धरती पुत्र और सरकार के मध्य बना भ्रम कब तक भ्रम बरककार रहेगा ?आत्माराम त्रिपाठी की ✍🏻से

धरती पुत्र और सरकार के मध्य बना भ्रम कब तक भ्रम बरककार रहेगा ?
आत्माराम त्रिपाठी की ✍🏻से


तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए चल रहे किसान आंदोलन ने भारत बंद भी करा लिया बावजूद इसके समाधान के आसार नहीं दिख रहे हैं।
किसानों की मांग है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य नियम एमएसपी को कानूनी अधिकार बनाएं जिससे कोई भी ट्रेडर या खरीददार किसानों से उनके उत्पाद को कम दाम पर न खरीद पाए फिर भी कोई ऐसा करता है तो उस पर कार्रवाई हो एमएसपी और मंडियों की स्थापित व्यवस्था को खत्म होने का फायदा केवल खरीददारों को होगा जो बड़े लोग भी हो सकते हैं। इससे किसान इन्हीं के रहमों करम पर बंधुवा मजदूर शरीके मजबूर हो जाएंगे। जबकि सरकार की सफाई है कि कानून किसानों को एक खुला बाजार देता है जहां वह अपनी मनमर्जी के कृषि उत्पाद बेच सकें हालांकि सरकार का कहना है कि एमएसपी खत्म नहीं की जा रही है और मंडिया भी पहले की तरह काम करती रहेंगी। लेकिन किसान इस पर आशंकित है किसानों का दूसरा विरोध कांट्रैक्ट फार्मिंग के जरिए अनुबंध से खेती को बढ़ावा देने के लिए बने राष्ट्रीय फ्रेमवर्क पर है इसमें किसान और खरीददार के बीच समझौता होगा और किसान ट्रेडर या खरीददार को एक पूर्व निर्धारित कीमत उपज बेचेगा जिसमें कृषि उत्पाद की गुणवत्ता ग्रेड और स्टैंडर्ड भी पहले ही तय होगा इसमें नियमों के तहत फसलों की बुवाई से पहले कंपनियां किसानों का अनाज एक संविदा के तहत तैमूल्य पर खरीदने का वादा करेगी क्या उठ जाना है यह भी उसी में तय होगा साथ ही उपज बाजार की जरूरत और मांग के हिसाब से होगी मतलब कंपनियों के आगे किसान मजबूर होगा क्योंकि किसान की फसल तैयार होगी तो कंपनियां कुछ समय इंतजार करने को कहा बाद में उत्पाद को खराब बता अमान्य बता कर नया मोल भाव भी कर शकती है ।तीसरा कानून है आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम यानी ईसीए इसमें अनाज दलहन तिलहन खाद्य तेल यहां तक कि प्याज और आलू टमाटर को भी आवश्यक वस्तु की सूची से हटा दिया गया किसान इसे दोधारी तलवार मान रहे हैं। क्योंकि निजी खरीददारों द्वारा इन वस्तुओं के भंडारण या जमा करने पर सरकार का नियंत्रण नहीं होगा इसमें बड़े पैमाने पर थोक खरीद या जमाखोरी के कारण जरूरी जिंसों के दाम बढ़ेंगे जिसके दो प्रतिकूल प्रभाव भी संभव है पहला ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर बढ़ेगी नतीजा गरीबी बढ़ेगी और दूसरा सरकारी राशन दुकानों के लिए खरीद की लागत बढ़ेगी आलू प्याज के आसमान छूते दाम सामने है अब किसान ही सस्ता बेच कर इन्हें महंगे दामों पर खरीदने को मजबूर है यानी गरीब एवं मध्यम वर्ग को नुकसान होने की पूर्ण संभावना है। किसानों की आशंकाएं वाजिब है भले ही यह कानून कागजों में प्रगतिशील लगी लेकिन बहुत दूर की सोच के साथ किए गए दिखते हैं निश्चित रूप में से इनसे जैसा कि किसानों का आरोप है और आंदोलन की वजह है कि उन्हें जमाखोरों व्यापारियों कार्बोरेटर मल्टीनैशनल कंपनियों के रहमों करम पर छोड़ा जा रहा है जो आखिर अन्नदाता विरोधी ही साबित होंगे।
दरअसल आंदोलन में मुख्य पेच न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी की कानूनी गारंटी को लेकर बना हुआ है एमएसपी के सवाल पर आंदोलनकारी किसान संगठन ही नहीं बल्कि संघ के अनुषांगिक संगठन भी सरकार के खिलाफ है हालांकि इस मांग से जुड़ी जटिलताओं के कारण सरकार पूरी तरह असमंजस में है अगर एमएसपी की कानूनी गारंटी की घोषणा कर दी जाए तो तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग संबंधी स्वर धीमें हो सकते हैं। क्योंकि सरकार पहले से ही इन कानूनों के कई प्रावधानों में संशोधन के लिए तैयार मसलन सरकार किसानों को सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाने या एनएसआर क्षेत्र से जुड़े नए प्रदूषण कानून में बदलाव करने निजी खरीददारों के लिए पंजीयन अनिवार्य करने और छोटे किसानों के हितों की रक्षा के प्रावधानों में जरूरी बदलाव के लिए तैयार है।
आजादी के बाद से ही सरकारें किसान और ग्राहकों के बीच सीधा संबंध स्थापित करने में नाकाम रही है इसके कारण ग्राहकों को तो ज्यादा कीमत चुकानी पड़ी मगर ग्राहक के द्वारा चुकाई गई रकम का मामूली हिस्सा ही किसानों की जेब तक पहुंचा मसलन ग्राहकों ने कई बार किसान द्वारा भेजी गई रकम से 4 से 5 गुना अधिक कीमत चुकाई कृषि क्षेत्र का मुनाफा बिचौलियों की भेंट चढ़ता रहा आजादी के 7 दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सरकारें किसानों को आगे बढ़ाने में नाकाम रही सरकार का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने की है एमएसपी को सरकार कानूनी तो बना देगी मगर निजी क्षेत्र को खरीदारी के लिए बात नहीं कर पाएगी ऐसे में अगर फसल की मांग कम हुई खरीदारी करेंगे ही नहीं सरकार एक सीमा तक ही एमएसपी के तहत खरीदारी कर सकती है सरकार औसतन कुल उपज का छह फीसदी की ही खरीदी करती है वर्तमान व्यवस्था सहित कई ऐसे कारण है जिसके चलते सरकार बहुत अधिक मात्रा में अनाज नहीं खरीदी किसी एक फसल की अधिक उपज होने के बाद उसकी मांग में कमी आएगी सरकार 1 सीमा से अधिक नहीं खरीदेगी इसके बाद एमएसपी से कम कीमत पर खरीद गैरकानूनी होने पर निजी क्षेत्र खरीदारी प्रक्रिया से नहीं जुड़ेंगे ऐसे में किसानों का क्या करेगा ?बड़ा सवाल करने का भी है ! एमएसपी के दायरे में आने वाली फसलों की अलग-अलग गुणवत्ता होती है गुणवक्ता के हिसाब से एक फसल का अलग अलग अलग मानक तय करते हुए अलग-अलग एमएसपी तय करनी होगी ।मानकों पर खरा नहीं उतरने वालों का क्या होगा उसकी कोशिश थी अपनी सूझबूझ से फसलों की खेती कराएंगे जिनकी भविष्य में मांग ज्यादा होने की संभावना रहेगी।

धरती पुत्र और सरकार के मध्य बना भ्रम कब तक भ्रम बरककार रहेगा ?आत्माराम त्रिपाठी की ✍🏻से

धरती पुत्र और सरकार के मध्य बना भ्रम कब तक भ्रम बरककार रहेगा ?
आत्माराम त्रिपाठी की ✍🏻से


तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए चल रहे किसान आंदोलन ने भारत बंद भी करा लिया बावजूद इसके समाधान के आसार नहीं दिख रहे हैं।
किसानों की मांग है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य नियम एमएसपी को कानूनी अधिकार बनाएं जिससे कोई भी ट्रेडर या खरीददार किसानों से उनके उत्पाद को कम दाम पर न खरीद पाए फिर भी कोई ऐसा करता है तो उस पर कार्रवाई हो एमएसपी और मंडियों की स्थापित व्यवस्था को खत्म होने का फायदा केवल खरीददारों को होगा जो बड़े लोग भी हो सकते हैं। इससे किसान इन्हीं के रहमों करम पर बंधुवा मजदूर शरीके मजबूर हो जाएंगे। जबकि सरकार की सफाई है कि कानून किसानों को एक खुला बाजार देता है जहां वह अपनी मनमर्जी के कृषि उत्पाद बेच सकें हालांकि सरकार का कहना है कि एमएसपी खत्म नहीं की जा रही है और मंडिया भी पहले की तरह काम करती रहेंगी। लेकिन किसान इस पर आशंकित है किसानों का दूसरा विरोध कांट्रैक्ट फार्मिंग के जरिए अनुबंध से खेती को बढ़ावा देने के लिए बने राष्ट्रीय फ्रेमवर्क पर है इसमें किसान और खरीददार के बीच समझौता होगा और किसान ट्रेडर या खरीददार को एक पूर्व निर्धारित कीमत उपज बेचेगा जिसमें कृषि उत्पाद की गुणवत्ता ग्रेड और स्टैंडर्ड भी पहले ही तय होगा इसमें नियमों के तहत फसलों की बुवाई से पहले कंपनियां किसानों का अनाज एक संविदा के तहत तैमूल्य पर खरीदने का वादा करेगी क्या उठ जाना है यह भी उसी में तय होगा साथ ही उपज बाजार की जरूरत और मांग के हिसाब से होगी मतलब कंपनियों के आगे किसान मजबूर होगा क्योंकि किसान की फसल तैयार होगी तो कंपनियां कुछ समय इंतजार करने को कहा बाद में उत्पाद को खराब बता अमान्य बता कर नया मोल भाव भी कर शकती है ।तीसरा कानून है आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम यानी ईसीए इसमें अनाज दलहन तिलहन खाद्य तेल यहां तक कि प्याज और आलू टमाटर को भी आवश्यक वस्तु की सूची से हटा दिया गया किसान इसे दोधारी तलवार मान रहे हैं। क्योंकि निजी खरीददारों द्वारा इन वस्तुओं के भंडारण या जमा करने पर सरकार का नियंत्रण नहीं होगा इसमें बड़े पैमाने पर थोक खरीद या जमाखोरी के कारण जरूरी जिंसों के दाम बढ़ेंगे जिसके दो प्रतिकूल प्रभाव भी संभव है पहला ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर बढ़ेगी नतीजा गरीबी बढ़ेगी और दूसरा सरकारी राशन दुकानों के लिए खरीद की लागत बढ़ेगी आलू प्याज के आसमान छूते दाम सामने है अब किसान ही सस्ता बेच कर इन्हें महंगे दामों पर खरीदने को मजबूर है यानी गरीब एवं मध्यम वर्ग को नुकसान होने की पूर्ण संभावना है। किसानों की आशंकाएं वाजिब है भले ही यह कानून कागजों में प्रगतिशील लगी लेकिन बहुत दूर की सोच के साथ किए गए दिखते हैं निश्चित रूप में से इनसे जैसा कि किसानों का आरोप है और आंदोलन की वजह है कि उन्हें जमाखोरों व्यापारियों कार्बोरेटर मल्टीनैशनल कंपनियों के रहमों करम पर छोड़ा जा रहा है जो आखिर अन्नदाता विरोधी ही साबित होंगे।
दरअसल आंदोलन में मुख्य पेच न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी की कानूनी गारंटी को लेकर बना हुआ है एमएसपी के सवाल पर आंदोलनकारी किसान संगठन ही नहीं बल्कि संघ के अनुषांगिक संगठन भी सरकार के खिलाफ है हालांकि इस मांग से जुड़ी जटिलताओं के कारण सरकार पूरी तरह असमंजस में है अगर एमएसपी की कानूनी गारंटी की घोषणा कर दी जाए तो तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग संबंधी स्वर धीमें हो सकते हैं। क्योंकि सरकार पहले से ही इन कानूनों के कई प्रावधानों में संशोधन के लिए तैयार मसलन सरकार किसानों को सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाने या एनएसआर क्षेत्र से जुड़े नए प्रदूषण कानून में बदलाव करने निजी खरीददारों के लिए पंजीयन अनिवार्य करने और छोटे किसानों के हितों की रक्षा के प्रावधानों में जरूरी बदलाव के लिए तैयार है।
आजादी के बाद से ही सरकारें किसान और ग्राहकों के बीच सीधा संबंध स्थापित करने में नाकाम रही है इसके कारण ग्राहकों को तो ज्यादा कीमत चुकानी पड़ी मगर ग्राहक के द्वारा चुकाई गई रकम का मामूली हिस्सा ही किसानों की जेब तक पहुंचा मसलन ग्राहकों ने कई बार किसान द्वारा भेजी गई रकम से 4 से 5 गुना अधिक कीमत चुकाई कृषि क्षेत्र का मुनाफा बिचौलियों की भेंट चढ़ता रहा आजादी के 7 दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सरकारें किसानों को आगे बढ़ाने में नाकाम रही सरकार का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने की है एमएसपी को सरकार कानूनी तो बना देगी मगर निजी क्षेत्र को खरीदारी के लिए बात नहीं कर पाएगी ऐसे में अगर फसल की मांग कम हुई खरीदारी करेंगे ही नहीं सरकार एक सीमा तक ही एमएसपी के तहत खरीदारी कर सकती है सरकार औसतन कुल उपज का छह फीसदी की ही खरीदी करती है वर्तमान व्यवस्था सहित कई ऐसे कारण है जिसके चलते सरकार बहुत अधिक मात्रा में अनाज नहीं खरीदी किसी एक फसल की अधिक उपज होने के बाद उसकी मांग में कमी आएगी सरकार 1 सीमा से अधिक नहीं खरीदेगी इसके बाद एमएसपी से कम कीमत पर खरीद गैरकानूनी होने पर निजी क्षेत्र खरीदारी प्रक्रिया से नहीं जुड़ेंगे ऐसे में किसानों का क्या करेगा ?बड़ा सवाल करने का भी है ! एमएसपी के दायरे में आने वाली फसलों की अलग-अलग गुणवत्ता होती है गुणवक्ता के हिसाब से एक फसल का अलग अलग अलग मानक तय करते हुए अलग-अलग एमएसपी तय करनी होगी ।मानकों पर खरा नहीं उतरने वालों का क्या होगा उसकी कोशिश थी अपनी सूझबूझ से फसलों की खेती कराएंगे जिनकी भविष्य में मांग ज्यादा होने की संभावना रहेगी।

विद्यालय विकास में शिक्षक और समाज की भूमिका होगी रेखांकित समाज के सहयोग से ही शालाएं विकसित होकर आनंदघर बनेंगी :- प्रमोद दीक्षित “मलय” आत्माराम त्रिपाठी की रिपोर्ट

विद्यालय विकास में शिक्षक और समाज की भूमिका होगी रेखांकित
समाज के सहयोग से ही शालाएं विकसित होकर आनंदघर बनेंगी
आत्माराम त्रिपाठी की रिपोर्ट


बांदा। प्राथमिक शिक्षा में कार्यरत शिक्षक प्रमोद दीक्षित मलय छत्तीसगढ़ के नवाचारी शिक्षकों के समूह द्वारा 13 दिसम्बर की शाम को आयोजित ई-परिचर्चा में अपने अनुभव साझा करते हुए शिक्षकों का मार्गदर्शन करेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय विद्यालय शैक्षिक मशाल को निरंतर ज्योतित किए हुए हैं। इन विद्यालयों का विकास समाज के सहयोग के बिना असम्भव है। इस सम्बंध में समझ बनाने हेतु “शासकीय शालाओं के सर्वांगीण विकास में शिक्षक और समाज की भूमिका’ विषय पर शिक्षाविद् प्रमोद दीक्षित मलय शिक्षकों के साथ होंगे। कार्यक्रम के संयोजक भागवत लाल साहू ने बताया कि हम इस कार्यक्रम ‘शैक्षिक परिचर्चा’ में प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के बेहतरीन शिक्षकों एवं शिक्षाविदों से मुलाकात करवाते हैं। उनके शैक्षिक अनुभव, उपलब्धियों को जानने के साथ ही शैक्षणिक यात्रा में आई दिक्कतों और उनके समाधान पर भी बातचीत करते हैं ताकि शिक्षक साथियों को प्रेरणा मिले और वे भी शिक्षा के क्षेत्र में सीखने-सिखाने की यात्रा का हिस्सा बनकर बच्चों का भविष्य संवार सकें।
रविवार 13 दिसम्बर की शाम ई-शैक्षिक परिचर्चा- 10 के अतिथि हैं
शिक्षाविद्, लेखक एवं संपादक प्रमोद दीक्षित ‘मलय’। आप बांदा, उत्तर प्रदेश से हैं और शिक्षा के क्षेत्र में नवल पहल के लिए जाने जाते हैं। प्रमोद दीक्षित 1998 से शिक्षक हैं। साहित्य की विभिन्न विधाओं यथा गीत, कहानी लेख, व्यंग्य, संस्मरण, जीवनी, बाल साहित्य का लगातार लेखन कर रहे हैं।
सम्प्रति शैक्षिक मुद्दों पर सतत् लेखन। आपके लेख एवं अन्य रचनाएं प्राथमिक शिक्षक, शिक्षा सारथी, शिविरा, प्रारम्भ, शैक्षिक दखल, खोजें और जानें, स्कूल शिक्षा, पुस्तक संस्कृति, राष्ट्रधर्म, राष्ट्रभाषा विस्तारिका, समाज कल्याण, किलोल, बाल किलकारी, देवपुत्र, बालवाटिका, बालवाणी आदि शताधिक पत्रिकाओं तथा दैनिक जागरण, जनसत्ता, देशबंधु, राष्ट्रीय सहारा, देशप्राण, जनवाणी, सुबह सवेरे, राष्ट्रीय खबर, जनसंदेश टाइम्स, घटती घटना, हम हिंदुस्तानी, हिंदी एब्राड, इंडियन पंच, आवाज़, असली आज़ादी, संजीवनी टूडे, प्रवासी संदेश, अश्वघोष, यूरेशिया, विजय न्यूज, स्वदेश, सच कहूं, इंदौर समाचार, दैनिक पूर्वोदय, समाज्ञा, अजीत समाचार, स्वर्ण आभा, सहजसत्ता, इलाहाबाद एक्सप्रेस, पूर्णविराम, पूर्वांचल प्रहरी, दक्षिण भारत राष्ट्रमत, इबादत, आदिकाल, प्रखर विकास, दि ग्राम टूडे आदि दो दर्जन समाचार पत्रों में नियमित लेखन। अनुभूति के स्वर, पहला दिन, महकते गीत, गिजुभाई बधेका का बालदर्शन, हाशिए पर धूप आदि पांच पुस्तकों का संपादन कर चुके हैं। आकाशवाणी छतरपुर एवं जालंधर से रचनाओं का प्रसारण। दीवार पत्रिका एवं बाल संसद के माध्यम से बच्चों में लोकतांत्रिक समझ के साथ अभिव्यक्ति को बढ़ावा दे रहे हैं। मैत्री समूह ‘शैक्षिक संवाद मंच उ.प्र.’ के माध्यम से आप रचनाधर्मी स्वप्रेरित शिक्षक-शिक्षिकाओं को जोड़कर विद्यालयों को आनंदघर बनाने के अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।

किसान आंदोलन नहीं उनके अंतर्मन की पीड़ा है। आत्माराम त्रिपाठी की✍🏻से

किसान आंदोलन नहीं उनके अंतर्मन की पीड़ा है
आत्माराम त्रिपाठी की✍🏻से


आज एक सप्ताह से अधिक समय हो गया दूर दराज से किसान अपने अपने किसान संगठनों के आवाहन पर दिल्ली पहुंचे और पहुंच रहे हैं। इस आशा से की उनकी मांगों उनके अंतर्मन में उमड़ रहे सवालों के जवाब मिल जाएंगे। उनकी मांगे पूरी होगी बहरी दिल्ली सोई हुई दिल्ली अपनी कुंभकर्णी नींद से जाग इन धरती पुत्रों को सुनेगी, उनकी समास्याओं का निदान करेगी पर यंहा तो तारीख दर तारीख मिलना चालू हो गया है ये कैसी बिडबंना है कि जो देश की रीढ़ है जीवचराचर की भूख की अंग्नि को अपनी कड़ी मेहनत से पैदा किए हुए अन्न से शांति प्रदान करता है आज वही अपनी समास्याओं को लेकर आन्दोलन करने को बाध्य हो गया है। उसके धैर्य का बांध टूट गया और खेत-खलिहान की रखवाली छोड़ निकल पडा दिल्ली की ओर।
पर यंहा भी वह ठगा जा रहा है उसकी समास्याओं के निदान की जगह उसे तारीखें मिलना प्रारंभ हो गई।
किसान अपने आपको ठगा महसूस कर रहा है और उसके संयम का बांध टूटता हुआ नजर आ रहा है। वहीं दूसरी तरफ राजनैतिक पार्टियों ने श्रेय लेने के होड में किसानों का हितैषी दिखाने के लिए अपने अपने बिलों से बाहर निकल मैदान में उतर आएं हैं।
वहीं सरकार किसानों की मांग पर गंभीरता दिखाने के बजाय राजनैतिक दलों के नेताओं की गिरफ्तारी में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहीं हैं जिससे मौजूदा हालात में यही संदेश जा रहा है कि जो किसान हित की बात करेगा सरकार द्वारा लाए गए बिल कानून का विरोध करेगा उसे जेल में ठूंस दिया जाएगा।
इतिहास गवाह है जब भी इस तरह का दमन चक्र चला है परिवर्तन लाया है।आज राजहठ की जरूरत नहीं है बल्कि किसान आंदोलन करने केलिए क्यों बाध्य हुआ?उसे जानने समझने व उसके निदान करने की आवश्यकता है इसके लिए राजहठ को छोड़कर धरती पुत्रों की आवाज जो अंबर से उड़ती हुई हवा के सहारे हर स्वास के माध्यम से आत्मा की गहराईयों में उतर सबकी आत्माओं को झकझोर रही है। और यह ज्वालामुखी का रूप धारण करले उसके पहले उनकी समास्याओं उनकी शंकाओं को दूर करना आवश्यक है यही देश हित में है क्योंकी जय जवान जय किसान का नारा भी तभी तक सार्थक एवं उपयोगी है जब तक इन दोनों का संम्मान यह हमारे देश की धुरी है आत्मा है और आत्मा के बिना जीवन की कल्पना करना भी बेइमानी है।
आज जिस तरह से शांति तारीके से किसान आंदोलन चलाया जा रहा है उसके लिए वह बधाई के पात्र हैं और प्रशंसनीय है जिसे केवल किसान ही कर सकता है।

सड़क दुघर्टना में दूल्हे की मौत सेखुशियां मातम में बदलीआज जानी थी बारातरामकिशोर उपाध्याय की रिपोर्ट

सड़क दुघर्टना में दूल्हे की मौत से
खुशियां मातम में बदली
आज जानी थी बारात
रामकिशोर उपाध्याय की रिपोर्ट

बाँदा कालिंजर, किसी मां के लिए कितना ह्रदय विदारक होगा वह क्षण जब वह बेटे के सिर सेहरा सजने की खुशी में मंगलगीत गा रही हो और अचानक उसे बेटे की मौत का समाचार प्राप्त हो। आंखों में आंसू ला देने वाला ऐसा ही एक केस सामने आया बांदा जिले में। कालिंजर थाना क्षेत्र के नीवी गांव के मजरा चुनकाई पुरवा निवासी रामगोपाल के बड़े बेटे 20 वर्षीय संतोष कुमार की शुक्रवार को गोखियां गांव बरात जानी थी। गुरुवार की रात वह बिना जानकारी दिए गांव के ही रामराज के 16 वर्षीय बेटे विनोद उर्फ नन्ना राजपूत के साथ बरछा गांव चला गया। देर रात लौटते समय घर से करीब ढाई किमी. पहले भिठौरा और गुढ़ा गांव के बीच मुख्य मार्ग पर सामने से आ रही तेज रफ्तार कार की बाइक में टक्कर लग गई। टक्कर लगते ही संतोष बाइक समेत नहर में जा गिरा, जबकि नन्ना उछलकर गिरने से जख्मी हो गया। काफी देर तक युवक उसी नहर में पड़ा रहा, दोस्त को इस स्थिति में देख उसका साथी घबरा गया गया। उसने मदद के लिए शोर मचाया तब ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत से दोनों को बाहर निकाला और नरैनी सीएचसी ले गए जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। सूचना पर स्वजन पहुंच गए और जिला अस्पताल ले ही जा रहे थे कि बीच रास्ते में युवक ने दम तोड़ दिया। घटना कालिंजर थाना क्षेत्र के भिठौरा और गुढ़ा गांव के बीच हुई। मायन पूजन के बीच मंगलगीत गा रही महिलाओं को जैसे ही खबर मिली, पहाड़ टूट पड़ा। चीत्कार से हंसी-खुशी का माहौल गमगीन हो गया।

संतोष के बड़े भाई बबलू ने बताया कि घर में गीत-संगीत का कार्यक्रम चल रहा था, तभी दुखद हादसे की सूचना मिली। संतोष बरछा गांव में एक रिश्तेदार को लेने गया था, रिश्तेदार ऑटो से आ गए और वह बाइक से लौट रहा था।

ढोलक की थाप के बीच मंगलगीत गा रही महिलाओं के बीच जैसे ही खबर पहुंची, चीख-पुकार मच गई। मां रामलली भी बेसुध होकर गिर पड़ीं। दो छोटे भाइयों का हाल बेहाल हो गया। नाते-रिश्तेदारों से भरे घर में सुबह बरात जाने की तैयारी थी, वहीं अर्थी उठाने की तैयारी होने लगी। सुबह मजमा लग गया, किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे घर वालों को सांत्वना दें। नरैनी सीओ सियाराम ने बताया कि स्वजन की ओर से किसी प्रकार की तहरीर नहीं दी गई है। कागजी कार्रवाई की गई है।

शुक्रवार को धरना आंदोलन स्थान पर शिवकुमार कक्काजू के नेतृत्व में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, एवं कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का, आज आंदोलन में गुस्साए किसानों के द्वारा धरना स्थल पर पुतला दहन किया

शुक्रवार को धरना आंदोलन स्थान पर शिवकुमार कक्काजू के नेतृत्व में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, एवं कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, आज आंदोलन में गुस्साए किसानों के द्वारा उनकी मांगे पूरी ना होने के कारण आज किसानों ने धरना स्थल पर पुतला दहन किया गया//

इस मौके पर मुख्य रूप से बुंदेलखंड किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल कुमार शर्मा, जगजीत सिंह दल्लेबाल पंजाब के बड़े किसान, मेघा पाटकर महाराष्ट्र, कुलदीप सिंह पंजाब, बुंदेलखंड किसान यूनियन राष्ट्रीय सचिव अखिलेश रावत, गणेश प्रसाद शर्मा राष्ट्रीय संगठन मंत्री, श्रवण कुमार शर्मा वरिष्ठ उपाध्यक्ष बुंदेलखंड किसान यूनियन, चतुर्भुज पटेल राष्ट्रीय प्रवक्ता, उमा सिंह राष्ट्रीय प्रवक्ता, दिनेश कुमार निरंजन राष्ट्रीय संगठन मंत्री युवा मोर्चा जिला टीकमगढ़ मध्य प्रदेश, राजा मनीष तिवारी कार्यालय प्रमुख, महीपत कुशवाहा, किशोरी लाल, मोतीलाल दुबेदी, राजाराम निषाद, सुरेंद्र पटेल, साईं बाबा, गुलाब बाबा, अभिमन्यु, अक्षय नरवाल, राज रावत डबरा, सौरभ तिवारी जबेरा, डॉ पंकज तिवारी पनवाड़ी, प्रतिपाल सिंह रावत मसूदपुर, रघुवंशी रायसेन, रवि दत्त सिंह रीवा, मुख्य रूप से एवं भारी संख्या में किसान यूनियन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे

नरैनी भाजपा विधायक ने उच्च प्राथमिक विद्यालय पुकारी में सरस्वती प्रतिमा में दीप प्रज्वलित कर बच्चों को बांटे निशुल्क जूते मोजे एवं ड्रेस। राम किशोर उपाध्याय

नरैनी भाजपा विधायक ने उच्च प्राथमिक विद्यालय पुकारी में सरस्वती प्रतिमा में दीप प्रज्वलित कर बच्चों को बांटे निशुल्क जूते मोजे एवं ड्रेस


राम किशोर उपाध्याय



बांदा जनपद के विकासखंड नरैनी अन्तर्गत ग्राम पंचायत पुकारी में बने उच्च प्राथमिक विद्यालय में उत्तर प्रदेश सरकार की निशुल्क शिक्षा, निशुल्क यूनिफॉर्म, जूते एवं निशुल्क मोजे योजना के तहत विद्यालय में खंड शिक्षा अधिकारी नरैनी शिव अवतार की उपस्थिति में बच्चो को यूनिफॉर्म वितरण किया।

साथ ही ऑनलाइन शिक्षा के लिए प्रेरित किया, उनके अभिभावकों को भी प्रेरित किया कि घर में शिक्षा के प्रति बच्चो को जागरूक करे ताकि कोरोना काल में जो शिक्षा गुरुजनों से प्राप्त नहीं हो पा रही हैं वो घर में अभिभावकों से मिल सकें और बच्चो के उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की। कार्तिकेय और गोलू ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की एवं विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सम सुन निशा ने विधायक राजकरण कबीर को गणेश जी की प्रतिमा स्मृत चिन्ह के रूप में भेंट की ।

कार्यक्रम का संचालन जय बजरंग प्राथमिक विद्यालय शंकर बाजार के प्रबंधक दादू आत्माराम त्रिपाठी ने किया अवधेश कुमार पांडे जग प्रसाद यादव नीलम सिंह ने पुष्प भेंट कर सभी का अभिवादन किया
इस मौके पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक ,संकुल प्रभारी मदन कुमार पूर्व बीआरसी प्रभारी जफर अली खान शिक्षक संघ नारायणी के अध्यक्ष विश्व प्रताप सिंह महामंत्री शिक्षक संघ सुनील कुमार सढा संकुल के प्रभारी रामचंद्र वर्मा ग्राम प्रतिनिधि सहित समस्त विद्यालय स्टाफ, छात्र छात्राएं व उनके अभिभावक भी मौजूद रहे।

यह पव्लिक है सब जानती हैआत्माराम त्रिपाठी की✍🏻से

यह पव्लिक है सब जानती है
आत्माराम त्रिपाठी की✍🏻से


पत्रकारो को धमकी देने का चलन हो गया है।यह धमकी तभी मिलती है जब एक पत्रकार की कलम से सच निकल कर सामने आता है और सामने वाले को समाज के सामने वेपर्दा कर देता है। जंहा पर वह अपने आप को पाक साफ दिखाता है। और उसी सफेदी की आड़ में काली करतूतों को अंजाम देने में हिचक महसूस नहीं करता।आज वैसे तो पूरे देश मे अबैध खनन हो रहा है कंही भी नियमों के तहत खनन नहीं हो रहा। हां नियमों को ताक में रखकर खनन का कार्य जरूर हो रहा है।इस बात की गवाही प्रमाण शासन प्रशासन द्वारा समय-समय पर की गई कार्रवाई दर्ज किए गए प्रकरणों से साफ जाहिर होता है। और यह कार्यवाही हुई जब पत्रकारों की कलमें चली इनके कारनामों को उजागर किया गया तब जाकर इनकी नींदें खुली होस आया और कार्रवाई की।अब हम बात करते हैं बांदा जनपद की जंहा पर सीबीआई ने अपना डेरा जमा रखा है और उन अधिकारियों सहित सफेदपोश नेताओं की नींदें हराम है जो इस अबैध बालू खनन में पहले य आज लिप्त थे य हैं सीबीआई के राडार पर है नोटिसें मिल रही है पूछताछ में इनके पसीने छूट रहे हैं सफेद रंग उतर रहा है कालिख लग रही है यह तिलमिला उठे हैं कोई पत्रकारों को कार्यवाही करने की धमकी देता है। तो कलम इन धमकियों से कभी झुकी नहीं हां यह जरूर हुआ कि वह मजबूती से आगे बढ़ती रही और इन सफेदपोशों को समाज के सामने बेपर्दा करती रही है और करती रहेगी।रही बात जनपद बांदा में अबैध खनन की तो आज कोई ऐसी जगह नहीं है जहां खनन के नियमों का पालन किया जा रहा हो। और जो नियम कानून से हटके है वह असंवैधानिक है अबैध है और यही यंहा हो भी रहा है। और जब कोई पत्रकार इसे उजागर करता है उसे कार्रवाई का भय दिखा दबाने की कोशिश की जाती है।
दस्यु सम्राट ददुआ ने मंदिर बनवाए गरीब कन्याओं की सादी करवाई ऐसा लोग कहते थे।पर क्या इन सब कार्यो से उसके द्वारा किए गए डकैती अपहरण मार्डर जैसे बुरे कर्म के पाप धुल गये नहीं उसी तरह नदियों को जिनमें पतित पावन गंगा यमुना सरस्वती नर्मदा जिन्हें हम मां कहकर पुकारते हैं उसी तरह अन्य नदियों को भी मां कहकर पुकारते हैं नमन करते हैं पर उसके सीने को जिससे हमें जीवन मिलता है बेदर्दी से चीरकर अबैध खनन करने में संकोच नहीं करते। और जब कलम इस सबको उजागर करती है तो उसे कार्रवाई का भय दिखाकर चुप कराने की नाकाम कोशिश की जाती है।आज वर्तमान य भूत जनप्रतिनिधियों में इतना नैतिक साहस है कि खुलकर सामने आए और बताएं कि इस अबैध बालू खनन में किन किन जनप्रतिनिधियों की संलिप्तता है य पहले थी अगर नहीं तो पत्रकारों को धमकाने के बजाय सीबीआई के जवाबों का सामना करे यह पब्लिक है सब जानती है।

कविगोष्ठी में कवियों की कविताओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कियाआत्माराम त्रिपाठी की रिपोर्ट

कविगोष्ठी में कवियों की कविताओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया
आत्माराम त्रिपाठी की रिपोर्ट


बांदा अतर्रा बांदा आज अतर्रा में रमेश सचदेवा के आवास पर कवि गोष्ठी आयोजित की गई जिसकी अध्यक्षता ब्रह्म विज्ञान इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शिवदत्त त्रिपाठी ने की और इस गोष्ठी का संचालन रामकरण साहू जी ने किया,मूलचन्द्र कुशवाहा (सेवा नि प्रधानाचार्य) ने सरस्वती वन्दना की हनुमान प्रसाद निर्मल (चित्रकूट) ने साली, घरवाली पर कविता पाठ किया, प्रमोद दीक्षित मलय ने तथा महेंद्र गुप्ता मृदुल ने कविता पाठ से मंत्र मुग्ध कर दिया शिवदत्त त्रिपाठी ने बेटी की अभिलाषा तथा रामावतार साहू ने पगडंडियों से राजपथ तक अपने कविता संग्रह से काव्य पाठ किया । डा.चौरिहा ने सोहर गीत सुनाया रमेशं सचदेव ने सभी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि अतर्रा में संगोष्ठी का क्रम चलता रहे ।संगोष्ठी में प्रवीण द्विवेदी, लखन दीक्षित आदि उपस्थित रहे

#हादसा #दुर्घटना बांदा से नागपुर जा रही तेज रफ्तार यात्री बस अनियंत्रित होकर पलटी, एक की मौके पर मौत 2 दर्जन से अधिक घायल

बड़ी खबर
बांदा से नागपुर जा रही तेज रफ्तार यात्री बस अनियंत्रित होकर पलटी, एक की मौके पर मौत 2 दर्जन से अधिक घायल


घायलों में महिलाएं बच्चे और पुरुष शामिल, सभी घायल जिला चिकित्सालय पन्ना के लिए रेफर, पुलिस मौके पर, बचाव कार्य में जुटी स्थानीय लोग और पुलिस, बृजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत पहाड़ी खेरा चौकी के जरेला के पास की घटना।