जलालपुर —- थाने के इंसपेक्टर सत्य प्रकाश सिंह सोमवार से रात्रि में अपराध नियन्त्रण तथा क्षेत्र के अलग अलग स्थानों पर लगाए गये पुलिस की रात्रि ड्यूटी की निगरानी के लिए साइकिल से भ्रमण कर रहे हैं ।
सोमवार की रात बाकराबाद, सरकोनी होते हुए नत्थन पुर राजेपुर आदि स्थानों पर साईकिल से भ्रमण करने से क्षेत्र में काफी चर्चा है । एक तरफ जनता बहुत खुश है और वही दूसरी तरफविभिन्न स्थानों पर लगे पुलिस कर्मी भी ड्यूटी पर सक्रिय रहेगे लापरवाही नहीं कर सकेंगे ।
क्योंकि गाड़ी तो दूर से ही दिख जाती थी । लेकिन साईकिल नहीं दिखेगी । इसीलिए सभी लोग अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से करने के लिए मजबूर होंगे । इंसपेक्टर का यह पहल काबिले तारीफ है ।
मुबंई,कमाठीपुरा एम.आर.रोड ५वीं गली में स्व.कवि पी.एच. दासर के व्दितीय पुण्यतिथि पर मा. श्री अमिन पटेल (आमदार मुंबादेवी विघानसभा),मा.श्री जावेद जुनेजा(नगर सेवक प्रभाग क्रमांक २१३)के हाथों स्व. “कवि पेन्नप्पा हनमैय्या दासर चौक ” का उदघाटन किया गया। कवि स्व.पी.एच.दासर अहिन्दीभाषी होते हुए भी जीवनभर हिन्दी भाषा की सेवा करते रहे और कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे ।इस अवसर पर कवि पत्रकार रवि यादव,नन्दू पी. दासर ,इन्दर पी. दासर,दीपू पी. दासर, शशि यन.दासर एवं समस्त दासर परिवार तथा राजनीति, साहित्य और सामाजिक लोग उपस्थित थे। सभी लोगों ने स्व. पी.एच.दासर को श्रद्धांजलि अर्पित की ।
मुबंई, अक्षरधारा फाउंडेशन ने टाटा अस्पताल के कैंसर पीड़ित लगभग ५० बच्चों को चाकलेट, बिस्कुट,खिलौने एवं अन्य सामाग्री देकर उनके साथ नव वर्ष मनाया ।जिससे उनके चेहरों पर मुस्कान आ गयी। बुलबुल राय फाउंडेशन की अध्यक्षा – बुलबुल राय ने बच्चों के स्वस्थ जीवन की कामना की ।यह संस्था पिछले कई वषों से इसी तरह बच्चों के साथ नया साल मनाते आ रही है ।बुलबुल राय कहती हैं इन बच्चों के साथ थोडी़ खुशियां बांट कर मुझे बहुत सुकून मिलता है।इस प्रकार हर इंसान के दिलों में ऐसे लोगों के प्रति सहानुभूति होनी चाहिये ,क्योंकि मानव सेवा परमात्मा सेवा के बराबर है ।
बिल्कुल वैसे नए वर्ष तुम आना, जैसे घर में नवजात शिशु आता है। साथ में ढेरों खुशियाँ लाता है़ं। देखकर उसका सलोना मुखडा़ माँ सारी पीड़ा भूल जाती है। तुम भी ऐसे ही आना, बीते वर्ष की सारी कड़वी यादें भुला देना। जनवरी को मुस्कुराहट से भर देना, फरवरी में वसंत खिला देना, मार्च को रंग-बिरंगे रंगो से रंग देना, अप्रैल-मई की गर्मी की छुट्टियों में बचपन को महका देना, जून-जुलाई में बारिश की बुंदो के घुघंरूओ की झंकार से घर आंगन को गुंजा देना। अगस्त -सितम्बर तुम बनकर डाकिया, पर्वो की बारात संग उमंग, आनंद, उल्लास का संदेश लेकर आना। अक्टुबर को दियों से जगमगा देना, हर अंधेरे को उजाले से भर देना। नंवबर तुम कुनकुनाती सर्दी के एहसास को लेकर आना। प्रकृति की कृति को ठंडक से भर देना। सांसों को शीत ठंडे मस्त महकते पवन से सुवासित कर देना, सारा विषाद भुला देना। पूरे वर्ष का लेखा जोखा लिए दिसंबर तुम फिर आना। खुशियों का मुनाफा भारी रहा यह बतला देना। कोविड जड़ से मिट गया है, कोरोना संकट टल गया है, दुनिया फिर एक बार बेखौफ बन के दौड़ रही है, चारों और खुशियाँ छा रही है, हर कानों में यह गुनगुना देना। फिर तुम नए साल के आने की खुशखबरी लाना। दिसंबर-जनवरी तुमसे बहुत आशाएँ जुडी़ हैं। बस तुम आगे बढ़ने को प्रोत्साहित करते जाना। जैसे उंगली पकड़ कर माता-पिता बच्चों को चलना सिखा देते है, बढती उम्र के साथ उसे दुनिया से कदम मिलाना सीखा देते है, देखकर उसकी कामयाबी फूले नही समातें है, वैसे ही ऐ नये साल, तुम भी सबके ईश्वर रूपी माता-पिता बनकर इस सृष्टी के प्रत्येक प्राणी की झोली खुशियों से भर देना। आओ पधारो ऐ नये साल, तुम्हारे स्वागत में हम पलकें बिछाये बैठे हैं, पर सुनो, तुम मेहमान बनकर मत आना, बिल्कुल उस नवजात शिशु सा , घर का सदस्य बन कर आना, ढेर सारी खुशियों को संग लाना।
आशा और विश्वास का प्रकाश बांटने आया है नव वर्ष • प्रमोद दीक्षित मलय कालपुरुष अनंत पथ पर अविचल अविराम गतिमान है। यह गतिशीलता ही उसकी ऊर्जा है, उसका प्राणतत्व है, उसकी रचनात्मकता है। काल की गतिशीलता ही सृष्टि के सर्ज मनन का आधार है और विसर्जन का कारण भी। काल सर्वव्यापी, सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी है। कालातीत काल से परे कुछ भी नहीं, यत्र-तत्र-सर्वत्र काल की ही गरिमा और महिमा है। काल ही राजा है और प्रजा भी। काल ही स्वामी है और पालक भी। काल ही भोज्य है भोक्ता भी। कालपुरुष की अंगुलि थाम हम नवल यात्रा आरम्भ करें। काल के सुभाल पर रोली, चंदन, अक्षत का तिलक दे हम उसकी अर्चना, वंदना करें। नेह-जल से पाद प्रक्षालन कर आगवानी करें। हम समवेत सस्वर प्रार्थना करें कि यह नवल वर्ष हर मानव मन में सद्भाव, सहकार, शांति, सत्य, सख्य, संस्कार, सत्कर्म, सात्विकता, साहचर्य, सामंजस्य, सह-अस्तित्व, सामूहिकता, समता, समरसता का संचार कर दिव्य ऊर्जा एवं आभा से ओतप्रोत कर दे। अनृत, अभाव, अमानवीयता, अशौच, अश्लीलता, अराजकता, अशालीनता के कलुष, कदाचार, कुभावों से मुक्त कर सत्पथ का अनुगामी बनाये। प्रत्येक सदन धन-धान्य से परिपूर्ण हों, परिवार में परस्पर प्रेमरस प्रवहमान हो, हर मस्तिष्क शब्द सम्पदा से समृद्ध हो और हृदय-मन प्रशांत प्रबुद्ध हों। विचार शुद्ध सौम्य हो, प्रकृति में बिखरा हुआ सर्वत्र सुवासित नैसर्गिक सौंदर्य हो। अम्बर अमिय अमित वर्षा करें, धरा शस्य-श्यामला हो पल्लवित, पुष्पित हो सुफलदायिनी हो। विश्व में अनेक प्रकार के पंचांग प्रचलित हैं। तदनुसार नये वर्ष के विविध आयोजन भी लोक व्यवहार में दिखाई देते हैं। ये सभी पंचांग सूर्य और चंद्र की गतियों पर आधारित है। इसलिए उनके नये वर्ष का आगमन भी अलग-अलग महीनों में होता है। सूर्य और चंद्र पर गणना आधारित होने के कारण सभी पंचांगों के वर्षों में दिनों की संख्या भी बराबर नहीं होती, ये 355 से लेकर 365 तक होते हैं। गणना शुद्धि हेतु अधिवर्ष की भी आवश्कता पड़़ती है। ईस्वी सन् विश्व में प्रमुख रूप से प्रचलित है पर भारत में एक बड़े भाग में विक्रम संवत स्वीकार्य है जिसे सम्राट विक्रमादित्य ने आरम्भ किया था। ईस्वी सन् में 57 जोड़ने पर विक्रम सम्वत प्राप्त हो जाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नव वर्ष मनाया जाता है। इस काल प्रणाली में निमेष से लेकर (बल्कि उससे भी छोटी इकाईयों परमाणु, अणु, त्रसरेणु, त्रुटि, बोध, काष्ठा और लव आदि) युग, मनवन्तर और कल्प तक की गणना व्यवहार में है। यह काल गणना सूर्य, चन्द्र व पृथ्वी की गतियों पर आधृत है। एक वर्ष को 2 अयन, 12 मास, 24 पक्ष, 52 सप्ताह, 27 नक्षत्रों में विभाजित किया गया है। सैकड़ों वर्षांे बाद होने वाली आकाशीय घटनाओं, सूर्य एवं चन्द्र ग्रहण, पूर्णमासी, अमावस्या, पर्व-त्योहार आदि की सटीक घोषणा हिन्दू पंचांग में ही सम्भव दिखायी देती है। काल-ज्ञान हेतु उज्जयिनी भारत का केन्द्र बिन्दु है जैसे इंग्लैण्ड में ग्रीनविच है। जयपुर एवं दिल्ली की ‘जन्तर मन्तर’ वेधशालाएं आज भी सभी का ध्यान खींचती हैं। विक्रम सम्वत में बारह महीनों के नाम क्रमशः चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीष, पौष, माघ एवं फाल्गुन है। 78 ई. में शक सम्वत आरम्भ हुआ था। भारत सरकार द्वारा सरकारी कार्यों यथा राजपत्र प्रकाशन, दूरदर्शन एवं आकाशवाणी, भारत सरकार के मंत्रालयों द्वारा जारी कैलेंडरों में प्रयोग हेतु 22 मार्च 1957 से शक सम्वत को शासकीय मान्यता प्राप्त है जो ईस्वी सन् में 78 घटाने पर मिलता है, इसे शालिवाहन सम्वत भी कहा जाता है। अन्य काल दर्शकों के रूप में दक्षिण भारत में तमिल पंचांग, पश्चिमी बंगाल एवं अन्य पूर्वी भागों में बंगाली पंचांग को लोग महत्व देते हैं। केरल में सौर आधारित मलयालम पंचांग को प्रमुखता प्राप्त है। सिख समाज के धार्मिक कार्यों के संचालन के लिए नानकशाही कैलेंडर शुरू किया गया है। पंजाब में बैसाखी नये साल के स्वागत का कृषि आधारित पर्व है। इस्लामी देशों में हिजरी कैलेंडर स्वीकार किया गया है जिसमें 12 चंद्रमासों के 354 दिन होते हैं। पारसी समाज में प्रचलित पंचांग पारसी कैलेंडर कहलाता है जिसमें 30 दिनों के 12 महीने और वर्षांत में 5 दिन गाथा आयोजन के मिलाकर 365 दिन होते हैं। उल्लेखनीय है कि प्रचलित ईस्वी सन् ग्रगेरियन कैलेंडर पर आधारित होता है। सौर आधारित इस पंचांग में वर्ष में 365 दिन होते हैं। इसे पोप ग्रगोरी ने 1582 ई. में प्रस्तुत किया था। पहले इसमें 10 महीने होते हैं और दिसम्बर 10वां महीना होता था। पर अब 12 महीनों के 365 दिन और प्रत्येक चैथा साल अधि वर्ष होता है। यही पंचांग अब दैनंदिन कार्य व्यवहार में सहज रूप से प्रचलित है। पहली जनवरी को दुनिया भर में नये वर्ष का आगाज बड़े-बड़े आयोजन करके किया जाता है और करना भी चाहिए। पर सोचने की जरूरत है पटाखे फोड़ने से आकाश धुंए से भर जाता है। देर रात तक पार्टियों का दौर चलता है। तेज संगीत के शोर से ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि होती है। सुबह सड़कों और समुद्र किनारे खाने-पीने के सामानों के रैपर, बोतलें, प्लास्टिक कैरी बैग, गत्तों के टुकड़े बिखरे और हवा में उड़ते दिखायी देते हैं। जो न केवल प्रकृति बल्कि मानव के स्वास्थ्य के लिए हानिप्रद है और संक्रामक रोगों के फैलाव का कारण भी। समय सदैव हमे जीवन जीने के तौर-तरीके सिखा कर जाता है। लेकिन अविवेकी मानव-मन कहां कोई सीख लेता है। इतिहास से सबक लेना उसके स्वभाव में ही नहीं है। इसीलिए उन घटनाओं की पुनरावृत्ति होती है जिनसे बचा जाना हितकर होता है। कोरोनावायरस से फैले कोविड-19 ने पूरी दुनिया को अपनी मुट्ठी में जक्रड़ लिया था। समाज जीवन की प्रत्येक गतिविधि पर अंकुश लग गया था। इस कालावधि में प्रकृति मुस्काई। उसका खिल-खिला सौन्दर्य हर किसी को मोहने लगा। वायु स्वच्छ हो गई। सर-सरिताओं का नीर निर्मल हुआ। मनुष्य परिवार में समय देने को बाध्य हुआ। वह परिवार और सबंधों के महत्व को, प्रगाढ़ प्रेम को समझ पाया। पर हम सब विस्मृत कर बैठे। विश्वास करते हैं कि यह वर्ष सम्पूर्ण विश्व के लिए हिंसामुक्त, समता-ममता युक्त परिवेश निर्मिति में सहायक सिद्ध होगा। नव वर्ष का अभिनंदन करते हुए हम संकल्प लें कि देश के सर्वांगीण विकास में एक श्रेष्ठ नागरिक के रूप में अपनी भूमिका का निर्वहन करेंगे। •• लेखक शैक्षिक संवाद मंच उ0प्र0 के संयोजक है। सम्पर्क – बाँदा, (उ0प्र0) मोबा: 94520-85234
*कल शाम से लापता बच्चे को बरसठी पुलिस ने परिजनों को किया सुपुर्द*
*बरसठी (जौनपुर)* स्थानीय थाना क्षेत्र के ग्राम हसिया. निवासी सुनील बिंद के पुत्र सुंदरम बिंद उम्र लगभग 8वर्ष कल शाम को खेल रहे थे किसी तरह से वह शाम को अपने घर ना आ सका जिसे परिजनों को चिंता बढ़ती गई तत्काल उन्होंने बरसठी पुलिस को दी मामले की जानकारी के अनुसार सूचना मिलते ही बरसठी थाना प्रभारी निरीक्षक श्याम दास वर्मा मामले को तत्परता देखते हुए जांच पड़ताल में जुट गई और बरसठी पुलिस की तत्परता के कारण कल रात में ही आज ही रात सुखलालगंज फाटक से भटकते हुए देखा जैसे ही पुलिस की नजर पड़ी सुंदरम को पुलिस थाने में लाई और उनकी माता बिंदु देवी को सुपुर्द कर दी बरसठी पुलिस लापता बच्चे सुंदरम बिंद उम्र लगभग 8 वर्ष को ढूंढने में की इस कार्रवाई से लोगों में चर्चा का विषय बन गया है पुलिस तत्काल बच्चे को परिजनों को सुपुर्द कर दिया
गभिरन( जौनपुर ) खुटहन थाने पर तैनात वरिष्ठ उप निरीक्षक के द्वारा एक पत्रकार के साथ किए गए दुर्ब्यवहार के दो दिन बाद भी कार्यवाही न होने से आक्रोशित पत्रकार सोमवार को क्षेत्राधिकारी शाहगंज के कार्यालय का घेराव कर पत्रक सौपा। वहीं सीओ की गैरमौजूदगी के चलते पत्रक कार्यलय मे दिया गया। पत्रक में क्षेत्राधिकारी अंकित कुमार से मांग की गई है कि दोषी एसआई गोपाल तिवारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए स्थानांतरण की मांग की गई। कहा गया है कि यदि तीन दिन के अंदर स्थानांतरित नहीं किये गये तो पत्रकार ब्लाक, तहसील समेत जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन को बाध्य होगें। इस दौरान जौनपुर पत्रकार संध, श्रमजीवी पत्रकार संध, भारतीय पत्रकार संघ, क्रान्तिकारी पत्रकार संघ समेत सभी संगठनों से जुड़े शाहगंज, खुटहन, सरपतहा एवं खेतासराय के पत्रकार मौजूद रहे।
एस0ओ0जी0,सर्विलांस व थाना नेवढिया पुलिस की संयुक्त टीम ने लूट की घटना का किया सफल अनावरण, 05 लूटेरे गिरफ्तार, कब्जे से 02 देशी तमंचा मय कारतूस, 02 मोटरसाइकिल, सोने चांदी के जेवरात, मोबाईल व नगदी बरामद
श्री राजकरन नय्यर पुलिस अधीक्षक जौनपुर के निर्देशन में अपराध की रोकथाम एवं अपराधियों की गिरफ्तारी हेतु चलाये जा रहे विशेष अभियान के क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण जौनपुर के दिशा निर्देशन व क्षेत्राधिकारी मड़ियाहूं के कुशल पर्यवेक्षण में दिनांक- 25.12.2020 को स्वर्ण व्यवसायी को दुकान जाते समय बदमाशों द्वारा लूट की घटना कारित की गयी थी, जिसके सम्बन्ध में मु0अ0सं0 – 240/2020 धारा 394/411 भादवि पंजीकृत किया गया था, जिसका सफल अनावरण एस0ओ0जी0, सर्विलांस व थाना नेवढिया पुलिस द्वारा करते हुए दिनांक 27.12.2020 की रात्रि में बार्डर सिहोरीबीर बरमबाबा स्थान के पास से 05 शातिर लूटेरों को एक बारगी दविश देकर गिरफ्तार किया गया। जिनके कब्जे से 02 तमंचा 12 बोर मय 02 जिंदा कारतूस,01 मोबाइल, 02 मोटरसाइकिल, लूट से सम्बन्धित माल सोने चाँदी के गहने व नगद रुपये बरामद किया गया । गिरफ्तारी / बरामदगी के सम्बन्ध में मु0अ0स0 – 242/2020 धारा- 41/411/414/419/420 भादवि व मु0अ0सं0 243/20, 244/20 धारा 3/25 आर्म्स एक्ट पंजीकृत किया गया। अभियुक्तों के अन्य अपराधिक इतिहास का पता किया जा रहा है। *गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण –* 1. शनि कुमार सरोज पुत्र स्व0 शेरबहादुर सरोज नि0 मढ़ी थाना नेवढ़िया जनपद जौनपुर। 2.अरविन्द गौड़ पुत्र संजय गौड़ नि0 बशीरपुर थाना नेवढ़िया जनपद जौनपुर। 3.विकास यादव पुत्र रामलाल यादव नि0 छतरीपुर थाना केराकत जनपद जौनपुर। 4.नन्हे उर्फ भोलेनाथ पुत्र दुधनाथ गौतम नि0 गुतवन थाना नेवढ़िया जनपद जौनपुर । 5.अरविन्द पटेल पुत्र सुरेश पटेल नि0 आदीपुर थाना नेवढ़िया जनपद जौनपुर । *बरामदगी का विवरण -* 1. 02 देशी तमन्चा 12 बोर मय 02 जिन्दा कारतूस 2. 02 मोटरसाइकिल ( सुपर प्लेण्डर व टीवीएस अपाचे ) 3. चांदी का पायल – 05 , चांदी का मीना – 06, झाली सोने का – 02 , कील सोने का – 01 , 4. 01 मोबाइल – 01 व 4700/- रु0 नगद *गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम –* 1. उ0नि0 श्री संजय कुमार सिंह थानाध्यक्ष थाना नेवढिया जौनपुर। 2. निरी0 श्री पर्व कुमार सिंह एसओजी प्रभारी जनपद जौनपुर। 3. उ0नि0 श्रीअरुण मिश्रा एस0ओ0जी0 जौनपुर। 4. उ0नि0 श्री रामजनम यादव सर्विंलांस प्रभारी जौनपुर। 5. हे0का0 रामकृत यादव , का0 विनित कुमार सिंह , का0 राजन सिंह , का0 जयशील तिवारी , का0 सुशील कुमार , का0 स्वेतप्रकाश सिंह क्राइम ब्रांच जौनपुर। 6. हे0का0 पारसनाथ यादव , का0 अमरजीत यादव , का0 अनवार अहमद , का0 अखिलेश यादव , का0 रामआशीष यादव थाना नेवढ़िया जौनपुर।
शहीद स्थल पर कार्य बंद होने पर गेट पर बैठ काग्रेंसियो ने दिया धरना * उपजिलाधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन
नौपेड़वा(जौनपुर) धनियाँमऊ शहीद स्थल पर रविवार को काम बंद होने पर काग्रेंसियो ने गेट पर बैठकर धरना प्रदर्शन किया। सूचना पर पहुँचे उपजिलाधिकारी बदलापुर ने पहुँच धरनारत लोगों से बात की। काग्रेंसियो ने एसडीएम को मांगो के समर्थन में ज्ञापन सौंपा। मौके पर बक्शा ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष व शहीद जमीदार सिंह के प्रपौत्र डॉ. प्रभात विक्रम सिंह ने कहा की बीते शनिवार को बदलापुर विधायक रमेशचन्द मिश्र का कृत्य निंदनीय है। आज शहीद स्मारक का काम भी रुक जाने से हम कांग्रेसी क्षुब्ध है। कार्य बंद होने से नाराज कांग्रेसी एवं क्षेत्रवासी मौके पर गेट पर ही धरने पर बैठ गए है। लोगों की मांग रही कि तत्काल प्रवेश द्वार का निर्माण शुरू करवाया जाए। डॉ. प्रभात ने कहा की शहीदों का अपमान करने के लिए विधायक तत्काल इस्तीफा दे। जी के स्तीफा दिया जाए। सूचना पर बदलापुर इंसपेक्टर ने पहुँच उपजिलाधिकारी से बात की। पहुँचे एसडीएम को ज्ञापन देने के बाद धरना का समापन हुआ। इस मौके पर काग्रेंस जिलाध्यक्ष फैसल हसन तबरेज, बबलू गुप्ता, दीपक भट्ट, सुरेंद्र शर्मा, सूरज सिंह, राजेन्द्र यादव, अतुल सिंह सहित दर्जनों लोग मौजूद रहें।
जौनपुर। जनपद के विधानसभा बदलापुर क्षेत्र स्थित बलुआ मिरसादपुर में शहीद स्थल के सुन्दरी करण कार्य के उदघाटन एवं गेट के शिलान्यास को लेकर विधायक बदलापुर रमेश चन्द मिश्रा एवं जिलाधिकारी डी के सिंह के बीच टकराव का मामला अब तूल पकड़ने के साथ उच्च स्तर पर पहुंचता नजर आ रहा है। साथ ही अब इस मामले में कानून दांव पेंच का भी खेल शुरू हो गया है। जन प्रतिनिधि और सरकारी मशीनरी के बीच इस जंग में किसकी विजय होगी यह तो शासन में बैठे लोगों के उपर निर्भर करता है। लेकिन इतना तो तय है कि इस जंग का असर जनपद के विकास योजनाओं पर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
इस संदर्भ में जेपी सिंह प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश संसदीय शिष्टाचार/पत्राचार अनुभाग द्वारा दिनांक 21अक्टूबर 20 को पत्रांक संख्या 1255 से जारी पत्र के जरिये केन्द्र सरकार से जारी गाइडलाइन 1 सितम्बर 11 का हवाला देते हुए शासनादेश सं.1/2020/जी आई 18/90 सं.शि.प.का./2020/02(सं.शि.)2015 – 13.10.20 से कहा गया है कि सरकार की सहायता राशि से कराये जाने वाले विकास कार्यों उदघाटन शिलापट पर जन प्रतिनिधि जैसे सांसद, राज्य सभा सदस्य, विधायक, विधान परिषद सदस्य आदि का नाम लिखा जाना चाहिए। साथ ही जन प्रतिनिधि को सम्मान के साथ आमंत्रित किया जाये और उनके बैठने आदि व्यवस्था सम्मान जनक हो।
पत्र और शासनादेश के क्रम में निर्देश सभी विभागों के प्रमुख सचिव, मण्डलायुक्त और जिलाधिकारीयों को भेजा गया है। ताकि आदेश और शासनादेश का अनुपालन सुनिश्चित हो सके। शासन से जारी शासनादेश के बावजूद यहाँ पर बदलापुर विधानसभा क्षेत्र के बलुआ मिरसादपुर में शहीद स्थल के सुन्दरी करण कार्य कराने वाली कारदायी संस्था ने बदलापुर विधानसभा के विधायक को आमंत्रित करने के बजाय जिलाधिकारी को खुश करने के लिए उनके नाम का उदघाटन शिलापट बनवा दिया और उद्घाटन कराने की तैयारी में थे। लेकिन इसी बीच इस पूरे घटनाक्रम की खबर विधायक को लगी तो वह शहीद स्थल पर धमक पड़े और खण्ड विकास अधिकारी को कड़ी फटकार लगाया और उद्घाटन रोक दिया। इस घटना की खबर लगते ही जिलाधिकारी शहीद स्थल बलुआ नहीं गये। लेकिन विधायक के प्रति नाराजगी दिखी थी।
शहीद स्थल के उदघाटन का मामला यहीं पर शान्त नहीं हुआ बल्कि जिले की सुर्खियों में रहने के साथ ही प्रदेश की राजधानी उच्चाधिकारियों एवं सत्ता के शीर्ष पर आसीन सीएम के दरबार तक पहुँच गया है। जिले में हर एक नागरिक इस मामले के परिणाम पर टकटकी लगाये हुए हैं कि प्रशासन और जन प्रतिनिधि की इस जंग में किसकी जीत होती है।
हलांकि शासनादेश जन प्रतिनिधि के पक्ष में जाता है।
लेकिन जनता ने भी अपने जनादेश द्वारा चुने गए इस सेवक के खिलाफ एक लाइन में फैसला सुना दिया
लोगों ने कहा ” विधायक ने अपना नाम शिलापट्ट पर लिखवाने के लिए अमर शहीदों का अपमान किया है । हम शहीदों के अपमान का समय आने पर बदला लेकर बदलापुर का सेवक बदल देंगे
हालांकि ध्यान योग्य बात ये है जिलाधिकारी दिनेश सिंह की छवि जनता में एक कर्मठ समर्पित ईमानदार और दयावान शासकीय अधिकारी की है । क्षेत्र की जनता की चाहत थी कि जिलाधिकारी जी आकर अपने कर कमलों से भूमिपूजन सम्पन्न करें
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