेहता ,श्री दिनेश जैन ,रोहित छेडा उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने इस अभियान में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों की खूब सराहना की और उन्हें उत्साहित किया ।इस स्वच्छता मुहिम में प्रेसिडेंट -प्रथमेश मिश्रा , सचिव-दीप्ति कत्यान,कोषाध्यक्ष-अस्लम शेख, प्रोजेक्ट हेड ऋषिराज शिन्दे,खालसा के मुख्य अध्यापक-डाँ.किरण मानगावकर, अध्यापिका डाँ . किरण पान्डे का विशेष सहयोग रहा ।

बांदा कांग्रेस। रोहित चौधरी जी उत्तर प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष योगेश दीक्षित जी ने आगामी पंचायत चुनाव की रणनीति बनाते हुए प्रियंका-गांधी वाड्रा का संदेश दिया। आत्माराम त्रिपाठी की रिपोर्ट

कांग्रेस ने आगामी पंचायत चुनाव की रणनीति बनाते हुए प्रियंका-गांधी वाड्रा का संदेश दिया
आत्माराम त्रिपाठी की रिपोर्ट


बांदा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव रोहित चौधरी जी एवम उत्तर प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष योगेश दीक्षित जी ने आज मवई सर्किट हाउस में जिला एवं शहर के वरिष्ठ कांग्रेस जनों, पदाधिकारियों की बैठक ली तथा आगामी पंचायत चुनाव एवं विधानसभा चुनाव 2022 के मद्देनजर कार्यकर्ताओं को प्रियंका गांधी वाड्रा जी का संदेश दिया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव रोहित चौधरी जी ने कहा कि संगठन सृजन अभियान के तहत नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने की प्रक्रिया को गति देना है तथा जो कार्यकर्ता गुमराह हैं अलग-थलग हो रहे हैं उन्हें पार्टी के अंदर समेटकर जिम्मेदारियां सौंपनी है। प्रांतीय उपाध्यक्ष योगेश दीक्षित जी ने कहा जहां हमें युवाओं को जोड़ना है वहीं वरिष्ठ बुजुर्गों को पार्टी में सम्मान देना है। उन्होंने कहा कि आगामी दो माह तक संगठन सृजन का कार्य देखना है। बाँदा कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित तथा बाँदा कांग्रेस शहर अध्यक्ष पुष्पेन्द्र श्रीवास्तव व उत्तर प्रदेश कांग्रेस के सचिव अखिलेश शुक्ला एवं पदाधिकारियों सहित कार्यकर्ताओं ने दोनों नेताओं की अगुवाई की। बैठक में बी. लाल व कालीचरण निगम जिला उपाध्यक्ष, वीरेन्द्र तिवारी जिला कोषाध्यक्ष, गजेंद्र सिंह पटेल जिला महासचिव, कुतैबा जमा खां जिला महासचिव, सूरज बाजपेई जिला महासचिव, रामहित निषाद जिला महासचिव, रेखा वर्मा जिला सचिव, धीरेंद्र पटेल जिला सचिव, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष सीमा खान, प्रांतीय सचिव अल्पसंख्यक विभाग सैय्यद अल्तमश हुसैन, बाँदा(उप्र) कांग्रेस सोशल मीडिया/आई टी सेल प्रभारी सन्तोष कुमार द्विवेदी, सेवादल जिलाध्यक्ष कैलाश बाजपेयी, के पी सेन, अशोक वर्धन कर्ण, जिलानी दुर्रानी, राजेश कुमार गुप्ता, रोहित द्विवेदी, शंकुल सिंह परिहार, इरफान खान, अशोक सिंह चौहान, छेदीलाल धुरिया, हफीज, सुनीता यादव, रमा देवी, कुलदीप मिश्रा, संजय ठाकुर आदि सहित सैकड़ों कांग्रेस जन उपस्थित रहे।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे पी नड्डा जी के स्वागत को मुम्बई है तैयार – श्री मंगल प्रभात लोढ़ा*रवि यादव/मुबंई

*भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे पी नड्डा जी के स्वागत को मुम्बई है तैयार – श्री मंगल प्रभात लोढ़ा*
रवि यादव/मुबंई


भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे. पी. नड्ड़ा जी के तीन दिवसीय महाराष्ट्र दौरा का शुभारंभ 18 दिसंबर 2020 को मुम्बई से होने जा रहा है। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे. पी. नड्ड़ा जी के इस तीन दिवसीय दौरे की घोषणा मात्र से मुम्बई के सभी भाजपा पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं में जोश की लहर दौड़ गई है। सभी अपने-अपने स्तर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष की स्वागत की तैयारी में जुट गये है। इन तैयारियों का जायजा तथा रूपरेखा तय करने के लिए दिनांक 10 दिसंबर 2020 को देर शाम 7 बजे से मुम्बई भाजपा कार्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मुम्बई भाजपा के सभी पदाधिकारीयों ने भाग लिया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के सह-प्रभारी व वरिष्ठ राजनेता श्री जयभान सिंह पवैया एवं श्री ओमप्रकाश धुर्वे विशेष रूप से उपस्थित थे। उनका सम्मान व सत्कार मुम्बई भाजपा के अध्यक्ष श्री मंगलप्रभात लोढ़ा जी द्वारा किया गया।

इस अवसर पर मुम्बई भाजपा के अध्यक्ष श्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे. पी. नड़्डा जी के स्वागत के लिए पूरा मुम्बई तैयार है। मुम्बई का हर नागरिक मुम्बई के विकास के लिए भाजपा से जुड़ने को आतुर है, क्योकि हमारी पार्टी के पास सस्कृति है, समर्पण है। यह किसी व्यक्ति व परिवार विशेष की पार्टी नही है, यह एक पूर्ण लोकतांत्रिक पार्टी है, जिसमें पार्टी का हर एक कार्यकर्ता अपने क्षमता के बल पर पार्टी के सर्वोच्य पद तक पहुँच सकता है। इसका सबसे उत्तम उदाहरण स्वयं हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे. पी. नड्डा जी है, जो एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक जीवन का आरंभ करते हुए, अपनी आसाधारण प्रतिभा के बल पर आज विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर विराजमान है। मुम्बई की आम जनता आज भष्ट्रचार व परिवारवाद में डुबी इन तीन राक्षसों की सरकार से मुक्ति चाहती है। इसके लिए हम सभी सड़को पर उतरकर पुरी इमानदारी के साथ लड़ेगें।

कार्यक्रम में मुम्बई भाजपा उपाध्यक्ष श्री पराग अलवी जी, मंत्री श्री ज्ञानमुर्ती शर्मा, महाराष्ट्र प्रदेश संगठन मंत्री श्री विजय पुराणिक जी, महाराष्ट्र के सह-प्रभारी व वरिष्ठ राजनेता श्री ओमप्रकाश धुर्वे जी, श्री जयभान सिंह पवैया जी ने क्रमशः सम्बोद्धित किया। कार्यक्रम का संचालन श्री भालचंद सिरसठ जी ने किया।

नये सांसद भवन के शिलान्यास पर पीएम मोदी ने कहा भारत लोकतंत्र की जननी हैअमित तिवारी की रिपोर्ट

नये सांसद भवन के शिलान्यास पर पीएम मोदी ने कहा भारत लोकतंत्र की जननी है
अमित तिवारी की रिपोर्ट


लखनऊ । प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश की नई संसद भवन का शिलान्यास कर दिया है इस मौके पर पीएम मोदी ने देश को संबोधित कर रहे हैं पीएम मोदी ने कहा, आज का दिन बहुत ही एतिहासिक है आज का दिन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में मील के पत्थर की तरह है पुराने संसद भवन ने आजादी के बाद के भारत को दिशा दी, तो नया भवन आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का गवाह बनेगा।
पीएम मोदी ने कहा, ‘हम गर्व से कह सकते हैं कि हमारे देश ने उन आशंकाओं को न सिर्फ गलत साबित किया, बल्कि 21वीं सदी की दुनिया भारत को अहम लोकतांत्रिक ताकत के रूप में आगे बढ़ते देख रही है।
प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की बड़ी बातें-
मैं अपने जीवन में वो क्षण कभी नहीं भूल सकता जब 2014 में पहली बार एक सांसद के तौर पर मुझे संसद भवन में आने का अवसर मिला था तब लोकतंत्र के इस मंदिर में कदम रखने से पहले, मैंने सिर झुकाकर, माथा टेककर, लोकतंत्र के इस मंदिर को नमन किया था।
हमारे वर्तमान संसद भवन ने आजादी के आंदोलन और फिर स्वतंत्र भारत को घड़ने में अपनी अहम भूमिका निभाई है आजाद भारत की पहली सरकार का गठन भी यहीं हुआ और पहली संसद भी यहीं बैठी।
ये इमारत अब करीब 100 साल की हो रही है बीते सालों में इसे जरूरत के हिसाब से अपग्रेड किया गया कई नए सुधारों के बाद संसद का ये भवन अब विश्राम मांग रहा है।
सालों से नए संसद भवन की जरूरत महसूस हो रही है ऐसे में हम सभी का दायित्व है कि 21वीं सदी के भारत को एक नया संसद भवन मिले इसी कड़ी में ये शुभारंभ हो रहा है।
आने वाली पीढ़ियां नए संसद भवन को देखकर गर्व करेंगी कि ये आजाद भारत में बना है आजादी के 75 साल का स्मरण करके इसका निर्माण हुआ है।
भारत के लिए लोकतंत्र जीवन मूल्य है, जीवन पद्धति है, राष्ट्र जीवन की आत्मा है भारत का लोकतंत्र, सदियों के अनुभव से विकसित हुई व्यवस्था है भारत के लिए लोकतंत्र में, जीवन मंत्र भी है, जीवन तत्व भी है और साथ ही व्यवस्था का तंत्र भी है।
हमें याद रखना है कि वो लोकतंत्र जो संसद भवन के अस्तित्व का आधार है, उसके प्रति आशावाद को जगाए रखना हम सभी का दायित्व है हमें ये हमेशा याद रखना है कि संसद पहुंचा हर प्रतिनिधि जवाबदेह है ये जवाबदेही जनता के प्रति भी है और संविधान के प्रति भी है।
राष्ट्र के विकास के लिए राज्य का विकास, राष्ट्र की मजबूती के लिए राज्य की मजबूती, राष्ट्र के कल्याण के लिए राज्य का कल्याण इस मूलभूत सिद्धांत के साथ काम करने का हमें प्रण लेना है।
नए संसद भवन की खासियतें –
नए संसद भवन को शास्त्री भवन के पास की खाली जमीन पर बनाया जाएगा नया संसद भवन का निर्माण करीब 64500 वर्गमीटर जमीन पर होगा नई संसद पुरानी संसद से 17 हजार वर्गमीटर बड़ी है और इसे बनाने में करीब 971 करोड़ रूपए की लागत आएगी मौजूदा पार्लियामेंट हाउस बिल्डिंग का निर्माण आजादी से कई साल पहले 1911 में शुरू हुआ था और आखिरकार इसके 20 साल बाद यानि 1927 में इसका उद्घाटन हुआ था 100 साल से भी ज़्यादा वक्त से खड़े संसद भवन के नवनिर्माण या इसकी जगह नई इमारत बनाने की मांग सालों से की जा रही थी।
नया संसद भवन अत्याधुनिक, तकनीकी सुविधाओं से युक्त होगा सोलर सिस्टम से ऊर्जा बचत भी होगी नई लोकसभा मौजूदा आकार से तीन गुना बड़ी होगी और राज्यसभा के आकार में भी वृद्धि की गई है ये नया संसद भवन ना केवल पुराने भवन से बड़ा होगा बल्कि इसका आकार भी गोल ना होकर त्रिभुज के जैसा होगा लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर यानी संसद को आज तक हम बाहर से ऐसी गोलाकार इमारत और उसके खंभों से पहचानते आए हैं करीब 100 साल पुराने इस भवन को अब एक नया रंग रूप मिलने जा रहा है।

अजय दुबे ने मीरा भायंदर के लोगों को किया जागरूक।।रिपोर्ट रवि यादव

अजय दुबे ने मीरा भायंदर के लोगों को किया जागरूक।।रिपोर्ट रवि यादव



भायंदर: फाउंडर ऑफ मीरा भायंदर प्रॉपर्टी डीलर एसोसिएशन के संस्थापक डॉ अजय लक्ष्मी कांत दुबे ने मीरा भायंदर के नागरिकों को पंपलेट बांटकर उन्हें कई तरह के अपराधों से बचने तथा कानून की मदद करने की अपील की है। किराए पर घर देने वालों से उन्होंने अनिवार्य रूप से किराए पर रहने वाले व्यक्ति का पुलिस वेरिफिकेशन कराने, सेफ इंडिया सोसाइटी की मदद लेने, झूठी जानकारी देकर दूसरों को ठगने वाले से बचकर रहने, दूसरे स्थानों पर अपराध करके पनाह मांगने वालों की जानकारी पुलिस को देने की अपील की है। डॉ अजय दुबे ने बच्चा चोरी के इरादे से शहर में आए लोगों के बारे में भी पुलिस को जानकारी देने की अपील की है।

समीक्षा:-फिल्म “लफड़ा” आखिरकार यूट्यूब पर प्रदर्शित हुई आते ही उसने दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ कहानी से ऐसा जोड़ा के कई लोग फिल्म देखकर भावुक ही नही हुए बल्कि कई तो रोने भी लगे।

‘ लफड़ा ‘ फ़िल्म में प्यार की सजा मौत …

पिता – पुत्र के रिश्ते में बनावट नही होती : विकास बालियान



दिल्ली । राजलक्ष्मी बैनर तले बनी फ़िल्म ‘ लफड़ा ‘ और यूट्यूब के ‘ धाकड़ वर्ल्ड ‘ चैनल पर रिलीज की गई। यह फिल्म कई प्रकार से दर्शकों को रोमांचित करती रही। फ़िल्म ने कभी गुदगुदाया गया तो दर्शकों की आंखे गीली भी हुई । फिल्म “लफड़ा” आखिरकार यूट्यूब पर प्रदर्शित हुई आते ही उसने दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ कहानी से ऐसा जोड़ा के कई लोग फिल्म देखकर भावुक ही नही हुए बल्कि कई तो रोने भी लगे।

अब तक प्रोडक्शन देखने वाले मोनू धनकड़ ने बहुत ही शानदार अभिनय किया है। उनके द्वारा की गई पागल की भूमिका बिल्कुल जीवंत है। उनके चेहरे के हाव भाव संवाद से दर्शक कई बार हिल जाता है।
और अभिनेत्री के किरदार में पायल भी बेपनाह प्यार करती हैं लेकिन फ़िल्म में प्यार का मतलब धोखा नही प्यार दिखाया गया हैं । अभिनेत्री किरदार निभा रही रूबीना व अभिनेता का किरदार निभा रहे मोनू को देखते ही देखते आपस मे प्यार हो जाता हैं । जब परिजनों को इस बात का पता चलता हैं तो रुबीना को प्यार की सजा मौत मिलती हैं ।

आपको बता दे कि मोनू , रुबीना के प्यार तड़पता फिरता हैं । जब रुबीना कहि दिखाई नही देती तो मोनू आपने प्यार से मिलने के लिए उनके घर पर ही पहुँच जाता हैं । लेकिन रुबीना के भाइयो द्वारा मोनू को मारने के इरादे से सिर में डंडा मार देते हैं और उनके घर के सामने फेंक देते हैं लेकिन वह मरता नही हाँ वह रूबीना के प्यार में पागल हो जाता हैं अपनी यादगार भूल जाता हैं ।

फिल्म में मुजफ्फरनगर के सुपर स्टार अभिनेता विकास बालियान एक बार फिर अपनी दमदार और धाकड़ पिता की भूमिका में अपने किरदार से न्याय करते नजर आए हैं। फिल्म में जहां “ऑनर किलिंग” को दिखाया गया तो वही जल्दबाजी में लिए गए निर्णय से परिवार किस तरह खत्म हो जाते हैं यह भी प्रदर्शित किया गया। जल्दबाजी में कोई भी निर्णय लेना गलत है और से कितना नुकसान होता है यह फिल्म का एक बड़ा संदेश था। फ़िल्म में ये भी दिखाया गया की पिता पुत्र का रिश्ता ऐसा है जिसमें दिखावट नहीं होती, दोनों एक दूसरे के प्रति समर्पित तो होते हैं परन्तु अपने भावो को कभी एक दूसरे को प्रदर्शित नही कर पाते।

फ़िल्म में मां की भूमिका में संतोष जांगरा ने जबरदस्त कमाल किया खासकर पति की मृत्यु के बाद गुमसुम सी महिला की भूमिका में तो उन्होंने लोगों को रोने को मजबूर कर दिया।

फ़िल्म ‘ लफड़ा ‘ की कहानी विवेक शर्मा ने एक – एक डायलॉग में जो दर्द बयां किया हैं , वह दिल और दिमाग को झकझोर – कर रख देने वाले हैं । फ़िल्म में दर्शया भी गया हैं कि परिवार में रहन – सहन कैसे होता हैं और बच्चो की परवरिश कैसे की जाती हैं ।

गीतों के बोल राजीव अजनबक ने लिखे ।फिल्म के लोगों की जुबान पर चढ़ चुके एक मात्र गीत ‘तेरे सिवा रब से दुआ क्या मांगू… तू ही ना मिले तो बता क्या मांगू…’ को राजू मलिक ने अपने स्वर दिए।
लफड़ा फिल्म का हरियाणवी-देहाती फिल्म धाकड़ वर्ल्ड प्रोडक्शन से जुड़े लोगों ने काफी प्रचार – प्रसार किया था और कई मंत्रियों ने भी इसके पोस्टर को लांच किया था। यह फिल्म में धाकड़ छोरा उत्तर कुमार का हालांकि रोल कम है और वह मेहमान कलाकर के तौर पर दिखाई दिए परंतु फिल्म का ताना बाना उन्ही के इर्द – गिर्द है हैं।

राजीव सिरोही ने एक कट्टर मुस्लिम जमालुद्दीन की भूमिका को जबरदस्त तरीके से जिया। उन्होंने जमालुद्दीन के किरदार को इस तरह उभरा के दर्शक सहभ से गए। सुरजीत सिरोही प्रिंसिपल के किरदार में जमे तो वही राजेंद्र कश्यप हमेशा की तरह दर्शकों को गुदगुदाने में कामयाब रहे। वही हीरो के दोस्त की भूमिका में दिखे अमित सहोता ने दोस्ती का फर्ज निभाकर दर्शको को बता दिया कि दोस्ती हमेशा सच्ची होती हैं और दोस्ती में कोई स्वार्थ नही होता और कॉलिज में छात्र – छात्राओं को क्या परेशानी का सामना करना पड़ता हैं और मोनू धकड़ व अमित सहोता ने अपनी लगन से उन सभी परेशानियों के डटकर सामना किया ।

2 घंटे की यह फिल्म दर्शकों को बहुत पसंद आ रही है और एक बार फिर देहाती फिल्म अपनी कहानी को लेकर दर्शकों में अपना स्थान बनाए हुए हैं। फ़िल्म पर आ रहे हैं कमेंट बता रहे हैं कि दर्शकों को फिल्म बहुत पसंद आई हैं ।


फिल्म अभिनेत्री और हरियाणा की जानी-मानी कलाकार आरजू ढिल्लों को भी पसंद किया गया, प्रिया सिंधु, सपना चौधरी, ज़िया चौधरी, वर्षा उपाध्याय सारिका भी फिल्म में अपनी अपनी भूमिका को अच्छी तरह निभाने में सफल रहे। बिजेंद्र सिंह, जेके माहुर आदि भी नजर आए। वही रतन लाल ‘जानू’, रवि मलिक, शिवांक बालियान भी फ़िल्म में दिखाई दिये।

फिल्म का निर्देशन प्रताप धामा और विवेक शर्मा ने किया। कैमरामैन रवि कुमार और पंकज तेजा रहे , एडिटिंग हरीश चन्द्रा व मेकअप मैन लकी अली रहे।

जौनपुर- राजकरन नय्यर, पुलिस अधीक्षक जनपद जौनपुर द्वारा जनपद में कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने हेतु दो क्षेत्रधिकारी के कार्य क्षेत्र में किया परिवर्तन, 02 क्षेत्राधिकारी को मिला अतिरिक्त प्रभार

जौनपुर- राजकरन नय्यर, पुलिस अधीक्षक जनपद जौनपुर द्वारा जनपद में कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने हेतु दो क्षेत्रधिकारी के कार्य क्षेत्र में किया परिवर्तन, 02 क्षेत्राधिकारी को मिला अतिरिक्त प्रभार
1. श्री जितेंद्र कुमार दूबे क्षेत्राधिकारी सदर से क्षेत्राधिकारी नगर।

2. श्री रणविजय सिंह क्षेत्राधिकारी नगर से क्षेत्राधिकारी सदर।

3. श्री विजय सिंह क्षेत्राधिकारी मछलीशहर के साथ-साथ प्रभारी अधिकारी पुलिस लाइंस, भवन, डॉग स्क्वायड, व फील्ड यूनिट।

4. श्री अंकित कुमार क्षेत्राधिकारी शाहगंज के साथ-साथ प्रभारी अधिकारी मिसिंग सेल, एएचटीयू, एसजेपीयू, एसपीसी।

इसके अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक बदलापुर देवीवर शुक्ला का स्थानांतरण निरीक्षक अपराध थाना सरपतहां किया गया।

किसान आंदोलन एवं सरकार की हठधर्मिताआत्माराम त्रिपाठी की✍🏻से

किसान आंदोलन एवं सरकार की हठधर्मिता
आत्माराम त्रिपाठी की✍🏻से


आज सियासत में किसे सही गलत समझा जाए मेरी समझ से देश हित को ही सबसे ऊपर रखा जाए। विरोध जताने के नाम पर आखिर कब तक भारत यूं ही बंद होता रहेगा 1970 से आज तक ना जाने कितने भारत बंद हुए ना जाने कितनी रैलियां निकली ना जाने कितने धरना प्रदर्शन हुए लेकिन क्या कभी एक भी बंद रैलियों प्रदर्शनों से सरकार ने फैसले बदलें हैं।
भारत बंद के बावजूद सरकार किसानों से बात करने को तैयार है इससे साफ जाहिर होता है कि सारा मामला अभी अंधेरी सुरंग में नहीं पहुंचा है।सच्चाई तो यह है कि देश के 40 50 करोड़ किसानों की दशा अत्यंत दयनीय है उन्हें टेका लगाने में भाजपा सरकार ने कोई कमी नहीं रखी है उन्हें तरह-तरह के फायदे और सुविधाएं पिछले 6 साल में वह देती रही है।लेकिन आज भी हमारा किसान दुनिया के दर्जनों देशों के किसानों की तुलना में चार 6 गुना ज्यादा गरीबी में गुजारा करता है।समर्थन मूल्य पर सिर्फ 6% किसानों को ही मिलता है 94% किसान खुले बाजार में अपना माल बेचते हैं वर्तमान किसान आंदोलन की रीढ़ समर्थन मूल्य वाला मालदार किसान ही है वही सबसे ज्यादा घबराया हुआ है।
यदि हम सभी किसानों की हालत सुधारना चाहते हैं तो भारतीय कृषि व्यवस्था को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाना बहुत जरूरी है।यदुवंश समर्थन मूल्य की सरकारी खरीद पर ही निर्भर रहेगी तो उसका पिछड़ापन हमेशा बरकरार ही रहेगा समर्थन मूल्य की नींद अभी कुछ वर्षों तक चलाए रखना जरूरी है लेकिन हमारे वह किसान आदर्श होने चाहिए जो खुले बाजार में अपनी उपज अनाज सब्जियां और फल बेचते हैं वह अवस्था में ज्यादा पैसा कमाते हैं कम जमीन कम पानी और कम खाद में अपनी फसलें उगाते हैं। भारत में अनाज और सब्जियों और फलों की पैदावार कई गुना बढ़ सकती है और भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य निर्यातक राष्ट्र बन सकता है ।सरकार की यह भूल तो हुई है उसने तीनों क्रषि कानून बनाने के पहले ना तो किसानों से उचित परामर्श किया और ना ही उन्हें उनके फायदे समझाए लेकिन अभी बीच का रास्ता निकालना मुश्किल नहीं है।
भारत बंद के आवाहन पर पहले भी कई बार हुए हैं लेकिन किसानों की मांगों को लेकर यह भारत बंद शायद पहली बार घोषित हुआ है इस घोषणा पर कितना भारत बंद रहा इस पर लोगों की अलग-अलग राय हो सकती है लेकिन यह तो स्पष्ट ही है कि भारत बंद तभी माना जाता है जब वह शहरों में दिखाई पड़े। गांव बंद है या खुला रहे उससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता शहर जब सुनसान दिखाई पड़ते हैं और बाजार खाली रहते हैं तब बंद को सफल माना जाता है लेकिन किसानों का यह बंद अब राजनीति का फुटबॉल बनकर रह गया है देश के भाजपा शासित प्रांतों में इसे विफल और विरोधी प्रांतों में इसे सफल दिखाने की पूरी कोशिश की गई।
इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि देश के वे राजनीतिक दल और नेता भी उन क्रश कानूनों का आंख मीच का विरोध कर रहे हैं जो कल तक उसी तरह के सुझाव दिया करते थे और अपने चुनावी घोषणा पत्रों में उसी तरह के कानून बनाने के उपाय दे किया करते थे इसका अर्थ यह नहीं कि ये तीनों प्लस कानून निरापद है और इनमें सुधार की गुंजाइश नहीं है इनमें सुधार की जरूरत निश्चय ही है लेकिन जो पार्टियां और नेता आज आंदोलन की बैलगाड़ी पर सवार होना चाह रहे हैं उन्होंने अपनी असली हैसियत को उजागर कर दिया है।
इस किसान आंदोलन की इस बात के लिए तारीफ करनी होगी कि उसने राजनेताओं को अपने मंच पर बैठने की जगह नहीं थी लेकिन असर है कि जब 9 दिसंबर को फिर से सरकार और किसान नेताओं का सम्मान तय हो गया था तो 8 दिसंबर को भारत बंद का नारा क्यों दिया गया हो सकता है कि किसान नेताओं को कुछ विघ्न संतोषी राजनेता गुपचुप प्रेरित कर रहे हो या किसान नेता वार्ता के पहले सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं किसानों का यह आंदोलन इसलिए भी प्रशंसनीय हैं कि पूरे देश में उन्होंने कहीं भी तोड़फोड़ या हिंसा का सहारा नहीं लिया कुछ शहरों में जो हाथापाई और धक्का-मुक्की की घटनाएं घटी हैं वह भी प्रतिस्पर्धी राजनीतिक दलों के बीच घटी है इसी बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नजरबंदी और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की गिरफ्तारी भी अनावश्यक प्रतीत होती है।
हर बात इस भारत बंद की तो बंद असल में विरोध प्रदर्शन नहीं सियासी शख्स प्रदर्शन भी है इसमें राजनीति से ज्यादा भूगोल का बड़ी भूमिका होती है क्योंकि जिन के विरोध में बंद है उनकी सत्ता जिन राज्यों में होती है वह बंद कभी सफल होता ही नहीं है यही वजह है कि अगले दिन अखबारों में यही छपता है बंद का मिलाजुला असर गुजरात में जिस तरह मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर किसानों के बंद को गैरकानूनी बताया प्रदर्शन में शामिल होने वालों पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए वह यह साबित करते हैं कि भाजपा इसका राजनैतिक श्रेय किसी को लेने नहीं देना चाहती सरकार किसानों के आंदोलन को राजनीतिक प्रेरित बता रही है। अगर यह राजनीतिक प्रेरित है केंद्र के मंत्री क्यों किसानों से बातें कर रहे हैं क्यों उनके चक्कर काट रहे हैं दरअसल भाजपा किसानों के आंदोलन को राजनीतिक आंदोलन साबित करना चाहती है किसान पिछले 11 दिनों से सड़कों पर बैठे हैं ठंड की मार झेल रहे हैं जैसा कि कुछ अखबारों के जरिए जानकारी मिली कि कुछ किसान ठंड से काल कावलित भी हो गए हैं। ऐसे में सरकार का दायित्व और बढ़ जाता है कि वह जिनके लिए वह कानून लाई है अगर वह भी इससे सहमत नहीं है तो आखिर वह क्यों इस पर अड़ी हुई है। सरकार जनता के लिए होती है तो उसे जनता की सुनना भी चाहिए अपने फैसलों के खिलाफ होने वाले विरोध प्रदर्शनों को राजनीतिक चाले बताने की कोशिश अब बंद होनी चाहिए बेहतर हो केंद्र सरकार सोलन का रास्ता निकाले क्योंकि कोरोनावायरस पिछले 10 महीने से रूकी रफ्तार इन धारणा प्रदर्शनों बंद की भेंट नहीं चलना चाहिए देश को अब पुरानी रफ्तार पकड़ना है उसे फिर से दौड़ना है तो देश की राजधानी में बंद पड़े रास्ते खोलने होंगे बंद की राजनीति से देश को मुक्त होना होगा संविधान ने विरोध का अधिकार दिया है लेकिन विरोध में पूरे देश को ठप कर देना उचित नहीं है। इसके बिपरीत सरकार को भी अपनी हठधर्मिता को छोड़कर किसानों की समास्या को उनकी समास्याओं को उनके चिंता,शंका को दूर करने के लिए आगे आना चाहिए नकी विरोधाभासी बयान देकर किसानों के शक को दूर करने के बजाय उसे मजबूती प्रदान करना चाहिए।आज अगर किसान इस स्थिति में पहुंचा है तो उसके लिए जिम्मेदार भी सरकार ही है।

मानवाधिकार दिवस पर विशेषमानवाधिकार का सौंदर्य है परस्पर प्रेम एवं आत्मीयता• प्रमोद दीक्षित मलय

मानवाधिकार दिवस पर विशेष
मानवाधिकार का सौंदर्य है परस्पर प्रेम एवं आत्मीयता
• प्रमोद दीक्षित मलय



मनुष्य एक शिशु के रूप में जन्म लेता है और शिशु को जन्म लेते ही मानव के रूप में गरिमामय जीवन जीने का अधिकार प्राकृतिक रूप से प्राप्त हो जाता है। प्रत्येक मानव के लिए स्वतंत्रता, समानता और सम्मान के अधिकार के साथ जीवन में आगे बढ़ने और समाज जीवन के किसी भी क्षेत्र में काम करने एवं आगे बढ़ने हेतु भयरहित निर्बाध खुला मार्ग उपलब्ध है। किसी भी मानव प्राणी के साथ नस्ल, लिंग, जाति, भाषा, धर्म, विचार, जन्म, रंग, क्षेत्र एवं देश के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 10 दिसंबर, 1948 को विश्व मानवाधिकार घोषणा पत्र जारी कर मानव अधिकारों की रक्षा कर मानव मूल्यों एवं आदर्शों के संरक्षण पर बल दिया। वर्ष 1950 से संयुक्त राष्ट्र से सम्बद्ध देशों द्वारा मानवाधिकार दिवस को मनाने एवं प्रचार प्रसार करने हेतु सतत् प्रयास सराहनीय हैं। प्रत्येक वर्ष 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस मना कर संपूर्ण विश्व में मानव अधिकारों के प्रति सजगता और जागरूकता का प्रचार-प्रसार करते हुए मानवता के विरुद्ध हो रहे जुल्म एवं अत्याचारों को रोकने और उसके विरुद्ध आवाज उठाने, खड़े होने और संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया जाता है। भारत में मानवाधिकार बहुत विलंब से लागू हुए। 28 सितंबर 1993 को मानवाधिकार कानून बनाया गया जिसके आलोक में 12 अक्टूबर 1993 को सरकार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन कर नागरिकों के हितों एवं अधिकारों की सुरक्षा हेतु पहल की।
मानवाधिकारों का वर्तमान वितान भले ही आकर्षक एवं चेतना युक्त दिखाई पड़ रहा हो पर मानव इतिहास तो क्रूरता, कुभाव, कलुषता, हिंसा, रुदन और अत्याचार से भरा हुआ है। इतिहास के पन्ने मनुष्य के रक्त से भींगे हैं और उसके शोषण की गाथा से भरे हुए भी। मानव जीवन की इस यात्रा में ऐसे हजारों चित्र अंकित हैं जहां मानवता शर्मसार होती दिखाई देती है, जहां मनुष्य द्वारा ही मनुष्य को एक जानवर की भांति उपयोग और उपभोग की वस्तु बना दिया गया हो, जहां वह वस्तु की भांति बेचा और खरीदा गया हो, जहां उसकी सांसों के स्पंदन पर नियंत्रण उसके मालिक का रहा हो। समृद्ध वर्ग द्वारा निर्धन व्यक्तियों के प्रति यह बर्ताव युगों-युगों से पूरी दुनिया में जारी रहा है। एशिया, अफ्रीका, अमेरिका एवं यूरोपीय देशों में अमानवीय दास प्रथा को उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। जो सभ्यताएं तलवार एवं छल-प्रलोभन के बल पर बढ़ीं वहां दास प्रथा को बढ़ावा और प्रश्रय मिला। युद्धबंदी, सामूहिक अपहरण और संगठित दास बाजार के उदाहरण इतिहास के पृष्ठों में दर्ज हैं। तभी मनुष्य की स्वतंत्रता तो अमरीकी आजादी के संघर्ष का नारा ही था। भारत भी इस अमानवीय प्रथा से अलग नहीं रहा। बंधुआ मजदूरों के रूप में मानव का एक बड़ा वर्ग पीढ़ी दर पीढ़ी अमानवीय एवं अपमानजनक जीवन जीने को अभिशप्त रहा है। पर 1975 में एक कानून बनाकर बंधुआ मजदूरी को संज्ञेय दंडनीय अपराध घोषित कर देने से हजारों मनुष्यों को इस नारकीय जीवन ये मुक्ति मिली। विश्व में बाल मजदूरी को भी इसी पंक्ति में रखा जा सकता है। पर आज भी कम साक्षरता वाले राज्यों में अक्सर मानवाधिकार हनन की घटनाएं यथा पुलिस प्रताड़ना, झूठे केस में फंसाने एवं निर्दयता से मारने आदि प्रकाश में आती रहती हैं। इतना ही नहीं संपूर्ण विश्व में नारी गौरव, अस्मिता एवं अस्तित्व को हाशिए पर रखा गया है।
आधुनिक युग में दृष्टिपात करें तो मनुष्य एवं कतिपय देशों की साम्राज्यवादी नीति ने लाखों निर्दोष मनुष्य के लहू से वसुधा को रक्तिम किया है। प्रथम विश्व युद्ध से ही ये प्रश्न वैश्विक विचार फलक पर उभरने लगे कि एक मानव के रूप में उसके क्या अधिकार हैं। द्वितीय विश्व युद्ध में लाखों नागरिकों की हत्या से इन प्रश्नों की स्याही और गहरी हुई। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे में धर्मांधता की आग में लाखों जीवन झुलस गए और और नारी अस्मिता तार-तार हुई। पूरे विश्व में महिलाओं के श्रम के शोषण था और कुछ देशों में मतदान के अधिकार से वंचित भी। इन तमाम संदर्भों के धरातल पर तब संयुक्त राष्ट्र संघ में मानवाधिकारों पर न केवल चर्चा-परिचर्चा करके एक रास्ता खोजने की पहल की गई बल्कि सर्वसम्मति से मानवाधिकारों का एक घोषणा पत्र भी जारी हुआ। इस वैश्विक घोषणा पत्र में प्रत्येक व्यक्ति को गरिमामय स्वतंत्र जीवन जीने की सुरक्षा का अधिकार मिला। मनुष्य की मनुष्य द्वारा की जा रही दासता से मुक्ति का उजास भरा पथ मिला। यातना, पीड़ा, क्रूरता से आजादी और एक मानव के रूप में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में समानता का भी अधिकार प्राप्त हुआ। और यह भी कि किसी भी राज्य-सत्ता द्वारा किसी भी व्यक्ति की मनमाने ढंग से गिरफ्तारी करने, हिरासत में रखने और देश से निर्वासन पर अंकुश लगा गैरकानूनी बना दिया गया। जब तक अदालत द्वारा आरोपी पर दोष सिद्ध न हो जाए तब तक उसे निर्दोष होने का अधिकार भी प्रदत्त है। घर, परिवार एवं पत्राचार में निजता की उपेक्षा कोई नहीं कर सकता। इसके साथ ही कोई भी व्यक्ति अपने देश के अंदर एवं अन्य किसी भी देश में भ्रमण करने, अपने देश की नागरिकता त्यागने एवं अन्य देश की नागरिकता ग्रहण करने और किसी भी देश में राजनीतिक शरण पाने का (गैर-राजनीतिक अपराध को छोड़कर) अधिकार रखता है। एक मनुष्य के रूप में वह धर्म, वर्ग, जाति, उपासना पद्धति से परे अपनी पसंद से किसी भी मनुष्य से शादी करने एवं परिवार बढ़ाने का अधिकार रखता है। वह अपनी समझ विकसित करने एवं कला-कौशल वृद्धि हेतु शिक्षा प्राप्त करने एवं साहित्य, संगीत, नृत्य आदि ललित कलाएं सीखने-रचने का अधिकार रखते हुए वह सांस्कृतिक एवं बौद्धिक संपदा के संरक्षण का भी कानूनन अधिकारी है। अब स्त्री-पुरुष लैंगिक भेदभाव से मुक्त हो लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनकर समानरूप से विकास पथ पर अग्रसर हुए।
वास्तव में यह दुनिया एक सुंदर सुवासित उपवन है जिसमें मानव रूपी विविधवर्णी मनमोहक पुष्प शोभायमान हैं। इसका सौंदर्य एकात्मता में है अलगाव एवं विभेद में नहीं। शक्ति समुच्चय से ही समृद्धि के संकल्प की सिद्धि है और रिद्धि की प्राप्ति भी। मानवीय योग-क्षेम की कुशलता का आधार परस्पर सहकार, सख्य, सौम्यता, सामंजस्य, शुचिता एवं सहानुभूति हैं न कि अमैत्री, अशौच, विषमता, द्वैष एवं घृणा। परस्पर सहयोग से ही जीवन-घट आनंद रस से परिपूर्ण है। हम संपूर्ण दुनिया में आनंद रस वर्षण करें, अमिय स्नेह बांटें जहां देश की संकीर्ण सीमाएं न हों और न हों रंग, नस्ल, पंथ की क्षुद्र बंधन। हम प्रीति-आत्मीयता का गुलाल मुट्ठियों में भर उड़ाते रहें जिससे हर मानव मन दैवीय संपदा से समृद्ध एवं सुगंधित हो और करुणा, ममता, समरसता, संवेदना एवं समताभाव से ओतप्रोत भी। हम अपनी वैचारिक साम्य संपदा से संपूर्ण विश्व को मानवीय गरिमा से आलोकित, अलंकृत एवं आभामय कर सकें, तभी इस दिवस को मनाने की सार्थकता सिद्ध होगी।
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सम्प्रति – लेखक भाषा शिक्षक हैं और विद्यालयों को आनन्दघर बनाने के अभियान पर काम कर रहे हैं।
सम्पर्क – बाँदा, (उ0प्र0)
मोबा: 94520-85234

घर और दुकानें गिरवी रख कर सोनू सूद कर रहे हैं जरूरतमंदों की मदद, लिया है 10 करोड़ का लोन10 करोड़ रुपये जुटाने के लिए सोनू ने मुंबई के जुहू स्थित अपनी 8 प्रोपर्टी को गिरवी रखा. @Abplive

घर और दुकानें गिरवी रख कर सोनू सूद कर रहे हैं जरूरतमंदों की मदद, लिया है 10 करोड़ का लोन
10 करोड़ रुपये जुटाने के लिए सोनू ने मुंबई के जुहू स्थित अपनी 8 प्रोपर्टी को गिरवी रखा.
सोनू ने मुंबई के जुहू इलाके में स्थित अपनी दो दुकान और 6 फ़्लैट को गिरवी रखे हैं.
एबीपी न्यूज़
Last Updated: 09 Dec 2020 10:40 AM (IST)
घर और दुकानें गिरवी रख कर सोनू सूद कर रहे हैं जरूरतमंदों की मदद, लिया है 10 करोड़ का लोन
बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद को यूं गरीबों का मसीहा नहीं कहा जाता है. महामारी के दौरान हजारों लोगों की मदद करने वाले सोनू सूद ने जरूरतमंदों के लिए अपनी प्रॉपर्टी गिरवी तक रख दी. अकसर सोशल मीडिया पर इस तरह से सवाल देखने को मिलते हैं कि आखिर सोनू सूद जितना पैसे बांटने का ऐलान सोशल मीडिया पर करते हैं वो उनता पैसा लाते कहां से हैं. वहीं अब रिपोर्ट्स के अनुसार बताया जा रहा है कि प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने और उनके खाने-पीने की व्यवस्था करने, लोगों के रहने के लिए घर बनवाने, बच्चों के लिए शिक्षा का प्रबंध करने और बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराने और गरीबों का इलाज कराने वाले सोनू ने ये सब अपनी 8 प्रोपर्टी गिरवी रखकर किया.


जी हां, सोनू सूद ने जरूरतमंदों की मदद करने के लिए अपनी आठ प्रोपर्टी गिरवी रखी है. इससे उन्होंने 10 करोड़ रुपये जमा किए और अब खुले दिल से सभी की मदद को आगे आ रहे हैं. खबरों की मानें तो, 10 करोड़ रुपये जुटाने के लिए सोनू ने मुंबई के जुहू इलाके में स्थित अपनी 8 प्रोपर्टी को गिरवी रखी हैं.


वेब पोर्टल मनीकंट्रोल के पास उपलब्ध रजिस्ट्रेशन डॉक्यूमेंट के अनुसार सोनू ने मुंबई के जुहू इलाके में स्थित अपनी दो दुकान और 6 फ़्लैट को गिरवी रखे हैं. ये दोनों दुकानें ग्राउंड फ़्लोर पर हैं और फ़्लैट्स शिव सागर कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में है. ये हाउसिंग सोसायटी इस्कॉन मंदिर के पास एबी नायर रोड पर स्थित है.






इस रिपोर्ट के अनुसार बताया जा रहा है कि सोनू को उनकी 8 प्रोपर्टी के अंगेस्ट 10 करोड़ रु का लोन बैंक ने दिया है. दस्तावेजों के अनुसार सोनू ने 10 करोड़ रुपये के लोन पर 5 लाख रुपये के पंजीकरण शुल्क का भुगतान किया गया है. ये प्रोपर्टिज सोनू के साथ उनकी पत्नी सोनाली के नाम भी हैं जिन्हें बैंक के पास गिरवी रखा गया है. हालांकि इस खबर की जानकारी सोनू की ओर से कहीं भी नहीं दी गई.